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Pithoragarh News: किताबों और पानी ने बढ़ाया बस्ते का बोझ, जिम्मेदाराें की कब बदलेगी सोच
Thu, 26 Dec 2024 11:22 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Thu, 26 Dec 2024 11:22 PM IST
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पिथौरागढ़। प्रदेश में विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ कम करने के दावे हो रहे हैं जो सीमांत जिले में बेअसर हैं। यहां किताबों के साथ ही पानी विद्यार्थियों के बस्ते का बोझ बढ़ा रहा है। ऐसा इसलिए कि 108 स्कूल पेयजल विहीन हैं और यहां विद्यार्थियों को पीने का पानी नहीं मिलता। ऐसे में विद्यार्थी अपने बस्ते में घर से पानी की बोतल ढोकर अपनी प्यास बुझाने के लिए मजबूर हैं।
शिक्षा व्यवस्थाओं को बेहतर कर सरकारी शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बीच सीमांत जिले में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पीने का पानी भी सरकार और शिक्षा विभाग उपलब्ध नहीं कर सका है। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं।
आंकड़ों के मुताबिक सीमांत जिले में 108 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ऐसे हैं जहां अब तक पेयजल की व्यवस्था नहीं है। गंगोलीहाट विकासखंड में सबसे अधिक 52 जबकि नगर के नजदीकी विकासखंड विण में 10 तो मूनाकोट में 11 विद्यालय ऐसे हैं जहां जल संयोजन नहीं है। हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना भी इन विद्यालयों के काम नहीं आई।
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हालात यह हैं कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले दो हजार से अधिक विद्यार्थी अपनी प्यास बुझाने के लिए घर से बोतलों में पानी ढोने के लिए मजबूर हैं जो उनके बस्ते का वजन भी बढ़ा रहा है। मध्याह्न भोजन पकाने के लिए भी पानी की व्यवस्था करने को भोजन माताएं कई किमी दूर प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगा रही हैं।
303 विद्यालयों में नहीं है बिजली
पिथौरागढ़। सरकारी शिक्षा को बेहतर करने की बात हो रही है लेकिन सरकारी विद्यालयों में बिजली तक नहीं है। सीमांत जिले में 303 ऐसे विद्यालय हैं जो अब तक बिजली से रोशन नहीं हो सके हैं। बिजली न होने से इन विद्यालयों के कक्षों में विद्यार्थी पढ़ाई करने के लिए खिड़कियों से आने वाली रोशनी पर निर्भर हैं। वहीं बगैर बिजली के कंप्यूटर संचालित नहीं हो रहे हैं इससे विद्यार्थियों को तकनीकी युग में भी इसका ज्ञान नहीं मिल रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों के स्कूलों में बगैर बिजली के ठंड से बचने के लिए कैसे लगेंगे हीटर
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग सहित अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों को ठंड से बचाने के लिए हीटर लगाने की बात हो रही है। बगैर बिजली के हीटर कैसे काम करेंगे सिस्टम यह भूल गया। ऐसे में तय है कि यह दावे परवान नहीं चढ़ेंगे और विद्यार्थियों को ठंड में ठिठुरते हुए पढ़ाई करनी होगी।
विकासखंडवार पेयजल और बिजली विहीन विद्यालय
विकासखंड पेयजल विहीन बिजली विहीन
कनालीछीना 08 45
डीडीहाट 03 18
विण 11 12
मूनाकोट 10 23
मुनस्यारी 08 35
धारचूला 15 70
बेड़ीनाग 01 13
