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चंडाक, मोस्टामानू का तापमान भी तेजी से बढ़ रहा
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
Updated Sat, 07 Oct 2017 11:07 PM IST
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पिथौरागढ़ का खूबसूरत स्थान चंडाक
- फोटो : अमर उजाला
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समुद्र सतह से करीब छह हजार फुट की ऊंचाई पर स्थित चंडाक और मोस्टामानू को पिथौरागढ़ नगर का मस्तक कहा जाता है। घने जंगलों के बीच स्थित इन स्थानों की खासियत रही है कि यहां पर मौसम ठंडा और नमीयुक्त रहता था, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से देखा जा रहा है कि चंडाक, मोस्टामानू में पहले जैसी बर्फ अब नहीं गिरती। बारिश की मात्रा भी कम होती है।
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अक्तूबर से चंडाक में ठंड का असर शुरू हो जाता था और लोग गर्म कपड़े पहनने लग जाते थे, लेकिन इस बार अक्तूबर का प्रथम सप्ताह बीत गया है और लोगों को गर्म कपड़े निकालने की जरूरत नहीं पड़ी है। इसकी वजह चंडाक और मोस्टामानू में हाल के वर्षों में निर्माण कार्यों में तेजी है। इससे जमीन की नमी कम होने लगी और तापमान बढ़ने लगा। चंडाक का औसत तापमान पिथौरागढ़ नगर से तीन से चार डिग्री तक कम रहता था, लेकिन अब चंडाक में भी तापमान बढ़ने लगा है।
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मौसम विज्ञानियों का कहना है कि मौसम चक्र में आ रहे बदलाव का असर सभी स्थानों पर पड़ रहा है। अब बारिश की मात्रा कम हो रही है और हिमपात भी पहले जैसा नहीं होता। इस कारण ठंडे स्थानों पर तापमान बढ़ना आम बात है। पिथौरागढ़ नगर तथा चंडाक में इस बार 24 सितंबर के बाद बारिश की एक बूंद नहीं गिरी है। 24 सितंबर को 13.3 मिलीमीटर वर्षा हुई, उसके बाद करीब दो सप्ताह पूरे होने वाले हैं, बारिश नहीं हुई है। बारिश न होने से जमीन में नमी का स्तर कम हो रहा है। हवा में ठंडक कम है। इसी कारण गर्मी का असर होने लगा है। चंडाक, मोस्टामानू, थलकेदार में इस बार अक्तूबर में भी गर्मी का असर देखा जा रहा है।
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तापमान में हर साल हो रही वृद्धि
यदि मौसम विभाग के पिछले तीन वर्ष के रिकार्ड को देखा जाए तो तापमान में तेजी से बढ़ोतरी हुई है। 2015 में तीन अक्तूबर को पिथौरागढ़ का अधिकतम तापमान 29 डिग्री सेल्सियस रहा और 29 अक्तूबर को सबसे कम अधिकतम तापमान 19.4 डिग्री रिकार्ड किया गया था। वर्ष 2015 में 13 अक्तूबर को न्यूनतम तापमान 7.2 डिग्री तक पहुंचा था। चंडाक में यही तापमान तीन डिग्री सेल्सियस कम रहा था। इसी तरह अक्तूबर 2016 में अधिकतम तापमान 28.7 डिग्री से ज्यादा नहीं गया। यह तीन अक्तूबर को रिकार्ड किया गया। वर्ष 2017 में अब तक अक्तूबर में अधिकतम तापमान 30 डिग्री के आसपास ही चल रहा है। सबसे आश्चर्य की बात यह है कि सात अक्तूबर को न्यूनतम तापमान 17.4 डिग्री सेल्सियस रिकार्ड किया गया।
मोस्टामानू में अब सेब के पेड़ नहीं
मोस्टामानू निवासी प्रगतिशील किसान इकबाल बख्श का कहना है कि चंडाक, मोस्टामानू में अब पहले जितनी बर्फ नहीं गिरती। यदि बर्फ गिरती भी है तो ज्यादा समय तक नहीं टिकती। 70 वर्षीय इकबाल का कहना है कि चंडाक और मोस्टामानू का मौसम बदल रहा है। इसका असर कृषि और बागवानी पर भी पड़ रहा है। पहले मोस्टामानू में सेब खूब पैदा होता था, अब यहां पर सेब के पेड़ उजड़ गए हैं।