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आबादी में घुसी दुर्लभ हो रही उड़न गिलहरी
ब्यूरो/अमर उजाला, धारचूला
Updated Tue, 29 Aug 2017 10:37 PM IST
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पेड़ पर जाकर पत्तियों के बीच छिपने का प्रयास करती उड़न गिलहरी
- फोटो : अमर उजाला
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उच्च हिमालयी क्षेत्र में मिलने वाली दुर्लभ उड़न गिलहरी (फ्लाइंग स्क्विरल) मंगलवार को नगर में घुस आई। यह आबादी तक कैसे पहुंची इसे लेकर वन विभाग के अधिकारी भी हैरान हैं। उड़न गिलहरी को स्थानीय लोग ओद नाम से जानते हैं। पिछले दशकों में ओद का बड़े पैमाने पर शिकार हुआ। इस कारण अब इसकी संख्या कम होती जा रही है। हालांकि वन विभाग के पास ओद की संख्या का कोई सही आंकड़ा नहीं है, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि अब यह भी दुर्लभ की श्रेणी में आ रही है।
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बताया गया कि मंगलवार सुबह कुछ लोगों ने ओद को प्राथमिक विद्यालय गर्ब्यालखेड़ा के परिसर में फुदकते देखा। जैसे ही लोगों की भीड़ इसे देखने के लिए जुटी तो यह करीब दस मीटर की छलांग लगाकर पास ही स्थित एक पेड़ पर चढ़ गई। लोगों का कहना है कि पहली बार ओद को आबादी में देखा गया। वैसे यह घाटी वाले क्षेत्रों में भी कभी-कभार दिख जाती है। ज्यादातर च्यूरा फल के पेड़ों के आसपास ओद की सक्रियता रहती है। काफी देर तक यह ओद पेड़ पर बैठी रही। बाद में लोगों की सूचना पर पहुंचे वन रेंजर एसके आर्य ने बताया कि आबादी वाले इलाके में ओद नहीं दिखती।
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उन्होंने बताया कि उच्च हिमालयी क्षेत्र के दर, बौंगलिंग, जुम्मा, रांथी, हिमखोला और नेपाल के हुती, बारमिली, थारा, हिकला इलाके में कुछ समय पहले तक ओद की संख्या बहुत थी। अब इन इलाकों पर भी ओद कम हो रही हैं। उन्होंने कहा कि ओद को संरक्षित किया जाना चाहिए। इसके शिकार पर कड़ी सजा का प्रावधान है।
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