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शिक्षक रूबीना और बहादुर को मिलेगा शैलेश मटियानी पुरस्कार-
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बहादुर सिंह कुंवार।
- फोटो : PITHORAGARH
चंपावत/पिथौरागढ़। चंपावत जीआईसी के शिक्षक सुरेश राम को इस बार शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। इस बार चयनित होने वाले इकलौते शिक्षक हैं। नेपाल सीमा से लगे मंच क्षेत्र के स्कूल में बालिका शिक्षा को इन्होंने खूब प्रोत्साहित किया है। लिपिक विहीन चंपावत जीआईसी में शिक्षक सुरेश अध्यापन कार्य के साथ ही लिपिकीय कार्य को भी कर रहे हैं। उनके सामाजिक विज्ञान विषय में हमेशा शत-प्रतिशत परीक्षाफल रहा। वहीं पिथौरागढ़ जिले से राजकीय प्राथमिक विद्यालय टाउन की सहायक अध्यापिका रूबीना खान और जीआईसी धारचूला के प्रवक्ता बहादुर सिंह कुंवर का नाम शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित किया गया है। मालूम हो कि मटियानी पुरस्कार में दस हजार रुपये नकद, प्रशस्ति पत्र के अलावा दो साल का सेवा विस्तार दिया जाता है।
पढ़ाने के साथ जीआईसी में कर रहे बाबू का अतिरिक्त काम
चंपावत। धारचूला ब्लॉक से वर्ष 1995 में सेवा शुरू करने वाले सुरेश राम ने नेपाल सीमा से लगे मंच क्षेत्र के स्कूल में बालिका शिक्षा को खूब प्रोत्साहित किया। उन्होंने दसवीं के बाद स्कूल छोड़ने वाली तीन बालिकाओं के पढ़ाई से संबंधित सभी खर्च उठाते हुए इंटर में पढ़ने को प्रेरित किया और बाद में इन तीनों बालिकाओं ने प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास की। उन्होंने डॉ. इंद्रसेन यादव के सहयोग से यहां अभियान चलाकर उन्हें स्कूल में प्रवेश के लिए प्रेरित किया। नतीजा यह हुआ कि बीच में पढ़ाई छोड़ने वाली बालिकाएं और विवाहित महिलाएं तक स्कूल जाने लगी। 2013 से चंपावत जीआईसी में तैनात शिक्षक सुरेश राम ने लंबे समय तक एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए छात्र-छात्राओं को बी और सी प्रमाणपत्र की परीक्षा के लिए प्रेरित किया। प्रधानाचार्य मनोज जोशी बताते हैं कि शिक्षण के अलावा 2017 से लिपिकीय कार्य में भी हाथ बंटाते रहे। जिला स्तर पर होने वाले प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहे हैं।
शिक्षिका रूबीना के प्रयासों से बढ़ी छात्राओं की संख्या
पिथौरागढ़। जिले के खड़कोट वार्ड में जन्मी रुबीना खान मुनस्यारी में 1996 से 1999 तक और 1999 से 2017 गेठीगड़ा झूलाघाट में सेवाएं दे चुकी हैं। वर्ष 2018 से राप्रावि टाउन में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। उन्होंने अपने सतत प्रयासों से बच्चों की संख्या को बढ़ाने का प्रयास किया। वर्ष 2018 से वह पिथौरागढ़ में राप्रावि टाउन में बच्चों को नवाचारी माध्यम से शिक्षा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को स्कूल तक लाना भी एक चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि राप्रावि में छात्राएं कम स्कूल में आती थी। जिसके बाद उन्होंने छात्राओं को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद बच्चे लगातार स्कूल आने लगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक को शिक्षा देते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को इस तरह पढ़ाया जाए कि उन्हें विषय आसानी से समझ आए और बच्चा किसी सवाल को पूछने में झिझक महसूस न करे।
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शिक्षा के साथ समाज सेवा से भी जुड़े हैं शिक्षक कुंवर
धारचूला(पिथौरागढ़)। शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित बिनकना धारचूला निवासी जीआईसी के प्रवक्ता बहादुर सिंह कुंवर समाजसेवा, पर्यावरण, पर्वतारोहण से जुड़े हैं। उन्होंने सहायक अध्यापक के पद पर जीआईसी नौगांव अल्मोड़ा में 1986 से दो वर्ष, जीआईसी अल्मोड़ा में 1988 से छह वर्ष, जीआईसी कौसानी में 1994 से 11 माह, जीआईसी बाड़ेछीना में 1995 से 1997 तक सहायक अध्यापक एलटी पद पर अपनी सेवाएं दी। इसके बाद उन्होंने 1997 से 2016 तक जीआईसी धारचूला में सहायक अध्यापक एलटी पर शैक्षिक सेवाएं दी। इसके बाद वर्ष 2016 से वह प्रवक्ता के पद पर जीआईसी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कुंवर वर्ष 1982 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के साथ नाश्ते में सम्मलित होने वाले जिले के पहले एनसीसी कैडेट बने। एनसीसी ऑफीसर रहते हुए उनके सहयोग से तीन कैडेटों को माउंट एवरेस्ट अभियान में शामिल होने का मौका मिला। धारचूला में वर्ष 2013 की आपदा में उन्होंने राहत बचाव कार्य किए। जिसके लिए उन्हें महानिदेशक ऑनर्स अवार्ड भी मिल चुका है। वह सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। छात्रों को सही दिशा और लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्य करते हैं। खंड शिक्षाधिकारी एमआर लोहिया, प्रधानाचार्य रामप्रसाद आर्या, शालू समेत कई लोगों ने उन्हें बधाई दी हैं।
