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अतिरिक्त बजट से चीन सीमा के लिए बन रही सड़कों के निर्माण में आएगी तेजी
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पिथौरागढ़। केंद्र ने उत्तराखंड को राष्ट्रीय राजमार्ग के विकास के लिए 340 करोड़ रुपये दिए हैं। केंद्र सरकार की ओर से सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के अधीन बन रही सड़कों के निर्माण के लिए अतिरिक्त राशि जारी करने से पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा के लिए बन रही सड़कों के निर्माण में तेजी आएगी।
चीन और नेपाल सीमा से लगा होने के कारण पिथौरागढ़ जिले की सड़कें सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस समय जिले में धारचूला और मुनस्यारी की सड़कें बीआरओ के अधीन हैं। पिछले डेढ़ दशक से बन रही घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़क को इस साल चीन सीमा तक जोड़कर बीआरओ ने बड़ी सफलता पाई है। धारचूला के तवाघाट से करीब 95 किमी लंबी यह सड़क बनने से भारत की चीन सीमा तक पहुंच आसान हो गई है।
सुरक्षा बलों के जवानों के साथ ही माइग्रेशन पर जाने वाले स्थानीय लोगों को भी काफी सहूलियत मिली है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण होना है। इसके बाद सड़क हॉटमिक्स होगी। कुछ स्थानों पर अभी पुल भी बनने हैं। बुंदिगाड़ और मालपा में बीआरओ ने पुल बना लिए हैं। मुनस्यारी से मिलम के लिए बन रही सड़क भी बीआरओ के अधीन है। करीब 80 किमी लंबी इस सड़क में 18 किमी लंबी चट्टानें बाधक बनी हैं। इन कठिन चट्टानों को काटने के लिए हेलीकॉप्टर से मशीनें और अन्य उपकरण मिलम पहुंचाए गए हैं। सीमा पर चीनी सैनिकों की हरकतों को देखते हुए सड़कों का निर्माण कार्य तेज कर दिया है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त राशि मिलने से सीमा के लिए बन रही सड़कों के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और उचित रखरखाव भी होने की उम्मीद है।
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चीन और नेपाल सीमा से लगा होने के कारण पिथौरागढ़ जिले की सड़कें सामरिक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण हैं। इस समय जिले में धारचूला और मुनस्यारी की सड़कें बीआरओ के अधीन हैं। पिछले डेढ़ दशक से बन रही घट्टाबगड़-लिपुलेख सड़क को इस साल चीन सीमा तक जोड़कर बीआरओ ने बड़ी सफलता पाई है। धारचूला के तवाघाट से करीब 95 किमी लंबी यह सड़क बनने से भारत की चीन सीमा तक पहुंच आसान हो गई है।
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सुरक्षा बलों के जवानों के साथ ही माइग्रेशन पर जाने वाले स्थानीय लोगों को भी काफी सहूलियत मिली है। हालांकि अभी कुछ स्थानों पर सड़क चौड़ीकरण होना है। इसके बाद सड़क हॉटमिक्स होगी। कुछ स्थानों पर अभी पुल भी बनने हैं। बुंदिगाड़ और मालपा में बीआरओ ने पुल बना लिए हैं। मुनस्यारी से मिलम के लिए बन रही सड़क भी बीआरओ के अधीन है। करीब 80 किमी लंबी इस सड़क में 18 किमी लंबी चट्टानें बाधक बनी हैं। इन कठिन चट्टानों को काटने के लिए हेलीकॉप्टर से मशीनें और अन्य उपकरण मिलम पहुंचाए गए हैं। सीमा पर चीनी सैनिकों की हरकतों को देखते हुए सड़कों का निर्माण कार्य तेज कर दिया है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त राशि मिलने से सीमा के लिए बन रही सड़कों के निर्माण कार्य में तेजी आएगी और उचित रखरखाव भी होने की उम्मीद है।
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