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Pithoragarh News: पिथौरागढ़ में एंडोमेट्रियोसिस अमलिकस का सफल ऑपरेशन
Sun, 02 Apr 2023 11:32 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Sun, 02 Apr 2023 11:32 PM IST
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पिथौरागढ़। जिला चिकित्सालय में पहली बार एंडोमेट्रियोसिस अमलिकस का सफल ऑपरेशन किया गया है। इस तरह की बीमारी लाखों मरीजों में से एक में ही होना बताया जा रहा है। ऑपरेशन के बाद महिला की हालत अब ठीक है।
जिला अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ. लाल सिंह बोरा ने बताया कि जिले के एक गांव की 48 वर्षीय महिला एंडोमेट्रियोसिस अमलिकस बीमारी से पीड़ित थी। इस बीमारी में गर्भाशय के भीतर के ऊतक फैलकर नाभि से बाहर आ जाते हैं जिससे मासिक धर्म के दौरान महिलाओं की नाभि से रक्तस्राव होता है। साथ ही उन्हें असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
यह बीमारी फेफड़ों में भी हो सकती है। इसमें मासिक धर्म के दौरान बलगम से खून आता है। पीड़ित महिला लंबे समय से गर्भनिरोधक दवाओं का उपयोग कर रही थीं। वर्ष 2019 में तबीयत खराब होने पर परिजन महिला को दिखाने अस्पताल पहुंचे। तब महिला को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया गया था। लॉकडाउन के चलते महिला का ऑपरेशन नहीं हो पाया। पीड़ित महिला कुछ दिन पूर्व अस्पताल आई। उसे यहां भर्ती किया गया।
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सर्जन डॉ. बोरा ने अपने सहयोगी निश्चेतक डॉ. हरिशंकर कौशिक, नर्स शबाना, दीपिका भट्ट, विनोद जोशी और महेश कुमार की मदद से एक घंटे का सफल ऑपरेशन कर महिला को इस बीमारी से निजात दिलाई। डॉ. बोरा ने बताया कि गर्भाशय के ऊतक अन्य भागों में एकत्रित हो गए थे। नाभि में होने के कारण मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉ. बोरा इससे पहले भी कई जटिल ऑपरेशन कर चुके हैं। चार वर्ष पहले उन्होंने एक महिला के पेट से 23 किलो का ट्यूमर निकाला था।
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जिला अस्पताल के मुख्य सर्जन डॉ. लाल सिंह बोरा ने बताया कि जिले के एक गांव की 48 वर्षीय महिला एंडोमेट्रियोसिस अमलिकस बीमारी से पीड़ित थी। इस बीमारी में गर्भाशय के भीतर के ऊतक फैलकर नाभि से बाहर आ जाते हैं जिससे मासिक धर्म के दौरान महिलाओं की नाभि से रक्तस्राव होता है। साथ ही उन्हें असहनीय पीड़ा का सामना करना पड़ता है।
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यह बीमारी फेफड़ों में भी हो सकती है। इसमें मासिक धर्म के दौरान बलगम से खून आता है। पीड़ित महिला लंबे समय से गर्भनिरोधक दवाओं का उपयोग कर रही थीं। वर्ष 2019 में तबीयत खराब होने पर परिजन महिला को दिखाने अस्पताल पहुंचे। तब महिला को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी रेफर किया गया था। लॉकडाउन के चलते महिला का ऑपरेशन नहीं हो पाया। पीड़ित महिला कुछ दिन पूर्व अस्पताल आई। उसे यहां भर्ती किया गया।
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सर्जन डॉ. बोरा ने अपने सहयोगी निश्चेतक डॉ. हरिशंकर कौशिक, नर्स शबाना, दीपिका भट्ट, विनोद जोशी और महेश कुमार की मदद से एक घंटे का सफल ऑपरेशन कर महिला को इस बीमारी से निजात दिलाई। डॉ. बोरा ने बताया कि गर्भाशय के ऊतक अन्य भागों में एकत्रित हो गए थे। नाभि में होने के कारण मरीज को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है। डॉ. बोरा इससे पहले भी कई जटिल ऑपरेशन कर चुके हैं। चार वर्ष पहले उन्होंने एक महिला के पेट से 23 किलो का ट्यूमर निकाला था।