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बलुवाकोट में सरकारी धन की खुली लूट
कालिका रावल/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Fri, 16 Mar 2018 10:44 PM IST
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बलुवाकोट में गूल की जांच करती टीम, इसी पुरानी गूल को दिखा दिया था निकास नाली
- फोटो : अमर उजाला
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धारचूला विकासखंड की बलुवाकोट ग्राम पंचायत में मनरेगा, बीएडीपी, विधायक निधि, 13वें-14वें वित्त के कार्यों में धांधली की पुष्टि हुई है। डीएम के निर्देश पर हुई जांच में भ्रष्टाचार की परतें खुली हैं। धारचूला के एसडीएम आरके पांडे ने जांच रिपोर्ट डीएम को सौंप दी है। रिपोर्ट के बाद पंचायत प्रतिनिधियों के साथ ही कई सरकारी मुलाजिमों का नपना तय माना जा रहा है।
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बलुवाकोट ग्राम पंचायत में विकास कार्यों में घपलेबाजी का मामला लंबे समय से उठ रहा था। बलुवाकोट के युवाओं की संस्था परिवर्तन संगठन ने सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत साक्ष्य जुटाकर फरवरी के पहले सप्ताह में डीएम को सौंपे थे। डीएम सी रविशंकर ने धारचूला के एसडीएम को जांच टीम गठित कर विकास कार्यों की जांच कराने के निर्देश दिए थे। एसडीएम पांडे ने धारचूला के तहसीलदार डॉ. ललित मोहन तिवारी की अध्यक्षता में जांच कमेटी गठित की थी। 25 फरवरी 2018 को तहसीलदार के नेतृत्व में जांच कमेटी ने बलुवाकोट पहुंचकर विकास कार्यों की तहकीकात की।
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जांच दल ने पाया कि बलुवाकोट मुख्य बाजार में बीएडीपी मद से वर्ष 2013-14 में आठ लाख रुपये की लागत से बने तटबंधों में कंकरीट की जगह पत्थरों का प्रयोग किया गया है। वर्ष 2011-12 में ग्राम पंचायत को बीएडीपी मद से सरस बाजार में दन कालीन कार्यशाला निर्माण, उपकरण और चार सौर ऊर्जा लगाने के लिए 6 लाख रुपये की रकम मिली। जांच के दौरान कार्यशाला में मात्र एक बैटरी और एक सौर ऊर्जा का उपकरण पाया गया। बलुवाकोट के तल्लागांव में वर्ष 2015-16 में मनरेगा मद से दो लाख रुपये चेकडैम बनाने में खर्च दिखाए गए हैं, लेकिन चेकडैम धरातल पर नहीं मिले। वर्ष 2016-17 में बलुवाकोट के सेली तोक में विधायक निधि से एक लाख रुपये संपर्क मार्ग के निर्माण के लिए मिले थे, जांच में रास्ते का कहीं नामोनिशान नहीं मिला। ग्राम पंचायत के पोखरी में सामूहिक शौचालय के लिए वर्ष 2015-16 में 14वें वित्त मद से एक लाख रुपये मिले, लेकिन शौचालय नहीं बनाया गया।
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वर्ष 2014-15 में मनरेगा मद से नगतड़ और रौंकोट में 5 लाख की लागत से टैंक बनने थे, लेकिन टैंक योजनानुसार नहीं बने हैं। वर्ष 2015-16 में तातापानी, नगतड़ में 14वें वित्त मद से एक लाख की लागत से दो जलधारे बनाने थे, लेकिन एक ही बना है। रौंकोट में वर्ष 2014-15 में 14वें वित्त से मिली एक लाख रुपये की धनराशि से नाली बनाई जानी थी, लेकिन पूर्व में बनी गूल को निकास नाली दिखाई गई है। इसी प्रकार 13वें वित्त मद से बोरागांव में हरी सिंह के घर के पास 75000 की लागत से चेकडैम बनाना दर्शाया है, जो धरातल पर नहीं मिला। 25 फरवरी को बलुवाकोट में जांच करने वाली टीम में तहसीलदार डॉ. ललित मोहन तिवारी, खंड विकास अधिकारी एलडी जोशी, पीएमजीएसवाई के सहायक अभियंता किशन सिंह ऐरी शामिल थे।
काम नेपाली मजदूरों से कराया और मजदूर गांव वालों को दिखाया
बलुवाकोट ग्राम पंचायत में 13वें वित्त आयोग से मिली धनराशि से बने चेकडैम निर्माण का कार्य नेपाली मजदूरों द्वारा कराया गया, लेकिन मजदूर स्थानीय लोगों को दिखाया गया है। गांव की विमला देवी, पुष्पा देवी, हरी सिंह, देशराज सिंह, रमेश सिंह आदि ने योजना में काम नहीं करने की जानकारी जांच दल को दी। बताया कि उन लोगों को फर्जी तरीके से मजदूर दिखाया गया है। जांच दल ने इन लोगों से लिखित में शिकायत ली है।
जांच रिपोर्ट का अध्ययन किया जा रहा है। रिपोर्ट में जो भी तथ्य सामने आए हैं, उसके आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी। -सी रविशंकर, जिलाधिकारी पिथौरागढ़