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नदियों में संरक्षित महाशीर का बेरोकटोक शिकार
Updated Sun, 20 May 2018 11:16 PM IST
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नाचनी (पिथौरागढ़)। तल्ला जोहार क्षेत्र में प्रवाहित रामगंगा एवं जाकुला नदियों में वन विभाग की नाक के नीचे संरक्षित प्रजाति की महाशीर और रोहू का बेरोकटोक अवैध शिकार चल रहा है। शिकारी विस्फोटक के जरिये मछलियों का बड़े पैमाने पर शिकार कर रहे हैं। इससे वन्य संपदा को नुकसान तो पहुंच ही रहा है। वहीं, विस्फोट से नदियों पर बने पुल और सड़क को भी खतरा बना है, लेकिन विभाग के साथ ही जिम्मेदार मशीनरी हाथ पर हाथ धरे बैठी है।
न्याय पंचायत तेजम और नाचनी में लंबे अर्से से इन नदियों से मछलियों का अवैध शिकार चल रहा है। शिकारी विस्फोटकों के जरिये शिकार कर रहे हैं। इससे संरक्षित प्रजाति की महाशीर के साथ ही रोहू मछलियों की जान पर बन आई है। रोजाना कई क्विंटल के हिसाब से मछलियों को मारा जा रहा है। मछलियों के शिकार के बाद इन्हें बाजार में बेचा जा रहा है। अवैध शिकार का यह खेल नदी और वन्य संपदा की रक्षा के जिम्मेदार वन विभाग की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन अब तक विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
अवैध शिकार में विस्फोटक के इस्तेमाल से नदी पर बने पुलों और सड़क को भी नुकसान पहुंच रहा है। तेजम के पूर्व प्रधान हरीश चंद्र सिंह रावत का कहना है कि क्षेत्र पहले से ही भूकंप और प्राकृतिक आपदा के लिहाज से अतिसंवेदनशील है और सबसे खतरनाक जोन पांच में शामिल है।
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इस मामले में वन बीट अधिकारी रमेश लौधियाल का कहना है कि विभाग में कर्मियों की कमी है। फायर सीजन में व्यस्तता के चलते नदी में अवैध शिकार की पूरी निगरानी संभव नहीं है। हालांकि समय-समय पर विभाग नदियों में शिकार को लेकर चेतावनी जारी करता आ रहा है। दूसरी ओर थाना प्रभारी सुनील बिष्ट का कहना है कि अवैध शिकार की शिकायत पर नदियों में छापामारी की रणनीति बनाई जा रही है।
कार्यदायी संस्थाओं के जरिये मिल रहा विस्फोटक
नदियों में मछलियों का अवैध शिकार करने वालों को सरकारी कार्यदायी संस्थाओं के जरिये विस्फोटक की आपूर्ति हो रही है। इन एजेंसियों से जुड़े कुछ ठेकेदार महज सौ रुपये में जिलेटिन की छड़ बेच रहे हैं। जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर और टाइम फ्यूज लगाकर नदियों की सतह पर विस्फोटक किया जा रहा है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। ग्रामीण कई बार विभाग और पुलिस से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विस्फोटकों की आपूर्ति बेधड़क जारी है।
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न्याय पंचायत तेजम और नाचनी में लंबे अर्से से इन नदियों से मछलियों का अवैध शिकार चल रहा है। शिकारी विस्फोटकों के जरिये शिकार कर रहे हैं। इससे संरक्षित प्रजाति की महाशीर के साथ ही रोहू मछलियों की जान पर बन आई है। रोजाना कई क्विंटल के हिसाब से मछलियों को मारा जा रहा है। मछलियों के शिकार के बाद इन्हें बाजार में बेचा जा रहा है। अवैध शिकार का यह खेल नदी और वन्य संपदा की रक्षा के जिम्मेदार वन विभाग की नाक के नीचे हो रहा है, लेकिन अब तक विभागीय स्तर पर कोई कार्रवाई शुरू नहीं की गई है।
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अवैध शिकार में विस्फोटक के इस्तेमाल से नदी पर बने पुलों और सड़क को भी नुकसान पहुंच रहा है। तेजम के पूर्व प्रधान हरीश चंद्र सिंह रावत का कहना है कि क्षेत्र पहले से ही भूकंप और प्राकृतिक आपदा के लिहाज से अतिसंवेदनशील है और सबसे खतरनाक जोन पांच में शामिल है।
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इस मामले में वन बीट अधिकारी रमेश लौधियाल का कहना है कि विभाग में कर्मियों की कमी है। फायर सीजन में व्यस्तता के चलते नदी में अवैध शिकार की पूरी निगरानी संभव नहीं है। हालांकि समय-समय पर विभाग नदियों में शिकार को लेकर चेतावनी जारी करता आ रहा है। दूसरी ओर थाना प्रभारी सुनील बिष्ट का कहना है कि अवैध शिकार की शिकायत पर नदियों में छापामारी की रणनीति बनाई जा रही है।
कार्यदायी संस्थाओं के जरिये मिल रहा विस्फोटक
नदियों में मछलियों का अवैध शिकार करने वालों को सरकारी कार्यदायी संस्थाओं के जरिये विस्फोटक की आपूर्ति हो रही है। इन एजेंसियों से जुड़े कुछ ठेकेदार महज सौ रुपये में जिलेटिन की छड़ बेच रहे हैं। जिलेटिन की छड़ों में डेटोनेटर और टाइम फ्यूज लगाकर नदियों की सतह पर विस्फोटक किया जा रहा है। यह सिलसिला लंबे समय से चल रहा है। ग्रामीण कई बार विभाग और पुलिस से शिकायत कर चुके हैं, लेकिन विस्फोटकों की आपूर्ति बेधड़क जारी है।