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कम बर्फबारी के कारण इस बार निचले इलाकों में नहीं आए प्रवासी पक्षी
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मोनाल।
- फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। मुनस्यारी क्षेत्र में इस बार उच्च हिमालय में रहने वाले पक्षियों का कलरव नहीं सुनाई दे रहा है। इससे पक्षी प्रेमियों में काफी मायूसी है। हालांकि राजकीय पक्षी मोनाल आदि स्थानीय पक्षी काफी दिख रहे हैं।
पर्यटन नगरी में लोग नए साल की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन पक्षी प्रेमियों के चेहरे मायूस हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं होने के कारण सर्दियों में मुनस्यारी आने वाले पक्षियों का कलरव नहीं सुनाई दे रहा है। पिछले वर्ष उच्च हिमालय में बर्फबारी के बाद नवंबर अंतिम सप्ताह से ही विंग्ड रोजफिंच, पिंक ब्राउड फिंच, ग्रॉसबीक, हिमालयन स्नो कॉक, स्नो पाट्रेज, ग्रांडाला, डार्क ब्रेस्टेड रोज फिंच समेत कई पक्षी निचले इलाकों में आ जाते थे। पक्षी प्रेमी इन पक्षियों को अपने कैमरे में कैद करते थे। इस साल कम बर्फबारी होने से यह पक्षी अभी नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन इस बार ऐसा ऐसा नहीं हुआ है। खलिया क्षेत्र में इस बार सिर्फ स्नो कॉक, स्नो पाट्रेज ही दिखाई दे रहे हैं। इनकी संख्या काफी कम है। हालांकि राज्य पक्षी मोनाल के बेटुलीधार, कालामुनि क्षेत्र में पहुंचने पर पक्षी प्रेमियों को कुछ सुकून है, लेकिन उन्हें अभी भी अन्य पक्षियों का बेसब्री से इंतजार है।
दस वर्षों में पहली बार हुआ ऐसा
पिथौरागढ़। चेन्नई के पारिस्थितिकी प्रकृति विशेषज्ञ के रामनारायण ने बताया कि पिछले दस वर्षों में ऐसा हुआ है जब उच्च हिमालयी क्षेत्र में पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई है, जिस कारण उच्च हिमालय क्षेत्र में रहने वाले पक्षियों ने निचले इलाकों में माइग्रेट नहीं किया है। कई ऐसे पक्षी हैं जो सर्दियों में नहीं दिखते थे। वह अभी भी दिखाई दे रहे हैं। साधारण पक्षी गोल्डन बुश रॉबिन, ब्लू कैप्ड रेडस्टार्ट मुनस्यारी घाटी में दिखती थी, लेकिन यह भी अभी दो हजार फुट की ऊंचाई पर ही दिख रही हैं। जनवरी में बर्फबारी होने पर ही उच्च हिमालय क्षेत्र के पक्षी देखने को मिलेंगे। चक्स पांच हजार फुट, पंजाब या तिब्बतियन रेबन पांच हजार फुट की ऊंचाई तक जाते हैं। लेकिन भोजन के लिए यह नीचे आते हैं। उन्होंने बताया कि उच्च हिमालय में रहने वाले सभी पक्षी बर्फबारी के बाद नवंबर से फरवरी तक निचले क्षेत्रों में रहते हैं। इसके बाद यह मार्च में ऊपर की तरफ जाना शुरू कर देते हैं।
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इस बार नहीं दिखी स्पेक्टेक्लड फिंच
पिथौरागढ़। पक्षी विशेषज्ञ रामनारायण ने बताया कि इन सर्दियों में स्पेक्टेकल्ड फिंच, ब्रांबलिंग, गोल्डन ईगल को देख पाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में फायर ब्रेस्टेड फ्लावर पेकर, वर्डिक्ट फ्लाईकैचर, स्पॉटेड डव आदि पक्षी दिखाई दे रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष तक यह पक्षी इस माह नहीं दिखाई देते थे। कहा कि पक्षी भी मौसम के अनुकूल खुद को ढाल रहे हैं। यह सभी पक्षी दो से 23 हजार फुट तक की रेंज में दिखाई देते थे। इनमें से स्पेक्टेकल्ड फिंच, ब्राम्लिंग देख पाना बेहद मुश्किल है।
