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चीन के दोस्ताना व्यवहार से यात्री गदगद
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पिथौरागढ़ से जागेश्वर रवाना होते यात्री पूरी कर लौटे 14वें दल के कैलाश मानसरोवर यात्री। अमर उजाला
- फोटो : PITHORAGARH
कैलाश मानसरोवर यात्रा के 14वें दल के यात्रियों का परिक्रमा पूरी कर पर्यटक आवास गृह पहुंचने पर स्वागत किया गया। चीन में लोगों के दोस्ताना व्यवहार से यात्री काफी खुश नजर आए। भोजन के बाद यात्री जागेश्वर रवाना हो गए।
14वें दल के 58 यात्रियों में से 53 यात्री शुक्रवार को परिक्रमा पूरी कर आधार शिविर धारचूला से पिथौरागढ़ स्थित पर्यटक आवास गृह पहुंचे। दल के पांच यात्री निजी कारणों के चलते धारचूला से हल्द्वानी को रवाना हो गए। पर्यटक आवास गृह में प्रबंधक दिनेश गुरुरानी के नेतृत्व में निगम कर्मियों ने बुरांश का जूस पिलाकर यात्रियों का स्वागत किया। यात्रियों ने गुरुरानी की पहल पर मानसरोवर स्मृति वाटिका में एक पौधा धरती के नाम लगाते हुए पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। साथ ही शहीद स्मारक पर एक दीया शहीदों के नाम पर जलाया।
दल की संपर्क अधिकारी डॉ. सुपर्णा एम पचौरी ने बताया कि यात्रा में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। चीन में सुरक्षा बलों और लोगों का व्यवहार काफी दोस्ताना रहा। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए डेरापुक और जुनजुई-पू में चीन ने नए भवन बनाए हैं। बताया कि कैलाश परिक्रमा के दौरान महादेव की कृपा से मौसम साफ था। यात्रियों को अच्छे ढंग से कैलाश के दर्शन हुए। यात्रियों को चरण स्पर्श तक जाने की अनुमति थी। मानसरोवर झील में यात्रियों ने बाल्टी से स्नान किया। दल को 22 अगस्त को यहां पहुंचना था लेकिन छंकन, मालपा, लामारी में रास्ता खराब होने के चलते यात्रियों को गुंजी में ही रोक दिया गया था। दोपहर के भोजन में यात्रियों को पहाड़ी व्यंजन परोसे गए। इसके बाद यात्री जागेश्वर को रवाना हो गए। इस मौके पर दूसरे संपर्क अधिकारी अमित ददई, हर सिंह, गणेश नगरकोटी, दीपक सिंह, वेदप्रकाश भट्ट, पदम सिंह, दिगंबर बोरा आदि मौजूद रहे।
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14वें दल के 58 यात्रियों में से 53 यात्री शुक्रवार को परिक्रमा पूरी कर आधार शिविर धारचूला से पिथौरागढ़ स्थित पर्यटक आवास गृह पहुंचे। दल के पांच यात्री निजी कारणों के चलते धारचूला से हल्द्वानी को रवाना हो गए। पर्यटक आवास गृह में प्रबंधक दिनेश गुरुरानी के नेतृत्व में निगम कर्मियों ने बुरांश का जूस पिलाकर यात्रियों का स्वागत किया। यात्रियों ने गुरुरानी की पहल पर मानसरोवर स्मृति वाटिका में एक पौधा धरती के नाम लगाते हुए पर्यावरण संरक्षण की शपथ ली। साथ ही शहीद स्मारक पर एक दीया शहीदों के नाम पर जलाया।
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दल की संपर्क अधिकारी डॉ. सुपर्णा एम पचौरी ने बताया कि यात्रा में किसी भी तरह की परेशानियों का सामना नहीं करना पड़ा। चीन में सुरक्षा बलों और लोगों का व्यवहार काफी दोस्ताना रहा। उन्होंने बताया कि यात्रियों की सुविधा के लिए डेरापुक और जुनजुई-पू में चीन ने नए भवन बनाए हैं। बताया कि कैलाश परिक्रमा के दौरान महादेव की कृपा से मौसम साफ था। यात्रियों को अच्छे ढंग से कैलाश के दर्शन हुए। यात्रियों को चरण स्पर्श तक जाने की अनुमति थी। मानसरोवर झील में यात्रियों ने बाल्टी से स्नान किया। दल को 22 अगस्त को यहां पहुंचना था लेकिन छंकन, मालपा, लामारी में रास्ता खराब होने के चलते यात्रियों को गुंजी में ही रोक दिया गया था। दोपहर के भोजन में यात्रियों को पहाड़ी व्यंजन परोसे गए। इसके बाद यात्री जागेश्वर को रवाना हो गए। इस मौके पर दूसरे संपर्क अधिकारी अमित ददई, हर सिंह, गणेश नगरकोटी, दीपक सिंह, वेदप्रकाश भट्ट, पदम सिंह, दिगंबर बोरा आदि मौजूद रहे।
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