फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Due to the severe cold the water of water sources in the high Himalayan regions turned into ice in pithoragarh

UK: मल्ला जोहार में जिंदगी जमा देने वाली ठंड, जलस्रोतों का पानी बना बर्फ; -05 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा तापमान

Tue, 18 Nov 2025 01:35 PM IST
हीरा मेहरा प्रमोद द्विवेदी
प्रमोद द्विवेदी Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 18 Nov 2025 01:35 PM IST
सार

उच्च हिमालयी क्षेत्र मल्ला जोहार में पड़ रही कड़ाके की ठंड के कारण नलों और जलस्रोतों का पानी जमकर बर्फ बन गया है। अधिकांश स्थानीय निवासी पहले ही क्षेत्र छोड़ चुके हैं। 

विज्ञापन
Due to the severe cold the water of water sources in the high Himalayan regions turned into ice in pithoragarh
मल्ला जोहार क्षेत्र में अत्यधिक ठंड से जमा पानी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

 

विज्ञापन

उच्च हिमालयी क्षेत्र में पड़ रही कड़ाके की ठंड के चलते मुनस्यारी के मल्ला जोहार क्षेत्र के वाइब्रेंट समेत 13 गांव इन दिनों वीरान हैं। इन गांवों में ठंड के सीजन में भालुओं का बसेरा हो चुका है जो घरों को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ वहां रखी खाद्य सामग्री चट कर जाते हैं।

मल्ला जोहार के वाइब्रेंट सहित 13 गांवों मिलम, बुर्फू, बिल्जू, मापा, गनघर, पांछु, मरतोली, खिलांच, टोला, सुमतु, रिलकोट, लास्पा और ल्वा के लोग अप्रैल में माइग्रेशन पर कीड़ाजड़ी दोहन, जड़ीबूटी, आलू आदि की खेती के लिए अपने भेड़-बकरी एवं पालतू जानवरों के साथ वहां पहुंचते हैं। अक्तूबर अंत में प्रवास पर गए लोग निचली घाटी में लौटते हैं। इससे उच्च हिमालयी क्षेत्र के गांव पूरी तरह वीरान हो जाते हैं। इस दौरान भालू घरों को नुकसान पहुंचा कर खाद्य सामग्री चट कर जाते हैं। लास्पा निवासी बीरबल सिंह लस्पाल ने बताया कि दो रोज पूर्व उनके घर को भालू ने तोड़कर खाद्य एवं अन्य सामग्री को नुकसान पहुंचाया। उनका कहना है कि प्रशासन एवं वन विभाग को इसका स्थायी समाधान निकालना होगा ताकि नुकसान होने से बचाया जा सके।

विज्ञापन

बहते जलस्रोतों का पानी बर्फ बना
कड़ाके की ठंड पड़ने से उच्च हिमालयी क्षेत्रों में नलों के साथ बहते जलस्रोतों का पानी बर्फ बनने लगा है। यहां रह रहे ज्यादातर लोग घर छोड़ चुके हैं। चीन सीमा के नजदीक होने के कारण यहां तैनात सेना के जवान बर्फ पिघलाकर पानी की जरूरत को पूरा कर रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

मल्ला जोहार क्षेत्र में इन दिनों न्यूनतम तापमान करीब माइनस पांच डिग्री तक जा रहा है। इससे पानी जमने लगा है। जल स्रोत बर्फ में तब्दील हो चुके हैं। चीन सीमा से सटे इलाके होने के कारण यहां लोगों के हटने के बाद आईटीबीपी और सेना तैनात रहती है। ऐसे में आईटीबीपी और सेना के जवानों को भी बर्फ पिघलाकर काम चलाना पड़ रहा है।

चीन सीमा से सटी दारमा और व्यास घाटियों में तापमान माइनस सात डिग्री पहुंच गया है। यहां के गांवों में सुबह शाम बर्फीली हवाएं चलने से तापमान में गिरावट आ गई है। हालात ये हैं कि जल स्रोतों का पानी बर्फ में तब्दील होने से क्षेत्र के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है। ग्रामीण बर्फ पिघलाकर पानी की व्यवस्था करने के लिए मजबूर हैं।

 

भालुओं के नुकसान की जानकारी प्रतिवर्ष प्रशासन, वन विभाग को दी जाती है लेकिन इसका कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाया। साथ ही मुआवजा भी नहीं दिया गया। - श्रीराम सिंह धर्मशक्तू, अध्यक्ष मल्ला जोहार विकास समिति

 

हर वर्ष भालू घरों को नुकसान पहुंचाते हैं। इसका स्थायी समाधान नहीं हो पा रहा है। सरकार से गांवों में समय-समय पर गश्त कराने की मांग की है ताकि नुकसान से बचा जा सके। - हरीश नित्वाल, प्रधान मिलम

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed