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डेयरी भवन खंडहर में तब्दील होने लगा
महेंद्र जंगपांगी/अमर उजाला, थल
Updated Sat, 25 Feb 2017 10:03 PM IST
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बलतिर गांव में खंडहर में तब्दील होता डेयरी भवन
- फोटो : अमर उजाला
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बलतिर गांव में 1995 में 35 लाख रुपए की लागत से बनाया गया डेयरी भवन अब खंडहर में तब्दील होने लगा है। इस भवन का अब तक कोई उपयोग नहीं हुआ है। गांव के लोग बताते हैं कि जब यह भवन बना था, तब इसमें दूध को सुरक्षित रखने के लिए चिलिंग प्लांट एवं अन्य उपकरण भी लगाए गए। बाद में सारे उपकरण चंपावत भेज दिए गए। भवन की देखरेख के लिए कोई भी कर्मचारी तैनात नहीं है।
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आज स्थिति यह है कि भवन की दीवारों पर लगाया गया सीमेंट गिरने लगा है। चहारदीवारी के पत्थर गायब हो गए हैं। दरवाजों पर लगी लकड़ी सड़ गई है। किसी भी समय यह भवन ध्वस्त हो सकता है। बताया गया कि 1995 में तत्कालीन जिलाधिकारी अमरेंद्र सिन्हा के आदेश पर इस भवन का निर्माण हुआ था। भवन के निर्माण से पहले गांव के लोगों से कोई राय नहीं ली गई और न उनको इसे बनाने का मकसद ही बताया गया। कुछ समय तक लोग इसी इंतजार में रहे कि शायद यहां पर डेयरी खुल जाएगी, लेकिन भवन को बाद में लावारिस हालत में छोड़ दिया जाएगा।
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दुग्ध संघ के अधिकारी यह बताने की स्थिति में नहीं हैं कि तब इस भवन का निर्माण क्यों हुआ और किन कारणों से इसका उपयोग नहीं किया गया। दुग्ध संघ के अध्यक्ष विनोद कार्की ने कहा कि वह वस्तुस्थिति का पता लगाएंगे। तभी अगला कदम उठाया जाएगा।
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किसी भी अधिकारी ने ध्यान नहीं दिया
बलतिर निवासी पूरन सिंह भैंसोड़ा ने इस भवन की दुर्दशा के बारे में डीएम से लेकर सीएम तक पत्र लिख दिए, लेकिन किसी ने भी कोई जवाब नहीं दिया। वह कहते हैं कि यह सरकारी धन का दुरुपयोग है। इस भवन का क्यों उपयोग नहीं किया गया, इसकी जांच होनी चाहिए।
सरकारी धन खपाने को खड़ा किया ढांचा
बलतिर के प्रधान महिराज भैंसोड़ा का कहना है कि गांव के लोगों को इस भवन के बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई। यदि डेयरी खोलने का ही मकसद था तो दूध का संग्रह कहां से किया जाता, इसकी कोई रूपरेखा नहीं बनाई गई। वह कहते हैं कि सरकारी धन को खपाने के लिए यह ढांचा खड़ा किया गया।