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सीबीटीएस के चार सदस्यी दल ने 15 अगस्त को यूरोप महाद्वीप की सर्वोच्च चोटी माउंट एल्ब्रूस पर फहराया तिरंगा

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 17 Aug 2021 12:10 AM IST
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Climbing in Europe
यूरोप की सबसे ऊंची चोटी एल्ब्रूस पर 15 अगस्त को तिरंगा फहराती पिथौरागढ़ की युवा पर्वतारोही शीतल औ? - फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़/धारचूला। क्लाइंबिंग बियोंड द् समिट्स (सीबीटीएस) के चार सदस्यीय दल ने 75वें स्वतंत्रता दिवस पर यूरोप महाद्वीप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एलब्रुस पर तिरंगा फहराकर देश का नाम रोशन किया है। 5642 मीटर ऊंची ये चोटी रूस-जार्जिया सीमा पर स्थित है। सीबीटीएस दल की सफलता के बाद सीमांत में खुशी की लहर है।
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चार सदस्यीय दल को कुमाऊं मंडल विकास निगम नैनीताल के एडवेंचर विंग में कार्यरत 25 वर्षीय विख्यात युवा पर्वतारोही शीतल दल का नेतृत्व कर कर रही थी। शीतल ने इससे पूर्व एवरेस्ट, कंचनजंगा और अन्नपूर्णा जैसे दुर्गम पर्वतों को फतह किया है। उनके नाम दुनिया की सबसे कम उम्र की महिला होने का रिकॉर्ड भी है, जिन्होंने कंचनजंघा और अन्नपूर्णा चोटी को फतह किया है।
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शीतल ने बताया कि 15 अगस्त को आरोहण करने के उद्देश्य से टीम ने प्लान किया था। कोविड महामारी के कारण फ्लाइट रद्द होने के कारण टीम तीन दिन देरी से मास्को पहुंची। 13 अगस्त को 3600 मीटर पर अपना बैस कैंप बनाया। 14 अगस्त की रात को वह आरोहण के लिए निकले।
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15 अगस्त को करीब एक बजे एलब्रुस चोटी पर तिरंगा लहराकर आजादी का जश्न मनाया। 48 घंटे में बैस कैंप से आरोहण करना मुश्किल था बहुत कम पर्वतारोही ही ऐसा कर पाते हैं। एलब्रुस जाने से पहले टीम ने उत्तराखंड के हिमालयी क्षेत्र में पर्याप्त ट्रेनिंग की थी। और इसी का नतीजा था की टीम रिकॉर्ड समय पर आरोहण कर पाई।
राजस्थान के जुड़वा भाईयों ने बनाया रिकॉर्ड
पिथौरागढ़। चार सदस्यीय दल में राजस्थान के जुड़वा भाई तपन देव सिंह और तरुण देव सिंह एलब्रूस पर्वत फतह करने वाले भारत के पहले जुड़वा भाई बन गए हैं। टीम के चौथे सदस्य केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख से जिगमित थरचिन थे। जिन्होंने ने इसी साल माउंट एवरेस्ट को फतह किया था। वह केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के पहले युवा बने जिन्होंने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी को फतह किया।
राजस्थान के जुड़वा भाई तपन और तरुण पिछले साल से सीबीटीएस संस्था से जुड़े थे। एवरेस्ट विजेता शीतल उन्हें पर्वतारोहण के गुर सिखा रही थी। दोनों भाइयों का सपना है कि वह एक दिन दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराएंगे।
दोनों उत्तराखंड के कुमाऊं हिमालय में स्थित दारमा और व्यास घाटी में अपना प्रशिक्षण जारी रखेंगे। 2023 में वह माउंट एवरेस्ट अभियान की शुरुआत करेंगे। शीतल की इस सफलता पर रं कल्याण संस्था के मुख्य संरक्षक नृप सिंह नपलच्याल और केंद्रीय अध्यक्ष बिशन सिंह बोनाल आदि लोगों ने खुशी जताई है।
एलब्रूस पर्वत है सुप्त ज्वालामुखी
पिथौरागढ़। एलब्रूस पर्वत एक सुप्त ज्वालामुखी है जो कॉकस क्षेत्र की कॉकस पर्वत शृंखला में स्थित है। इसके दो शिखर हैं। पश्चिमी शिखर 5642 मीटर (18410 फुट) और पूर्वी शिखर 5621 (18442 फुट) ऊंचा है। एवरेस्ट विजेता और सीबीटीएस के संस्थापक योगेश गर्ब्याल ने बताया कि शीतल बहुत गरीब परिवार से आती हैं। उनके पिता टैक्सी चलाकर परिवार पालते हैं।

शीतल की पर्वतारोहण की क्षमता और उनके प्रतिभा को देखकर विभिन्न संस्थाओं ने आगे आकर सहयोग किया। इसी साल शीतल को द हंस फाउंडेशन ने दुनिया की सबसे खतरनाक माने जाने वाली चोटी अन्नपूर्णा के लिए प्रायोजित किया था। संस्था का उद्देश्य एडवेंचर स्पोर्ट्स को बढ़ावा देना है।
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