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स्वांला हादसे के बाद भी नहीं चेता प्रशासन
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Thu, 08 Feb 2018 10:40 PM IST
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बारहमासी सड़क में गुरना से आगे सड़क किनारे रखे उपकरण
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत के स्वांला में हुए सड़क हादसे के बाद यह उम्मीद थी कि कम से कम इस हादसे से सबक लेते हुए मशीनरी सड़क पर यात्रियों के सफर को सुरक्षित बनाने की जिम्मेदारी निभा रही होगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। इस हादसे का पुलिस, प्रशासन, परिवहन महकमे, सड़क से जुड़ी एजेंसी को कोई फर्क नहीं पड़ा था। बारहमासी सड़क पर बेतरतीब और जोखिम भरा काम जारी था। सड़क पर रोज की तरह सवारियों से खचाखच भरे वाहन दौड़ रहे थे। कोई रोकने-टोकने वाला नजर नहीं आया।
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अमर उजाला ने गुरुवार की दोपहर एक बजे से साढ़े तीन बजे तक पिथौरागढ़-घाट के बीच सड़क यातायात और सुरक्षा बंदोबस्तों की पड़ताल की। ऐंचोली पुलिस चौकी से पिथौरागढ़ की सीमा शुरू हो जाती है। डेढ़ बजे ऐंचोली पुलिस चौकी पहुंचे। चौकी के बाहर चार सिपाही कुर्सी पर बैठे थे। उनकी आंखों के सामने ही कई ओवरलोड सवारी वाहन गुजर गए। कुछ आगे धमौड़ा में एआरटीओ का वाहन नजर आया। एक ट्रक को रोककर कागजात जांचे जा रहे थे। पूछने पर बताया कि नियमित चेकिंग चल रही है। कुछेक वाहनों के चालान किए हैं। इधर, एआरटीओ की चेकिंग चल रही थी, इससे आधा किमी दूर कुुछ वाहन खड़े थे। संभवतया पकड़े जाने की डर से पहले ही रुक गए थे। धमौड़ा में बारहमासी सड़क निर्माण का काम बंद था। एक मोड़ पर जेसीबी लावारिस खड़ी थी। धमौड़ा से गुरना के बीच यात्रियों से खचाखच भरे चार छोटे वाहन नजर आए। इस बीच सड़क की कटिंग का काम चल रहा था। सड़क पर मलबा पसरा था। बस एक वाहन के निकलने की ही जगह थी।
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मटेला से गुरना के बीच आठ से दस छोटे सवारी वाहन पिथौरागढ़ की ओर जाते नजर आए। ये वाहन टनकपुर, चंपावत, लोहाघाट से पिथौरागढ़ जा रहे थे। सभी वाहनों की सारी सीटें फुल थीं। एक रोडवेज और तीन केमू की बसें भी गुजरी, लेकिन इन बसों में इक्का-दुक्का यात्री ही नजर आए। इस बीच सड़क कटिंग का काम बंद था। सड़क किनारे ही काटी गई पहाड़ी से निकला मलबा पसरा हुआ था। पास ही सड़क किनारे कार्यदायी संस्था के कुछ उपकरण पड़े थे। मलबा और उपकरणों से पहले ही सड़क संकरी हो गई थी। पास ही कुछ ट्रक भी खड़े थे। मटेला से घाट तक सड़क निर्माण का काम बंद मिला। जगह-जगह बेतरतीबी से पहाड़ी काटी गई थी और मलबा सड़क किनारे पड़ा था। कुछ जगहों पर सड़क नजर ही नहीं आ रही थी। मलबे ने सड़क को ढंक लिया था। सड़क किनारे बारहमासी सड़क के काम में लगी पोकलैंड और जेसीबी खड़ी थी। पिथौरागढ़ वापसी के दौरान मटेला, गुरना, धमौड़ा तक सड़क पर वही दृश्य नजर आए।
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सड़क पर पसरा मलबा, इसके ऊपर से गुजरते वाहन। वापस लौटने पर एआरटीओ का वाहन नहीं मिला। संभवतया वे लौट चुके थे। लगभग सवा तीन बजे ऐंचोली चौकी पहुंचे तो एक ही सिपाही नजर आया। पांच मिनट चौकी पर खड़े होकर निगरानी को परखने की कोशिश की। इस बीच सिपाही के देखते ही देखते यात्रियों से खचाखच भरे दो छोटे वाहन पिथौरागढ़ की ओर निकल गए। दोनों वाहन टनकपुर से आ रहे थे। इसी बीच तीन और छोटे वाहन शहर की सीमा से बाहर घाट की ओर गए। इनमें भी निर्धारित क्षमता से अधिक सवारियां थी। एक बजे से साढ़े तीन बजे तक इस सफर में सड़क पर कहीं सजग और सतर्क मशीनरी नजर नहीं आई। वापस पिथौरागढ़ लौटे तो खुद को धूल से सना पाया।