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Pithoragarh News: पांच लाख की आबादी एकमात्र सर्जन के भरोसे
Sat, 25 Feb 2023 10:52 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sat, 25 Feb 2023 10:52 PM IST
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पिथौरागढ़। जिले की पांच लाख की आबादी एक सर्जन के भरोसे है। उनके अवकाश पर जाने से मरीजों की जांच से लेकर ऑपरेशन तक नहीं हो पाते हैं। मरीजों को निजी अस्पताल या फिर हल्द्वानी जाना पड़ता है।
जिला अस्पताल में तीन वर्ष पहले तक दो सर्जन डॉ.एलएस बोरा और डॉ.एचसी पंत तैनात थे। डॉ.पंत के सीएमओ बनने से लगभग दो वर्षों से भी अधिक समय से डॉ.एलएस बोरा अकेले मरीजों की जांच से लेकर शल्य चिकित्सा कर रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 600 से 800 मरीज आते हैं। इनमें से लगभग 200 मरीज सर्जन के पास जांच के लिए जाते हैं। सर्जन के अवकाश पर होने से उन्हें निराशन लौटना पड़ता है।
यही स्थिति ईएनटी विभाग की भी है। नाक, कान, गले की जांच का जिम्मा केवल डॉ.कविता लोहनी के पास है। एकमात्र ईएनटी सर्जन को जिले में लगने वाले सरकारी शिविरों में सेवाएं देनी होती हैं। इस कारण जांच के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार भी करना पड़ता है। एक-एक ही सर्जन होने से पेट, गले, नाक, मुंह से संबंधित ऑपरेशन रुक जाते हैं। लोगों को समय पर इलाज भी नहीं मिल पता है। गरीब और जरूरतमंद लोगों के पास वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं होती है। आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने जिला अस्पताल आने वाले परिवारों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से दो सर्जन तैनात करने की मांग की है। इस संबंध में जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ.एचएस नबियाल का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग को लेकर पत्राचार किया जा रहा है।
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सरकार को सीमांत जिले में एक अतिरिक्त सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती करनी चाहिए। एकमात्र सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ के जिम्मे इतने लोगों का इलाज संभव नहीं है। अस्पताल में दो-दो सर्जन और ईनएटी विशेषज्ञ की जरूरत है। -चंद्रशेखर पुनेड़ा, यूकेडी जिलाध्यक्ष।
ईएनटी विशेषज्ञ की कई बार सरकारी शिविरों में ड्यूटी के कारण मरीजों को दिक्कतें होती है। कई बार ऐसा हुआ है जहां शिविर लगा होता है वहां के लोग भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। दो-दो सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ होंगे तो मरीजों का दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। -तपन रावत, व्यापार संघ अध्यक्ष।
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जिला अस्पताल में तीन वर्ष पहले तक दो सर्जन डॉ.एलएस बोरा और डॉ.एचसी पंत तैनात थे। डॉ.पंत के सीएमओ बनने से लगभग दो वर्षों से भी अधिक समय से डॉ.एलएस बोरा अकेले मरीजों की जांच से लेकर शल्य चिकित्सा कर रहे हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन 600 से 800 मरीज आते हैं। इनमें से लगभग 200 मरीज सर्जन के पास जांच के लिए जाते हैं। सर्जन के अवकाश पर होने से उन्हें निराशन लौटना पड़ता है।
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यही स्थिति ईएनटी विभाग की भी है। नाक, कान, गले की जांच का जिम्मा केवल डॉ.कविता लोहनी के पास है। एकमात्र ईएनटी सर्जन को जिले में लगने वाले सरकारी शिविरों में सेवाएं देनी होती हैं। इस कारण जांच के लिए अस्पताल आने वाले मरीजों को लंबा इंतजार भी करना पड़ता है। एक-एक ही सर्जन होने से पेट, गले, नाक, मुंह से संबंधित ऑपरेशन रुक जाते हैं। लोगों को समय पर इलाज भी नहीं मिल पता है। गरीब और जरूरतमंद लोगों के पास वैकल्पिक व्यवस्था भी नहीं होती है। आयुष्मान कार्ड से इलाज कराने जिला अस्पताल आने वाले परिवारों को सबसे अधिक दिक्कत होती है। लोगों ने स्वास्थ्य विभाग से दो सर्जन तैनात करने की मांग की है। इस संबंध में जिला अस्पताल के पीएमएस डॉ.एचएस नबियाल का कहना है कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की नियुक्ति की मांग को लेकर पत्राचार किया जा रहा है।
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सरकार को सीमांत जिले में एक अतिरिक्त सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ की तैनाती करनी चाहिए। एकमात्र सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ के जिम्मे इतने लोगों का इलाज संभव नहीं है। अस्पताल में दो-दो सर्जन और ईनएटी विशेषज्ञ की जरूरत है। -चंद्रशेखर पुनेड़ा, यूकेडी जिलाध्यक्ष।
ईएनटी विशेषज्ञ की कई बार सरकारी शिविरों में ड्यूटी के कारण मरीजों को दिक्कतें होती है। कई बार ऐसा हुआ है जहां शिविर लगा होता है वहां के लोग भी इलाज के लिए अस्पताल पहुंच जाते हैं। दो-दो सर्जन और ईएनटी विशेषज्ञ होंगे तो मरीजों का दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा। -तपन रावत, व्यापार संघ अध्यक्ष।