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पढ़ाने के साथ जीआईसी में कर रहे बाबू का अतिरिक्त काम
चंपावत। धारचूला ब्लॉक से वर्ष 1995 में सेवा शुरू करने वाले सुरेश राम ने नेपाल सीमा से लगे मंच क्षेत्र के स्कूल में बालिका शिक्षा को खूब प्रोत्साहित किया। उन्होंने दसवीं के बाद स्कूल छोड़ने वाली तीन बालिकाओं के पढ़ाई से संबंधित सभी खर्च उठाते हुए इंटर में पढ़ने को प्रेरित किया और बाद में इन तीनों बालिकाओं ने प्रथम श्रेणी से परीक्षा पास की। उन्होंने डॉ. इंद्रसेन यादव के सहयोग से यहां अभियान चलाकर उन्हें स्कूल में प्रवेश के लिए प्रेरित किया। नतीजा यह हुआ कि बीच में पढ़ाई छोड़ने वाली बालिकाएं और विवाहित महिलाएं तक स्कूल जाने लगी। 2013 से चंपावत जीआईसी में तैनात शिक्षक सुरेश राम ने लंबे समय तक एनएसएस कार्यक्रम अधिकारी के रूप में कार्य करते हुए छात्र-छात्राओं को बी और सी प्रमाणपत्र की परीक्षा के लिए प्रेरित किया। प्रधानाचार्य मनोज जोशी बताते हैं कि शिक्षण के अलावा 2017 से लिपिकीय कार्य में भी हाथ बंटाते रहे। जिला स्तर पर होने वाले प्रशिक्षण में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहे हैं।
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शिक्षिका रूबीना के प्रयासों से बढ़ी छात्राओं की संख्या
पिथौरागढ़। जिले के खड़कोट वार्ड में जन्मी रुबीना खान मुनस्यारी में 1996 से 1999 तक और 1999 से 2017 गेठीगड़ा झूलाघाट में सेवाएं दे चुकी हैं। वर्ष 2018 से राप्रावि टाउन में बच्चों को शिक्षा दे रही हैं। उन्होंने अपने सतत प्रयासों से बच्चों की संख्या को बढ़ाने का प्रयास किया। वर्ष 2018 से वह पिथौरागढ़ में राप्रावि टाउन में बच्चों को नवाचारी माध्यम से शिक्षा दे रही हैं। उन्होंने बताया कि बच्चों को स्कूल तक लाना भी एक चुनौती थी। इसके लिए उन्होंने संघर्ष किया। उन्होंने बताया कि राप्रावि में छात्राएं कम स्कूल में आती थी। जिसके बाद उन्होंने छात्राओं को स्कूल आने के लिए प्रेरित किया। इसके बाद बच्चे लगातार स्कूल आने लगे। उन्होंने कहा कि शिक्षक को शिक्षा देते समय इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों को इस तरह पढ़ाया जाए कि उन्हें विषय आसानी से समझ आए और बच्चा किसी सवाल को पूछने में झिझक महसूस न करे।
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शिक्षा के साथ समाज सेवा से भी जुड़े हैं शिक्षक कुंवर
धारचूला(पिथौरागढ़)। शैलेश मटियानी पुरस्कार के लिए चयनित बिनकना धारचूला निवासी जीआईसी के प्रवक्ता बहादुर सिंह कुंवर समाजसेवा, पर्यावरण, पर्वतारोहण से जुड़े हैं। उन्होंने सहायक अध्यापक के पद पर जीआईसी नौगांव अल्मोड़ा में 1986 से दो वर्ष, जीआईसी अल्मोड़ा में 1988 से छह वर्ष, जीआईसी कौसानी में 1994 से 11 माह, जीआईसी बाड़ेछीना में 1995 से 1997 तक सहायक अध्यापक एलटी पद पर अपनी सेवाएं दी। इसके बाद उन्होंने 1997 से 2016 तक जीआईसी धारचूला में सहायक अध्यापक एलटी पर शैक्षिक सेवाएं दी। इसके बाद वर्ष 2016 से वह प्रवक्ता के पद पर जीआईसी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं। कुंवर वर्ष 1982 में तत्कालीन पीएम इंदिरा गांधी के साथ नाश्ते में सम्मलित होने वाले जिले के पहले एनसीसी कैडेट बने। एनसीसी ऑफीसर रहते हुए उनके सहयोग से तीन कैडेटों को माउंट एवरेस्ट अभियान में शामिल होने का मौका मिला। धारचूला में वर्ष 2013 की आपदा में उन्होंने राहत बचाव कार्य किए। जिसके लिए उन्हें महानिदेशक ऑनर्स अवार्ड भी मिल चुका है। वह सभी शिक्षकों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। छात्रों को सही दिशा और लक्ष्य प्राप्ति के लिए कार्य करते हैं। खंड शिक्षाधिकारी एमआर लोहिया, प्रधानाचार्य रामप्रसाद आर्या, शालू समेत कई लोगों ने उन्हें बधाई दी हैं।