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Pithoragarh News: सूख रहे जल स्रोतों को बारिश से मिलेगा नया जीवन
Tue, 21 Mar 2023 11:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 21 Mar 2023 11:52 PM IST
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पिथौरागढ़। उच्च हिमालयी क्षेत्र में हिमपात और निचले इलाकों में बारिश होने से चार माह से पड़ा सूखा समाप्त हुआ है। साथ ही सूखने की कगार पर पहुंच चुके जल स्रोतों को भी पुनर्जीवन मिलेगा। गर्मियों में जल संकट से निपटने में भी बारिश मददगार साबित होगी।
वर्ष 2022 में नवंबर और दिसंबर में बारिश नहीं हुई थी। उच्च हिमालयी क्षेत्र को छोड़कर इस वर्ष जनवरी और फरवरी में भी सूखा रहा था। इसके चलते फसलों को तो नुकसान हुआ ही जल स्रोतों में भी पानी कम हो गया था। मुनस्यारी में हिमपात नहीं होने से जनवरी में ही जल संकट पैदा हो गया था। चार माह से बारिश नहीं होने से फरवरी में जल स्रोतों के अलावा हैंडपंप भी जवाब देने लगे थे। इसके चलते नौले-धारों और हैंडपंपों पर निर्भर लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ा था। तेजी से बढ़ता तापमान और घटता जल स्तर जल संस्थान के लिए भी चुनौती बनता जा रहा था।
मार्च में हो रही बारिश सूख रहे जल स्रोतों के लिए वरदान साबित हुई है। जल संस्थान के ईई सुरेश जोशी का कहना है कि बारिश से जल स्रोत रिचार्ज हुए हैं। इससे जल संकट से निपटने में काफी हद तक राहत मिलेगी।
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पहाड़ पर फसलों के लिए भी वरदान होगी बारिश
पिथौरागढ़। देर से ही सही मार्च में हुई बारिश पहाड़ की फसलों के लिए भी वरदान साबित होगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.चेतन भट्ट ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड के कारण फसलें देरी से तैयार होती हैं। गेहूं, जौ, मसूर सहित अन्य फसलों की पौध में फरवरी तक बढ़ोतरी नहीं हो पाती है। मार्च से ही तापमान में वृद्धि होने के बाद फसलों की पौध और दानों का आकार बढ़ता है। उन्होंने बताया कि यह बारिश खेतों में तैयार हो रही फसलों के लिए वरदान बनेगी। संवाद
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वर्ष 2022 में नवंबर और दिसंबर में बारिश नहीं हुई थी। उच्च हिमालयी क्षेत्र को छोड़कर इस वर्ष जनवरी और फरवरी में भी सूखा रहा था। इसके चलते फसलों को तो नुकसान हुआ ही जल स्रोतों में भी पानी कम हो गया था। मुनस्यारी में हिमपात नहीं होने से जनवरी में ही जल संकट पैदा हो गया था। चार माह से बारिश नहीं होने से फरवरी में जल स्रोतों के अलावा हैंडपंप भी जवाब देने लगे थे। इसके चलते नौले-धारों और हैंडपंपों पर निर्भर लोगों को पानी के संकट का सामना करना पड़ा था। तेजी से बढ़ता तापमान और घटता जल स्तर जल संस्थान के लिए भी चुनौती बनता जा रहा था।
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मार्च में हो रही बारिश सूख रहे जल स्रोतों के लिए वरदान साबित हुई है। जल संस्थान के ईई सुरेश जोशी का कहना है कि बारिश से जल स्रोत रिचार्ज हुए हैं। इससे जल संकट से निपटने में काफी हद तक राहत मिलेगी।
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पहाड़ पर फसलों के लिए भी वरदान होगी बारिश
पिथौरागढ़। देर से ही सही मार्च में हुई बारिश पहाड़ की फसलों के लिए भी वरदान साबित होगी। कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ.चेतन भट्ट ने बताया कि पर्वतीय क्षेत्रों में ठंड के कारण फसलें देरी से तैयार होती हैं। गेहूं, जौ, मसूर सहित अन्य फसलों की पौध में फरवरी तक बढ़ोतरी नहीं हो पाती है। मार्च से ही तापमान में वृद्धि होने के बाद फसलों की पौध और दानों का आकार बढ़ता है। उन्होंने बताया कि यह बारिश खेतों में तैयार हो रही फसलों के लिए वरदान बनेगी। संवाद