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Pithoragarh News: सीराकोट मंदिर, बैकुंठ धाम को पर्यटन मानचित्र में रखने की मांग
Thu, 30 May 2024 11:03 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 30 May 2024 11:03 PM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। तहसील मुख्यालय से लगे पौराणिक और ऐतिहासिक सीराकोट मंदिर और बैकुंठ धाम को उत्तराखंड के पर्यटन मानचित्र में लाए जाने की मांग उठने लगी है। सीराकोट मंदिर कमेटी ने प्रदेश के पर्यटन मंत्री को ज्ञापन भेजकर ठोस पहल करने की मांग की है।
सीराकोट मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रवि डसीला ने पर्यटन मंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा है कि सीराकोट मंदिर और बैकुंठ धाम क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन दोनों स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा है कि डीडीहाट से चार किमी की दूरी पर सीराकोट की पहाड़ी पर स्थित मंदिर का इतिहास काफी पुराना है।
इसके अलावा इस पहाड़ी पर आज भी 16वीं सदी में बने किले के अवशेष देखने को मिलते हैं। राजस्व अभिलेखों में आज भी सीरा पट्टी के नाम से कई दस्तावेज देखने को मिलते हैं। वहीं इसी पहाड़ी के एक छोर पर बैकुंठ धाम भी स्थित है जिसे नारायण स्वामी के शिष्य भास्कर स्वामी ने स्थापित किया था। इसमें योग और अध्यात्म की कक्षाओं का संचालन किया जाता है। प्रतिवर्ष इन स्थानों पर हजारों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन दोनों स्थानों को पर्यटन मानचित्र में स्थान दिए जाने की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए। संवाद
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सीराकोट मंदिर कमेटी के अध्यक्ष रवि डसीला ने पर्यटन मंत्री को भेजे गए ज्ञापन में कहा है कि सीराकोट मंदिर और बैकुंठ धाम क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक स्थल हैं। पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए इन दोनों स्थलों को पर्यटन मानचित्र पर स्थान दिया जाना जरूरी है। उन्होंने कहा है कि डीडीहाट से चार किमी की दूरी पर सीराकोट की पहाड़ी पर स्थित मंदिर का इतिहास काफी पुराना है।
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इसके अलावा इस पहाड़ी पर आज भी 16वीं सदी में बने किले के अवशेष देखने को मिलते हैं। राजस्व अभिलेखों में आज भी सीरा पट्टी के नाम से कई दस्तावेज देखने को मिलते हैं। वहीं इसी पहाड़ी के एक छोर पर बैकुंठ धाम भी स्थित है जिसे नारायण स्वामी के शिष्य भास्कर स्वामी ने स्थापित किया था। इसमें योग और अध्यात्म की कक्षाओं का संचालन किया जाता है। प्रतिवर्ष इन स्थानों पर हजारों की संख्या में पर्यटक और श्रद्धालु पहुंचते हैं। ऐसे में इन दोनों स्थानों को पर्यटन मानचित्र में स्थान दिए जाने की दिशा में ठोस पहल की जानी चाहिए। संवाद
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