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पैराग्लाइडिंग पर संकट के बादल
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sun, 07 Oct 2018 10:18 PM IST
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पिथौरागढ़ में पैराग्लाइडिंग करता युवा
- फोटो : अमर उजाला
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प्रदेश सरकार की उत्तराखंड फुट लांच एयरो स्पोर्ट्स नियमावली को न्यायालय में चुनौती देने की तैयारी की जा रही है। पैराग्लाइडिंग और इससे संबंधित खेलों के प्रशिक्षकों को यह नियमावली रास नहीं आ रही है। इनका कहना है कि नियमावली से पुराने प्रशिक्षक ही खेल से बाहर हो गए हैं। सरकार ने सितंबर माह में यह नियमावली जारी की थी।
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प्रदेश में एकमात्र पिथौरागढ़ ही है जहां पैराग्लाइडिंग का प्रशिक्षण दिया जाता है। वर्ष 1994 में राजेंद्र सिंह ऐरी, अशोक भंडारी, बलवंत कपकोटी ने यहां पैराग्लाइडिंग की शुरुआत की थी। वर्ष 2008-09 में पर्यटन विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के युवाओं को पैराग्लाइडिंग स्वरोजगार मुहैया कराने का प्रावधान किया। अब तक पर्यटन विभाग करीब 500 युवाओं को प्रशिक्षित कर भी चुका है। इनमें से एक दर्जन वर्तमान में सफल प्रशिक्षक हैं।
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अशोक भंडारी का कहना है कि अब न्यायालय की शरण ली जाएगी। इस खेल में राष्ट्रीय स्तर की रैंकिंग होती है। नियमावली में रैंकिंग की गलत व्याख्या की गई है। इससे अब पैराग्लाइडिंग के पुराने प्रशिक्षक बाहर हो गए हैं। प्रशिक्षकों का यह भी कहना है कि उत्तराखंड में हिमाचल और महाराष्ट्र से भी कठिन नियम बनाए गए हैं। एक्ट में यह भी प्रावधान किया गया है कि बाहर से आने वाले पर्यटकों को पैराग्लाइडिंग के लिए 14 दिन पूर्व की अनुमति लेनी होगी जो कि कहीं से भी व्यावहारिक नहीं है।
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