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Pithoragarh News: बटन, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम उत्पादन बदलेगा किसानों की तकदीर, सब्सिडी पर मिलेगा कंपोस्ट

Fri, 27 Sep 2024 05:08 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़
अमर उजाला नेटवर्क, पिथौरागढ़ Published by: हीरा मेहरा Updated Fri, 27 Sep 2024 05:08 PM IST
सार

बटन, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम उत्पादन से सीमांत के किसानों की तकदीर बदलेगी। ज्योलीकोट से पहुंचे विशेषज्ञों ने कहा कि सीमांत जनपद मशरूम की तीनों प्रजातियों के उत्पादन के लिए बेहतर है।

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Experts arriving from Jeolikot told farmers the tricks of mushroom production in pithoragarh
ज्योलीकोट से पहुंचे विशेषज्ञों ने किसानों बताए मशरूम उत्पादन के गुर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

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बटन, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम उत्पादन से सीमांत के किसानों की तकदीर बदलेगी। ज्योलीकोट से पहुंचे विशेषज्ञों ने कहा कि सीमांत जनपद मशरूम की तीनों प्रजातियों के उत्पादन के लिए बेहतर है। उन्होंने किसानों को इनके उत्पादन की बारीकियां बताईं।

मुख्य उद्यान अधिकारी कार्यालय के सभागार में शुक्रवार को किसानों को मशरूम उत्पादन का तकनीकी प्रशिक्षण दिया गया। इंडो डच परियोजना के तहत ज्योलीकोट के मुख्य मशरूम विकास अधिकारी जेसी भट्ट ने किसानों को मशरूम उत्पादन के गुर बताए। उन्होंने कहा कि सीमांत जनपद बटन, ऑयस्टर और मिल्की मशरूम उत्पादन के लिए बेहतर है। इनका उत्पादन कर किसान आर्थिकी मजबूूत कर सकते हैं। बाजार में मशरूम की काफी मांग है।

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जिला योजना के तहत किसानों को मशरूम उत्पादन के लिए 50 फीसदी सब्सिडी पर कंपोस्ट उपलब्ध कराया जाएगा। कम लागत में किसान इन मशरूम का बेहतर उत्पादन कर सकते हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में उद्यान विभाग के पूर्व संयुक्त निदेशक हरीश तिवारी, मुख्य उद्यान अधिकारी जेसी कांडपाल, एमएस रौतेला, गगन पंत, हरीश कोहली सहित जिले के सभी विकासखंडों के 45 प्रतिभागी शामिल रहे। 

14 से 35 डिग्री तापमान पर होता है मशरूम का उत्पादन
मुख्य मशरूम विकास अधिकारी जेसी भट्ट ने बताया कि 14 से 35 डिग्री तापमान पर तीनों प्रजाति के मशरूम का उत्पादन होता है। बटन मशरूम के लिए 14 से 22, ऑयस्टर के लिए 20 से 30 जबकि मिल्की मशरूम के बेहतर उत्पादन के लिए 28 से 35 डिग्री तापमान की जरूरत होती है। सीमांत जनपद में तीनों प्रजाति के उत्पादन के लिए तापमान बेहतर है। 

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