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बस्तड़ी आपदा की बरसी पर आंखें नम
ब्यूरो/अमर उजाला, डीडीहाट
Updated Sat, 01 Jul 2017 10:35 PM IST
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बस्तड़ी आपदा में मरे लोगों को याद करते स्थानीय ग्रामीण
- फोटो : अमर उजाला
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बस्तड़ी आपदा की पहली बरसी पर शनिवार को माहौल बेहद गमगीन रहा। गांव की सीमा पर बनाए गए स्मारक पर जब शनिवार सुबह लोग श्रद्धांजलि देने के लिए जुटे तो सभी की आंखें नम हो गई। महिलाएं तो इस आयोजन में शामिल होने का साहस तक नहीं जुटा पाई। बस्तड़ी की आपदा में 21 लोगों की मौत हुई थी। बाद में गांव के लोगों ने मृतकों की याद में एक स्मारक तैयार किया था।
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30 जून 2016 की रात बादल फटने के कारण बस्तड़ी में तबाही मची थी। मलबे में दबकर 21 लोगों की मौत हो गई। इनमें कई युवा भी थे। सबसे पहले स्मारक पर मृतकों की आत्मा की शांति के लिए दीये जलाए गए। बाद में पुष्प अर्पित कर दो मिनट का मौन रखा गया। इस दौरान जुटे लोगों ने कहा कि किसी के साथ भी ऐसा हादसा नहीं होना चाहिए। गांव के युवाओं, बुजुर्गों में अपनों को खोने का भारी गम है। कई परिवार इस हादसे ने उजाड़ दिए। जो लोग जीवित बचे हैं उनके सामने जीवनभर का संकट खड़ा हो गया है। एक चहल-पहल से भरे गांव में अब वीरानी के अलावा कुछ नजर नहीं आता। सभी परिवारों ने घटना के अगले दिन गांव छोड़ दिया था। सभी परिवार सिंघाली कस्बे में आकर रहने लगे हैं।
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श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मौजूद समाजसेवी शंकर दत्त भट्ट ने कहा कि कुछ महिलाएं इस कार्यक्रम को आने के लिए तैयार हो गई थी, लेकिन रोते हुए आधे रास्ते से लौट गईं। युवा क्लब के अध्यक्ष विनीत भट्ट ने कहा कि आपदा में कई युवाओं को भी जान गंवानी पड़ी थी। इस दौरान नंदाबल्लभ भट्ट, गोविंद भट्ट, कृष्णानंद भट्ट, मथुरादत्त भट्ट, भवानी दत्त भट्ट समेत अन्य युवा मौजूद थे। यह बात अलग है कि प्रशासन की तरफ से कोई भी कर्मचारी इस कार्यक्रम में शामिल नहीं हुआ।
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