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डेंजर जोन से भरी है लाइफ-लाइन

Sat, 02 Apr 2016 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 02 Apr 2016 10:30 PM IST
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Danger zone is filled with life-line
टनकपुर-पिथौरागढ़ रोड - फोटो : अमर उजाला

टनकपुर से पिथौरागढ़ तक आने वाली सड़क को इस जिले की लाइफ-लाइन कहा जाता है। यह सड़क 1951 में बनकर तैयार हो गई थी, लेकिन इन 65 वर्षों में सड़क के डेंजर जोनों को समाप्त करने की पहल नहीं हो पाई है। घाट से गुरना तक करीब 20 किलोमीटर के दायरे में आज भी कई खतरनाक मोड़ हैं, यदि इस सड़क के इतिहास पर नजर डाली जाए तो पता चलेगा कि इन खतरनाक मोड़ों पर कई हादसे हुए और कई घरों के चिराग असमय बुझ गए।

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गुरना से घाट तक की यह सड़क इसलिए भी अहम है, क्योंकि इसी रोड से हल्द्वानी, अल्मोड़ा, गंगोलीहाट के लिए वाहन चलते हैं। टनकपुर से पिथौरागढ़ तक इस सड़क का निर्माण कार्य देश की आजादी के बाद शुरू हुआ था। सड़क का निर्माण लोनिवि ने किया, लेकिन 1962 में चीन के साथ युद्ध होने के बाद सड़क की महत्ता अधिक बढ़ गई और सड़क की देखरेख का काम सीमा सड़क संगठन को सौंपा गया। तब से लेकर एक अप्रैल 2015 तक यह सड़क सीमा सड़क संगठन के पास थी। एक अप्रैल 2015 से सड़क की देखरेख की जिम्मेदारी एनएच को सौंपी गई है। यह बात अलग है कि हाल के वर्षों में सड़क के सुधारीकरण की दिशा में काफी काम हुआ है, लेकिन अब भी डेंजर जोन पूरी तरह समाप्त नहीं हुए हैं। 
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सड़क पर यह हैं खतरनाक मोड़
घाट से गुरना तक की सड़क को जिला प्रशासन ने भी पहले डेंजर जोन घोषित किया था। अब घाट से कंतगांव तक रोड काफी सुधरी है, लेकिन कंतगांव से गुरना तक पांच मोड़ इतने खतरनाक हैं कि उनमें अक्सर दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। गुरना से कंतगांव तक जाने वाले ढलान में अक्सर दुर्घटनाएं होती हैं। घाट से थोड़ा ऊपर मीना बाजार में भी कई बार दुर्घटनाएं हुई थी, लेकिन अब सड़क चौड़ी होने से खतरे कम हुए हैं। गुरना से घाट तक की सड़क को खतरनाक मानते हुए दस वर्ष पहले सेना अस्पताल ने गुरना में अपना मेडिकल हेल्प सेंटर भी खोला था। बाद में यह बंद हो गया।
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इसी रोड पर गुरना माता का मंदिर स्थित
इसी रोड के किनारे गुरना माता का मंदिर स्थित है। हर वाहन, यात्री अवश्य मंदिर में रुकते हैं। कहते हैं कि गुरना माता का मंदिर पहले काफी नीचे था। जब रोड की कटिंग शुरू हुई तो कई प्रकार की बाधाएं आने लगी। बाद में मंदिर को मुख्य सड़क के किनारे स्थापित किया गया। यह मंदिर हर यात्री के लिए अटूट आस्था का केंद्र है। मंदिर में खास मौकों पर विशेष पूजा और भंडारे होते रहते हैं। लोगों को विश्वास है कि देवी की कृपा से दुर्घटनाएं कम होती हैं। 


सड़क निर्माण में ईमानदारी नहीं बरती
गुरना निवासी और राज्य आंदोलनकारी राजेंद्र भट्ट का कहना है कि डेंजर जोनों को समाप्त करने के लिए अभी काफी काम की जरूरत है। वह कहते हैं कि यदि सड़क निर्माण, मरम्मत के समय ईमानदारी बरती होती तो शायद यह सड़क प्रदेश की सबसे अच्छी और सुरक्षित सड़क होती। वह कहते हैं कि किस एजेंसी ने इस सड़क की मरम्मत में कितना धन खर्च किया, इसका कहीं पर रिकार्ड नहीं है। पहले इन मामलों की जांच होनी चाहिए। जिले की जनता के साथ खिलवाड़ न किया जाए।

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