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किसान पिता की खुदखुशी के बाद तीन बच्चे हुए अनाथ

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 03 Feb 2021 11:08 PM IST
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Help for Anaath Childrens
तेंदुए के हमले में मृत खीमा देवी के बच्चों को सहायता राशि देते सोसायटी के पदाधिकारी। संवाद - फोटो : PITHORAGARH
अस्कोट (पिथौरागढ़)। कर्ज के बोझ से खुदकुशी करने वाले ग्राम पंचायत जेठीगांव के पातली गांव निवासी किसान के तीन बच्चे अनाथ हो गए हैं। बच्चे फिलहाल मामा के घर ख्वांकोट गांव में रह रहे हैं।
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पातली गांव निवासी खड़क राम का शव 29 जनवरी को जली हालत में मिला था। परिजनों के अनुसार, उन्होंने एक बैंक से 20 हजार रुपये का कर्ज लिया था, जो पांच साल में 40 हजार रुपये पहुंच गया। सूखे के कारण फसल भी बर्बाद हो गई थी। रोजगार का कोई अन्य साधन नहीं था। तीन बच्चों की पढ़ाई का खर्च किसान पिता को रोज सताने लगा था। इन सबसे तंग आकर उन्होंने आत्मदाह कर लिया।
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प्रधान जेठीगांव कमलेश खोलिया ने बताया कि जनवरी में बैंक से कर्ज का नोटिस आया था। रोजगार के साधन न होने से 40 हजार का कर्ज चुकाना उनके लिए मुश्किल हो गया था। अब बच्चों के लिए मुश्किल खड़ी हो गई हैं। उन्होंने कहा कि लोग अनाथ बच्चों की मदद के लिए एसबीआई कनालीछीना में तनुजा के बचत खाता संख्या 36021471902 आईएफएस कोड एसबीआईएन 0001638 में राशि जमाकर उनकी मदद कर सकते हैं।
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पत्नी की पांच साल पहले हो गई थी मौत
अस्कोट (पिथौरागढ़)। आत्मदाह करने वाले किसान की पत्नी की मौत पांच साल पहले हो गई थी। पिता की मौत के बाद बच्चे ख्वांकोट निवासी पंकज प्रसाद के घर में रह रहे हैं। बड़ी बेटी दस में पढ़ती है। एक लड़का सात और दूसरा चार में पढ़ता है। पिता की मौत के बाद मामा ने ही सहारा दिया, लेकिन वह भी खेतीबाड़ी कर जीवनयापन करते हैं। अपने बच्चों के साथ ही बहन के बच्चों का लालन-पालन करना उनके लिए भी मुश्किल हो रहा है। उनके पास भी रोजगार नहीं है।
किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं
अस्कोट (पिथौरागढ़)। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता प्रदीप पाल ने कहा कि किसानों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। किसान कर्ज के बोझ तले आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो रहे हैं। केंद्र और राज्य सरकार को गरीब किसानों के दर्द से कोई सरोकार नहीं है।
घनश्याम चाइल्ड सोसायटी ने चार अनाथ भाई-बहनों को गोद लिया
पिथौरागढ़। तेंदुए के हमले में मारी गई देवलथल के आगर गांव निवासी खीमा देवी के चारों बच्चों को घनश्याम ओली चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी ने गोद ले लिया है। संस्था ने एक बेटी के विवाह का खर्च स्वयं उठाने के साथ ही उनके स्वरोजगार के लिए एक लाख रुपये की राशि देने की बात कही।

एक सप्ताह पूर्व आगर गांव निवासी खीमा देवी को तेंदुए ने मार डाला था। खीमा का पति 12 साल से लापता है। मां की मौत के बाद दो बेटी और दो बेटे बेसहारा हो गए थे। बुधवार को घनश्याम ओली सोसायटी के अध्यक्ष अजय ओली ने बच्चों के घर जाकर बड़ी बेटी सपना टम्टा को 1500 रुपये का चेक सौंपा। उन्होंने कहा कि अब चारों बच्चों के रहने और भोजन की व्यवस्था के साथ शिक्षा का पूरा खर्च सोसायटी उठाएगी। बताया कि सपना, निकिता, रितेश, हितेश अब सोसायटी में रहेंगे। बड़ी बहन सपना को संस्था की लाइब्रेरी में नौकरी दी जाएगी। गिरीश चंद्र ने बताया कि उनकी सरकारी नौकरी के लिए संस्था प्रशासन और सरकार से पत्राचार करेगी। ग्राम प्रधान प्रतिनिधि दिनेश भट्ट आदि क्षेत्रवासियों ने सोसायटी की सराहना की है।
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