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फंगस से बलतिर फार्म में फसल चौपट
महेंद्र जंगपांगी/अमर उजाला, थल
Updated Tue, 11 Oct 2016 10:41 PM IST
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फंगस की चपेट में धान की फसल
- फोटो : अमर उजाला
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कृषि महकमा अपनी खेती को ही नहीं बचा पा रहा है, किसानों को कितनी राहत पहुंचा पाएगा, यह समझने वाली बात है। राजकीय कृषि बीज संवर्धन प्रक्षेत्र (बलतिर फार्म) बलतिर में पिछले तीन साल से फंगस लगने से धान की फसल चौपट हो रही है। खामी बीज में बताई जा रही है। बलतिर गांव में किसानों की धान की फसल भी रोग की भेंट चढ़ गई है। फार्म के कर्मचारी और किसान धान की प्रजाति बदलने की मांग कर रहे हैं, जो अनसुनी की जा रही है। अकेले सरकारी फार्म को हर सीजन में 70 क्विंटल धान का नुकसान हो रहा है।
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बलतिर फार्म की 6 एकड़ भूमि पर वीएल 85 प्रजाति के धान बोए गए थे। धान में नेक ब्लाइड नामक रोग लग गया है। फंगस रोग के कारण धान की बालियां काली पड़ जा रही हैं। धान के दाने अंदर से खोखले हो रहे हैं। बलतिर फार्म के कर्मचारियों के अनुसार फार्म में 80 से 90 क्विंटल धान की पैदावार होती थी। करीब 90 प्रतिशत धान की फसल फंगस की भेंट चढ़ गई है। वीएल 85 धान को पिछले तीन साल से बोया जा रहा है। पिछले दो साल के नतीजे ठीक न आने के बाद भी इसी धान को बोया गया।
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बलतिर गांव के 40 किसानों को कृषि विभाग ने 8 क्विंटल वीएल 85 प्रजाति के धान के बीज दिए थे। रोग के कारण 80 प्रतिशत खेती खराब हो गई है।
गांव के गणेश राम ने 40 नाली, मीना देवी ने 25 नाली, रमेश राम ने 10 नाली, प्रकाश सिंह ने 15, कमान सिंह 12, गोपाल सिंह 20, प्रभुनारायण 10, ठाकुर राम 10, राजेंद्र प्रसाद 10, प्रेम राम 15, लक्ष्मी राम 10, नारायण राम ने 10 नाली के खेत में धान बोया था। ये लोग बताते हैं कि पांच साल पहले वीएल 62 प्रजाति का धान बोया गया था, इसकी अच्छी पैदावार हुई थी। पंत 11 के भी अच्छे नतीजे हैं, लेकिन अब ये बीज उपलब्ध नहीं कराए जा रहे हैं। वीएल 85 की खेती सफल न होने के बाद भी जबरदस्ती यही बीज थोपा जा रहा है। किसानों के साथ धोखा किया जा रहा है।
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धान के पौधों में दवाओं के छिड़काव का कोई असर नहीं हुआ। उच्चाधिकारियों से धान की प्रजाति बदलने की मांग लगातार की जा रही है। एक बार फिर पत्र लिखा जा रहा है। -देव नारायण यादव, अधीक्षक राजकीय कृषि बीज संवर्धन प्रक्षेत्र बलतिर।