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देवलसमेत का उठा डोला

अमर उजाल/ब्यूरो/ पिथौरागढ़ Updated Sat, 04 Apr 2015 07:05 PM IST
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Dola picking Devlsmet

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 सोरघाटी के प्रसिद्ध लोकपर्व चैतोल मेले का समापन हो गया है। लुंठ्यूड़ा और चैंसर की छतरियों का मिलन हुआ। लुंठ्यूड़ा की छतरी के साथ परंपरागत रूप से देवलसमेत बाबा का डोला भी उठा। भारी बारिश भी बहनों को भिटौली देने से जुड़े इस पर्व को देखने से लोगों को नहीं रोक पाई। अन्य स्थानों में भी चैतोल पर्व पर मंदिरों से छतरियां निकाली गई। शुक्रवार को चैसर और लुंठ्यूड़ा से निकली देवलसमेत बाबा की छतरियों का मिलन शहर के घंटाकरण में घंटेश्वर महादेव के प्रांगण में हुआ। लुंठ्यूड़ा से निकले डोले में देवडांगर दान सिंह लुंठी विराजमान थे। लोगों ने डोले और छतरी पर पुष्पवर्षा की तो देवडांगरों से आशीर्वाद लिया। छतरियों के साथ सेरादेवल मंदिर के प्रधान पुजारी देवडांगर चंद्रशेखर भट्ट समेत तमाम लोग शामिल थे। शनिवार को दोपहर दो बजे बाद लगने वाले चंद्रग्रहण केकारण इस बार चैतोल कार्यक्रम में परिवर्तन किया गया था। इस बार करीब 11.30 बजे घंटाकरण में चैंसर और लुंठ्यूड़ा के डोलों का मिलन हुआ, ताकि चंद्रग्रहण से पहले डोलों का विसर्जन किया जा सके। अन्य सालों में घंटाकरण में दोनों डोलों का मिलन रात आठ बजे होता था। उधर, माजिरकांडा जाखपंत, सिरकुच गांवों की छतरिया खंडेनाथ मंदिर से निकलकर मनमहेश मंदिर होते हुए वापस खंडेनाथ मंदिर पहुंची। पुजारी तुलसी प्रसाद भट्ट, देवडांगर लक्ष्मण भट्ट, हरिकृष्ण भट्ट, टीका राम भट्ट आदि छतरी के साथ चल रहे थे।
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