गंगोलीहाट 52 87
कोट-
कई स्कूल जल स्रोतों और पेयजल योजनाओं से दूर होने से इनमें जल संयोजन नहीं पहुंच सका है। हर विद्यालय में जल संयोजन लगाने के प्रयास हो रहे हैं। विद्युत विहीन विद्यालयों में बिजली संयोजन के लिए आगणन तैयार कर निदेशालय को भेजा गया है। - तरुण कुमार पंत, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक, पिथौरागढ़।
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शिक्षा व्यवस्थाओं को बेहतर कर सरकारी शिक्षा को बढ़ावा देने के दावों के बीच सीमांत जिले में सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों को पीने का पानी भी सरकार और शिक्षा विभाग उपलब्ध नहीं कर सका है। शिक्षा विभाग से मिले आंकड़े इसकी तस्दीक कर रहे हैं।
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आंकड़ों के मुताबिक सीमांत जिले में 108 प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूल ऐसे हैं जहां अब तक पेयजल की व्यवस्था नहीं है। गंगोलीहाट विकासखंड में सबसे अधिक 52 जबकि नगर के नजदीकी विकासखंड विण में 10 तो मूनाकोट में 11 विद्यालय ऐसे हैं जहां जल संयोजन नहीं है। हर घर नल से जल पहुंचाने की योजना भी इन विद्यालयों के काम नहीं आई।
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हालात यह हैं कि इन विद्यालयों में पढ़ने वाले दो हजार से अधिक विद्यार्थी अपनी प्यास बुझाने के लिए घर से बोतलों में पानी ढोने के लिए मजबूर हैं जो उनके बस्ते का वजन भी बढ़ा रहा है। मध्याह्न भोजन पकाने के लिए भी पानी की व्यवस्था करने को भोजन माताएं कई किमी दूर प्राकृतिक जल स्रोतों की दौड़ लगा रही हैं।
303 विद्यालयों में नहीं है बिजली
पिथौरागढ़। सरकारी शिक्षा को बेहतर करने की बात हो रही है लेकिन सरकारी विद्यालयों में बिजली तक नहीं है। सीमांत जिले में 303 ऐसे विद्यालय हैं जो अब तक बिजली से रोशन नहीं हो सके हैं। बिजली न होने से इन विद्यालयों के कक्षों में विद्यार्थी पढ़ाई करने के लिए खिड़कियों से आने वाली रोशनी पर निर्भर हैं। वहीं बगैर बिजली के कंप्यूटर संचालित नहीं हो रहे हैं इससे विद्यार्थियों को तकनीकी युग में भी इसका ज्ञान नहीं मिल रहा है।
उच्च हिमालयी क्षेत्रों के स्कूलों में बगैर बिजली के ठंड से बचने के लिए कैसे लगेंगे हीटर
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में कड़ाके की ठंड पड़ रही है। धारचूला, मुनस्यारी, बेड़ीनाग सहित अन्य उच्च हिमालयी क्षेत्रों के स्कूलों में विद्यार्थियों को ठंड से बचाने के लिए हीटर लगाने की बात हो रही है। बगैर बिजली के हीटर कैसे काम करेंगे सिस्टम यह भूल गया। ऐसे में तय है कि यह दावे परवान नहीं चढ़ेंगे और विद्यार्थियों को ठंड में ठिठुरते हुए पढ़ाई करनी होगी।
विकासखंडवार पेयजल और बिजली विहीन विद्यालय
विकासखंड पेयजल विहीन बिजली विहीन
कनालीछीना 08 45
डीडीहाट 03 18
विण 11 12
मूनाकोट 10 23
मुनस्यारी 08 35
धारचूला 15 70
बेड़ीनाग 01 13
गंगोलीहाट 52 87
कोट-
कई स्कूल जल स्रोतों और पेयजल योजनाओं से दूर होने से इनमें जल संयोजन नहीं पहुंच सका है। हर विद्यालय में जल संयोजन लगाने के प्रयास हो रहे हैं। विद्युत विहीन विद्यालयों में बिजली संयोजन के लिए आगणन तैयार कर निदेशालय को भेजा गया है। - तरुण कुमार पंत, जिला शिक्षा अधिकारी, बेसिक, पिथौरागढ़।