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ईको टूरिज्म विकसित करने के लिए हट्स का निर्माण करें : डीएम
Tue, 27 Jun 2023 10:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 27 Jun 2023 10:35 PM IST
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पिथौरागढ़ कलक्ट्रेट में सिक्योर हिमालय परियोजना की बैठक लेतीं डीएम रीना जोशी। संवाद
पिथौरागढ़। डीएम रीना जोशी ने मंगलवार को सिक्योर हिमालय परियोजना के संबंध में वन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने इको टूरिज्म को विकसित करने के लिए हट्स निर्माण को भी कार्य योजना में शामिल करने के निर्देश दिए।
डीएम ने सिक्योर हिमालय के अंतर्गत वन विभाग की तैयार कार्ययोजना का अवलोकन किया। उन्होंने कार्य योजना को और बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण, लोगों की आजीविका संवर्धन, वन्यजीव अपराधों को रोकने और बेहतर संवाद प्रणाली, जानकारियों के प्रबंधन को लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्र को संरक्षित रखा जा सके।
उन्होंने निर्देश दिए कि कार्ययोजना में फ्रंटलाइन स्टाफ की ट्रेनिंग के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निवासरत लोगों के लिए फोटोग्राफी, ट्रैकिंग, नेचर गाइड आदि के प्रशिक्षण को शामिल किया जाए। साथ ही एडवेंचर टूरिज्म को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण व उपकरण क्रय किए जाने के लिए भी कार्य योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ से कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निवासरत लोगों के साथ भी बैठक आयोजित कर क्षेत्र के संरक्षण को लेकर उनके सुझाव प्राप्त करें। उन्होंने जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर से बुग्याल पर जैविक दबाव संबंधी डाटा मांगे जाने और बुग्याल की धारण क्षमता का आकलन करने के भी निर्देश दिए। बैठक में जिला उद्यान अधिकारी त्रिलोकी राय, मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा भी मौजूद रहे।
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दारमा और व्यास घाटी में चल रही है परियोजना
पिथौरागढ़। उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि सिक्योर हिमालय परियोजना के अंतर्गत दारमा और व्यास घाटियां आती हैं। इस परियोजना का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण मुख्यतः हिम तेंदुआ और अन्य विलुप्त प्रायः प्रजातियों का संरक्षण, विविध आजीविका संवर्धन के विकल्पों को बढ़ावा देना है ताकि उच्च हिमालय पर समुदाय की निर्भरता प्राकृतिक संसाधनों पर न्यूनतम रहे। साथ ही वन्य जीव अपराध को रोकना, बेहतर संवाद प्रणाली और जानकारियों का प्रबंधन करना है। संवाद
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डीएम ने सिक्योर हिमालय के अंतर्गत वन विभाग की तैयार कार्ययोजना का अवलोकन किया। उन्होंने कार्य योजना को और बेहतर बनाने के लिए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि परियोजना के अंतर्गत जिले के उच्च हिमालयी क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण, लोगों की आजीविका संवर्धन, वन्यजीव अपराधों को रोकने और बेहतर संवाद प्रणाली, जानकारियों के प्रबंधन को लेकर ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए ताकि उच्च हिमालयी क्षेत्र को संरक्षित रखा जा सके।
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उन्होंने निर्देश दिए कि कार्ययोजना में फ्रंटलाइन स्टाफ की ट्रेनिंग के साथ ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निवासरत लोगों के लिए फोटोग्राफी, ट्रैकिंग, नेचर गाइड आदि के प्रशिक्षण को शामिल किया जाए। साथ ही एडवेंचर टूरिज्म को विकसित करने के लिए प्रशिक्षण व उपकरण क्रय किए जाने के लिए भी कार्य योजना तैयार करने को कहा। उन्होंने उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ से कहा कि उच्च हिमालयी क्षेत्रों में निवासरत लोगों के साथ भी बैठक आयोजित कर क्षेत्र के संरक्षण को लेकर उनके सुझाव प्राप्त करें। उन्होंने जीबी पंत विश्वविद्यालय पंतनगर से बुग्याल पर जैविक दबाव संबंधी डाटा मांगे जाने और बुग्याल की धारण क्षमता का आकलन करने के भी निर्देश दिए। बैठक में जिला उद्यान अधिकारी त्रिलोकी राय, मुख्य कृषि अधिकारी रितु टम्टा भी मौजूद रहे।
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दारमा और व्यास घाटी में चल रही है परियोजना
पिथौरागढ़। उप प्रभागीय वनाधिकारी ज्वाला प्रसाद गौड़ ने बताया कि सिक्योर हिमालय परियोजना के अंतर्गत दारमा और व्यास घाटियां आती हैं। इस परियोजना का उद्देश्य जैव विविधता संरक्षण मुख्यतः हिम तेंदुआ और अन्य विलुप्त प्रायः प्रजातियों का संरक्षण, विविध आजीविका संवर्धन के विकल्पों को बढ़ावा देना है ताकि उच्च हिमालय पर समुदाय की निर्भरता प्राकृतिक संसाधनों पर न्यूनतम रहे। साथ ही वन्य जीव अपराध को रोकना, बेहतर संवाद प्रणाली और जानकारियों का प्रबंधन करना है। संवाद