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अच्छा भविष्य कैसे गढ़े, विषय ही नहीं क्या पढ़ें
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How to make a good future, no proper subject to read in collage
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धारचूला (बलुवाकोट)। बुलवाकोट महाविद्यालय में स्नातकोत्तर में छात्र प्रवेश नहीं ले पाते हैं। छात्रों को स्नातक करने के बाद स्नातकोत्तर में सिर्फ हिंदी, राजनीति शास्त्र और समाज शास्त्र के विषय का ही विकल्प है।
धारचूला विधानसभा के बलुवाकोट में 1996 में खोले गए महाविद्यालय पर 15 हजार से अधिक युवा निर्भर है लेकिन विषय नहीं होने से युवाओं को पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल और हल्द्वानी महाविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में महाविद्यालय में छात्र संख्या 650 है। विद्यालय में सिर्फ बीए की कक्षाएं संचालित होती हैं मगर बीए पूरा होने के बाद छात्रों को एमए में हिंदी, राजनीति शास्त्र और समाज शास्त्र विषय लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई छात्र ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मजबूरन अनचाहे विषय लेने पड़ते हैं।
चार साल से चल रही सिर्फ तीन विषयों की विज्ञान कक्षाएं
बलुवाकोट। चार साल पहले महाविद्यालय में विज्ञान विषयों का संचालन हुआ, लेकिन उसमें भी छात्रों के पास सिर्फ वनस्पति, जीव और सैन्य विज्ञान विषय का ही विकल्प है। भौतिक, रसायन सहित अन्य विषय नहीं है। ऐसे में छात्रों को पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हल्द्वानी और नैनीताल में जाकर प्रवेश लेना पड़ता है।
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जंतु विज्ञान की प्रवक्ता रानीखेत अटैच
बलुवाकोट। महाविद्यालय में जंतु विज्ञान की प्रवक्ता रानीखेत में अटैच है। एक साल से अधिक समय से वो रानीखेत महाविद्यालय में पढ़ा रही हैं। उनका वेतन महाविद्यालय बलुवाकोट से दिया जा रहा है।
सिर्फ नाम का महाविद्यालय है। विज्ञान विषय में छात्रों के पास सिर्फ तीन विषय हैं। कई छात्रों को मजबूर होकर इनको ही लेना पड़ता है। कई छात्रों को पिथौरागढ़ महाविद्यालय या अन्य जगह जाना पड़ता है। स्नातकोत्तर में भी विषय नहीं है। - पंकज मेहरा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, बलुवाकोट
छात्रों के पास अनचाहे विषय लेने के अलावा कोई और चारा नहीं है। महाविद्यालय तो खोल दिया गया मगर अभी भी व्यवस्थाएं बेहाल हैं। सभी विषय नहीं होने से दिक्कत का सामना करना पड़ता है। -आदेश तितियाल, छात्र, बलुवाकोट
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धारचूला विधानसभा के बलुवाकोट में 1996 में खोले गए महाविद्यालय पर 15 हजार से अधिक युवा निर्भर है लेकिन विषय नहीं होने से युवाओं को पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल और हल्द्वानी महाविद्यालय में प्रवेश लेने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। वर्तमान में महाविद्यालय में छात्र संख्या 650 है। विद्यालय में सिर्फ बीए की कक्षाएं संचालित होती हैं मगर बीए पूरा होने के बाद छात्रों को एमए में हिंदी, राजनीति शास्त्र और समाज शास्त्र विषय लेने के लिए मजबूर होना पड़ता है। कई छात्र ऐसे हैं जो आर्थिक रूप से कमजोर होने के कारण मजबूरन अनचाहे विषय लेने पड़ते हैं।
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चार साल से चल रही सिर्फ तीन विषयों की विज्ञान कक्षाएं
बलुवाकोट। चार साल पहले महाविद्यालय में विज्ञान विषयों का संचालन हुआ, लेकिन उसमें भी छात्रों के पास सिर्फ वनस्पति, जीव और सैन्य विज्ञान विषय का ही विकल्प है। भौतिक, रसायन सहित अन्य विषय नहीं है। ऐसे में छात्रों को पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, हल्द्वानी और नैनीताल में जाकर प्रवेश लेना पड़ता है।
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जंतु विज्ञान की प्रवक्ता रानीखेत अटैच
बलुवाकोट। महाविद्यालय में जंतु विज्ञान की प्रवक्ता रानीखेत में अटैच है। एक साल से अधिक समय से वो रानीखेत महाविद्यालय में पढ़ा रही हैं। उनका वेतन महाविद्यालय बलुवाकोट से दिया जा रहा है।
सिर्फ नाम का महाविद्यालय है। विज्ञान विषय में छात्रों के पास सिर्फ तीन विषय हैं। कई छात्रों को मजबूर होकर इनको ही लेना पड़ता है। कई छात्रों को पिथौरागढ़ महाविद्यालय या अन्य जगह जाना पड़ता है। स्नातकोत्तर में भी विषय नहीं है। - पंकज मेहरा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष, बलुवाकोट
छात्रों के पास अनचाहे विषय लेने के अलावा कोई और चारा नहीं है। महाविद्यालय तो खोल दिया गया मगर अभी भी व्यवस्थाएं बेहाल हैं। सभी विषय नहीं होने से दिक्कत का सामना करना पड़ता है। -आदेश तितियाल, छात्र, बलुवाकोट