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Pithoragarh News: पहले डॉक्टर को हटाया, फिर मशीन भेजी, अब पद ही खत्म कर दिया
Sun, 17 Sep 2023 10:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 17 Sep 2023 10:27 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) डीडीहाट अस्पताल में फिलहाल हड्डी रोग का इलाज मिलना मुश्किल लग रहा है। ऐसा इसलिए क्योंकि सरकार ने इस अस्पताल से हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद ही समाप्त कर दिया है। यह हाल तब है जब यहां एक साल पहले ही लाखों की मशीन भेजी गई थीं। मशीन कमरे में बंद हैं। इन्हें अब तक खोला तक नहीं गया है।
साल 2002 में डीडीहाट सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत हुआ था। पिछले साल जब हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई तो हड्डी जोड़ने की मशीन नहीं थी। आर्थोपेडिक सर्जन इंजेक्शन कक्ष में ही मरीजों का इलाज करते थे।
अप्रैल 2022 में उनका स्थानांतरण हो गया। इसके करीब सात महीने बाद स्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपये की मशीन अस्पताल भेजी। तब से यह मशीन जंक खा रही हैं। हड्डी का इलाज पूरी तरह बंद है। हड्डी के मरीजों को इलाज के लिए 60 किमी दूर पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
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यह भी जानें
यह अस्पताल एफआरसी यानी फर्स्ट रेफरल सेंटर बनाया गया था। यहां जिला अस्पताल जैसी सुविधाएं दी गई थी। डॉक्टर के भी कई पद सृजित किए गए थे। आसपास के पीएचसी और सीएचसी के मरीजों को यहां रेफर किया जाता था। इस साल जुलाई में सरकार ने इस अस्पताल को एफआरसी की श्रेणी से हटा दिया। यहां हड्डी रोग, स्त्री और प्रसूति रोग और निश्चेतक विशेषज्ञ के पद ही समाप्त कर दिए।
कोट
मरीजों को हो रही परेशानी से शासन को समस्या से अवगत करा दिया गया है। पद स्वीकृत हुआ तो हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती जरूर की जाएगी। - एचसी ह्यांकी, सीएमओ डॉक्टर।
लोगों का दर्द
हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मुश्किल हो रही हैं। सरकार ने पद समाप्त कर क्षेत्र के लोगों के साथ खिलवाड़ किया है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर नहीं है। - कैलाश खड़ायत।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मजाक रही है। जब हड्डी रोग विशेषज्ञ था तब मशीन नहीं थी। जब मशीन आई तो विशेषज्ञ नहीं है। अब उपचार के लिए पिथौरागढ़ जाना पड़ रहा है। - गुलाब बोरा।
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साल 2002 में डीडीहाट सीएचसी में हड्डी रोग विशेषज्ञ का पद स्वीकृत हुआ था। पिछले साल जब हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती हुई तो हड्डी जोड़ने की मशीन नहीं थी। आर्थोपेडिक सर्जन इंजेक्शन कक्ष में ही मरीजों का इलाज करते थे।
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अप्रैल 2022 में उनका स्थानांतरण हो गया। इसके करीब सात महीने बाद स्वास्थ्य विभाग ने लाखों रुपये की मशीन अस्पताल भेजी। तब से यह मशीन जंक खा रही हैं। हड्डी का इलाज पूरी तरह बंद है। हड्डी के मरीजों को इलाज के लिए 60 किमी दूर पिथौरागढ़ जिला मुख्यालय जाना पड़ रहा है।
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यह अस्पताल एफआरसी यानी फर्स्ट रेफरल सेंटर बनाया गया था। यहां जिला अस्पताल जैसी सुविधाएं दी गई थी। डॉक्टर के भी कई पद सृजित किए गए थे। आसपास के पीएचसी और सीएचसी के मरीजों को यहां रेफर किया जाता था। इस साल जुलाई में सरकार ने इस अस्पताल को एफआरसी की श्रेणी से हटा दिया। यहां हड्डी रोग, स्त्री और प्रसूति रोग और निश्चेतक विशेषज्ञ के पद ही समाप्त कर दिए।
कोट
मरीजों को हो रही परेशानी से शासन को समस्या से अवगत करा दिया गया है। पद स्वीकृत हुआ तो हड्डी रोग विशेषज्ञ की तैनाती जरूर की जाएगी। - एचसी ह्यांकी, सीएमओ डॉक्टर।
लोगों का दर्द
हड्डी रोग विशेषज्ञ नहीं होने से मुश्किल हो रही हैं। सरकार ने पद समाप्त कर क्षेत्र के लोगों के साथ खिलवाड़ किया है। सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर नहीं है। - कैलाश खड़ायत।
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं के साथ मजाक रही है। जब हड्डी रोग विशेषज्ञ था तब मशीन नहीं थी। जब मशीन आई तो विशेषज्ञ नहीं है। अब उपचार के लिए पिथौरागढ़ जाना पड़ रहा है। - गुलाब बोरा।