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‘इनरलाइन जौलजीबी लाओ’ के नारों से गूंजा धारचूला
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Tue, 04 Sep 2018 11:11 PM IST
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धारचूला में इनर लाइन को लेकर जुलूस निकालते सीमांत के लोग
- फोटो : अमर उजाला
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छियालेख से इनरलाइन जौलजीबी स्थानांतरित करने की मांग एक बार फिर मुखर हो गई है। लोगों ने स्थानीय डाकबंगले से तहसील कार्यालय तक जुलूस निकाला। केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को भेजे ज्ञापन में 18 सितंबर तक इस मामले में फैसला न होने पर क्रमिक अनशन, बाजार बंद, अंतरराष्ट्रीय झूलापुल बंद, आमरण अनशन जैसे आंदोलनात्मक कदम उठाए जाएंगे।
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धारचूला युवा संगठन के अध्यक्ष विरेंद्र सिंह नबियाल के अगुवाई में बड़ी संख्या में स्थानीय लोगों ने डाक बंगले से तहसील तक जुलूस निकाला। इनरलाइन जौलजीबी लाने के लिए नारेबाजी की। एसडीएम आरके पांडेय के माध्यम से गृहमंत्री को भेजे ज्ञापन में कहा कि चीन और नेपाल की सीमा पर बसा धारचूला काफी संवेदनशील क्षेत्र है, इस कारण भारत सरकार ने जौलजीबी से आगे के क्षेत्र को प्रतिबंधित क्षेत्र घोषित किया था। धारचूला आने वाले हर व्यक्ति को अपना वैधानिक परिचय पत्र दिखाना होता था।
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वर्ष 1998-99 में तत्कालीन कल्याण सिंह की सरकार ने इनरलाइन को 100 किमी दूर छियालेख स्थानांतरित कर दिया। यदि इतने दूर तक कोई बाहरी व्यक्ति पहुंच गया तो सुरक्षा के लिए बनाई गई इनरलाइन का कोई औचित्य नहीं रह जाता। ज्ञापन देने वालों में दीपक दरियाल, अशोक रूंगाल, सज्जाद हुसैन, शकुंतला दताल, विजय गर्ब्याल, क्षमा गर्ब्याल, करुणा गुंज्याल, दीना गर्ब्याल, मीरा रौंकली, सीमा रौंकली आदि थे।
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