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Pithoragarh News: चेक बाउंस के दोषी को एक वर्ष कारावास की सजा
Tue, 28 Jan 2025 11:11 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 28 Jan 2025 11:11 PM IST
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पिथौरागढ़। न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आरती सरोहा की अदालत ने चेक बाउंस के दोषी को एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। दोषी को तीन लाख अस्सी हजार रुपये प्रतिकर के रूप में 30 दिन के भीतर देने होंगे।
मामले के अनुसार वर्ष 2019 में महेश चौधरी ने आपसी जान-पहचान के चलते निजी आवश्यकता के लिए राजेंद्र प्रसाद से तीन लाख रुपये उधार लिए थे। इस दौरान उसने तीन माह के अंदर धनराशि वापस करने का हवाला दिया था। समय बीत जाने पर राजेंद्र प्रसाद ने उधार दी गई धनराशि वापस मांगी। इस दौरान महेश चौधरी ने सात अगस्त 2019 की तारीख दर्ज कर अपने खाते का एक चेक दिया। बैंक ने खाते में धनराशि नहीं होने के कारण चेक पर टिप्पणी लिखकर वापस कर दिया। राजेंद्र प्रसाद ने अधिवक्ता के माध्यम से दिसंबर 2019 को महेश चौधरी को नोटिस भेजा। बावजूद इसके धनराशि वापस नहीं की गई। इस पर मौखिक और साक्ष्यों के आधार पर महेश चौधरी को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में न्यायालय में तलब किया गया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था।
सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आरती सरोहा की अदालत ने आरोपी महेश चौधरी को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में दोषसिद्ध करार देते हुए एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी को तीन लाख अस्सी हजार रुपये प्रतिकर के रूप में 30 दिन के भीतर देने होंगे।
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मामले के अनुसार वर्ष 2019 में महेश चौधरी ने आपसी जान-पहचान के चलते निजी आवश्यकता के लिए राजेंद्र प्रसाद से तीन लाख रुपये उधार लिए थे। इस दौरान उसने तीन माह के अंदर धनराशि वापस करने का हवाला दिया था। समय बीत जाने पर राजेंद्र प्रसाद ने उधार दी गई धनराशि वापस मांगी। इस दौरान महेश चौधरी ने सात अगस्त 2019 की तारीख दर्ज कर अपने खाते का एक चेक दिया। बैंक ने खाते में धनराशि नहीं होने के कारण चेक पर टिप्पणी लिखकर वापस कर दिया। राजेंद्र प्रसाद ने अधिवक्ता के माध्यम से दिसंबर 2019 को महेश चौधरी को नोटिस भेजा। बावजूद इसके धनराशि वापस नहीं की गई। इस पर मौखिक और साक्ष्यों के आधार पर महेश चौधरी को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में न्यायालय में तलब किया गया। तब से यह मामला न्यायालय में चल रहा था।
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सोमवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट सिविल जज (सीनियर डिवीजन) आरती सरोहा की अदालत ने आरोपी महेश चौधरी को 138 परक्राम्य लिखित अधिनियम 1881 के अपराध में दोषसिद्ध करार देते हुए एक वर्ष कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा दोषी को तीन लाख अस्सी हजार रुपये प्रतिकर के रूप में 30 दिन के भीतर देने होंगे।
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