पिछले वर्ष उच्च हिमालय क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद नवंबर में पक्षियों का डेरा खलिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगना शुरू हो जाता था लेकिन इस बार बर्फबारी न होने के कारण पक्षी निचले हिस्सों में नहीं पहुंचे हैं। सिर्फ मोनाल ही लोगों का मन बहला रहा है। उच्च हिमालय के पक्षी मुनस्यारी, नंदा देवी मंदिर, पापड़ी गांव, बेटुलीधार, बलाती फार्म के आसपास दिखाई देती है। - सुरेंद्र पवार, सचिव, मोनाल संस्था।
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पर्यटन नगरी में लोग नए साल की तैयारी में जुटे हैं, लेकिन पक्षी प्रेमियों के चेहरे मायूस हैं। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बर्फबारी नहीं होने के कारण सर्दियों में मुनस्यारी आने वाले पक्षियों का कलरव नहीं सुनाई दे रहा है। पिछले वर्ष उच्च हिमालय में बर्फबारी के बाद नवंबर अंतिम सप्ताह से ही विंग्ड रोजफिंच, पिंक ब्राउड फिंच, ग्रॉसबीक, हिमालयन स्नो कॉक, स्नो पाट्रेज, ग्रांडाला, डार्क ब्रेस्टेड रोज फिंच समेत कई पक्षी निचले इलाकों में आ जाते थे। पक्षी प्रेमी इन पक्षियों को अपने कैमरे में कैद करते थे। इस साल कम बर्फबारी होने से यह पक्षी अभी नजर नहीं आ रहे हैं, लेकिन इस बार ऐसा ऐसा नहीं हुआ है। खलिया क्षेत्र में इस बार सिर्फ स्नो कॉक, स्नो पाट्रेज ही दिखाई दे रहे हैं। इनकी संख्या काफी कम है। हालांकि राज्य पक्षी मोनाल के बेटुलीधार, कालामुनि क्षेत्र में पहुंचने पर पक्षी प्रेमियों को कुछ सुकून है, लेकिन उन्हें अभी भी अन्य पक्षियों का बेसब्री से इंतजार है।
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दस वर्षों में पहली बार हुआ ऐसा
पिथौरागढ़। चेन्नई के पारिस्थितिकी प्रकृति विशेषज्ञ के रामनारायण ने बताया कि पिछले दस वर्षों में ऐसा हुआ है जब उच्च हिमालयी क्षेत्र में पर्याप्त बर्फबारी नहीं हुई है, जिस कारण उच्च हिमालय क्षेत्र में रहने वाले पक्षियों ने निचले इलाकों में माइग्रेट नहीं किया है। कई ऐसे पक्षी हैं जो सर्दियों में नहीं दिखते थे। वह अभी भी दिखाई दे रहे हैं। साधारण पक्षी गोल्डन बुश रॉबिन, ब्लू कैप्ड रेडस्टार्ट मुनस्यारी घाटी में दिखती थी, लेकिन यह भी अभी दो हजार फुट की ऊंचाई पर ही दिख रही हैं। जनवरी में बर्फबारी होने पर ही उच्च हिमालय क्षेत्र के पक्षी देखने को मिलेंगे। चक्स पांच हजार फुट, पंजाब या तिब्बतियन रेबन पांच हजार फुट की ऊंचाई तक जाते हैं। लेकिन भोजन के लिए यह नीचे आते हैं। उन्होंने बताया कि उच्च हिमालय में रहने वाले सभी पक्षी बर्फबारी के बाद नवंबर से फरवरी तक निचले क्षेत्रों में रहते हैं। इसके बाद यह मार्च में ऊपर की तरफ जाना शुरू कर देते हैं।
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इस बार नहीं दिखी स्पेक्टेक्लड फिंच
पिथौरागढ़। पक्षी विशेषज्ञ रामनारायण ने बताया कि इन सर्दियों में स्पेक्टेकल्ड फिंच, ब्रांबलिंग, गोल्डन ईगल को देख पाना मुश्किल है। उन्होंने बताया कि इस मौसम में फायर ब्रेस्टेड फ्लावर पेकर, वर्डिक्ट फ्लाईकैचर, स्पॉटेड डव आदि पक्षी दिखाई दे रहे हैं, जबकि पिछले वर्ष तक यह पक्षी इस माह नहीं दिखाई देते थे। कहा कि पक्षी भी मौसम के अनुकूल खुद को ढाल रहे हैं। यह सभी पक्षी दो से 23 हजार फुट तक की रेंज में दिखाई देते थे। इनमें से स्पेक्टेकल्ड फिंच, ब्राम्लिंग देख पाना बेहद मुश्किल है।
पिछले वर्ष उच्च हिमालय क्षेत्रों में बर्फबारी के बाद नवंबर में पक्षियों का डेरा खलिया और उसके आसपास के क्षेत्रों में लगना शुरू हो जाता था लेकिन इस बार बर्फबारी न होने के कारण पक्षी निचले हिस्सों में नहीं पहुंचे हैं। सिर्फ मोनाल ही लोगों का मन बहला रहा है। उच्च हिमालय के पक्षी मुनस्यारी, नंदा देवी मंदिर, पापड़ी गांव, बेटुलीधार, बलाती फार्म के आसपास दिखाई देती है। - सुरेंद्र पवार, सचिव, मोनाल संस्था।