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Pithoragarh News: बेलखेत में मवेशी की मौत के बाद ग्रामीणों में डर का माहौल, डरे सहम लोग
Tue, 06 Oct 2026 11:18 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Tue, 06 Oct 2026 11:18 PM IST
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चंपावत। दियूरी ग्राम पंचायत बेलखेत में एक ग्रामीण के जंगली जानवर के पालतू मवेशी की मौत के बाद क्षेत्र में दहशत का माहौल है। बता दें कि दो दिन पूर्व बंगाल टाइगर का जोड़ा क्षेत्र में दिखाई देने से ग्रामीण डर सहमे थे। अब मवेशी की मौत के बाद डर दोगुना हो गया है। ग्रामीणों को आशंका है कि टाइगर ने मवेशी को मारा है। हालांकि वन विभाग की टीम ने बंगाल टाइगर के हमले में मवेशी के मौत की पुष्टि नहीं की है।
मंगलवार को शीश नगर के समीप एक पालतू गाय का शव सड़क पर पड़ा मिला। इससे ग्रामीणों में अब और भय बढ़ गया है। उन्होंने गाय की मौत टाइगर के हमले से होने की आशंका है। सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश बोहरा ने बताया कि मंगलवार सुबह को शीश नगर निवासी सूरज सिंह की गाय को टाइगर ने मौत के घाट उतार दिया। घटना की सूचना वन विभाग को दे दी गई है। ग्रामीणों ने पीड़ित को आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है। एसडीओ सुनील कुमार ने बताया कि सूचना के बाद वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया। हालांकि गाय पर टाइगर या तेंदुए ने हमला किया है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। बताया कि कैमरे ट्रैप से पता लगाया जा रहा कि बंगाल टाइगर का जोड़ा है कि तेंदुए का।
फॉरेस्ट गार्ड बलवंत भंडारी ने बताया कि शीश नगर और नैकयाना में भी सोमवार को गाय की मौत की जानकारी मिली थी। गहनता से जांच की गई है लेकिन हमला टाइगर ने हमला किया इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि बाघ एक बार में शिकार पूरा खा लेता है। बड़ा शिकार होने पर वह उसे खाने के बाद छुपा भी देता है। अनुमान लगाया कि तेंदुए ने गाय को मारा होगा। फिलहाल क्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरों में बंगाल टाइगर की मूवमेंट नहीं दिखी है। इस दौरान टीम ने क्षेत्र के लोगों को जागरूक किया।
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नरभक्षी बाघिन ने किया था 436 लोगों का शिकार
चंपावत। उत्तराखंड के इतिहास में चंपावत की नरभक्षी बाघिन का नाम सबसे खौफनाक घटनाओं में दर्ज है। ऐतिहासिक दस्तावेजों और जिम कॉर्बेट के विवरणों के अनुसार, इस बाघिन ने नेपाल और भारत के कुमाऊं क्षेत्र में करीब 436 लोगों का शिकार किया था। जिसे इतिहास की सबसे अधिक इंसानों का शिकार करने वाली नरभक्षी बाघिनों में माना जाता है। जानकारी के अनुसार बाघिन ने नेपाल में करीब 200 लोगों को अपना शिकार बनाया। इसके बाद वह नेपाल से निकलकर चंपावत क्षेत्र में पहुंची और यहां भी लंबे समय तक आतंक बना रहा। वर्ष 1907 में प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट ने चंपावत में 16 वर्षीय लड़की को शिकार बनाने के बाद इस नरभक्षी बाघिन को मार गिराया। यह कॉर्बेट का पहला सफल नरभक्षी शिकार माना जाता है। बाघिन के मारे जाने के बाद उसके शरीर की जांच में उसके दांत टूटे हुए पाए गए। बताया जाता है कि पुरानी बंदूक की गोली लगने से उसके ऊपरी और निचले कैनाइन दांत क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस कारण वह अपने प्राकृतिक शिकार को पकड़ने में असमर्थ हो गई और इंसानों का शिकार करने लगी।
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मंगलवार को शीश नगर के समीप एक पालतू गाय का शव सड़क पर पड़ा मिला। इससे ग्रामीणों में अब और भय बढ़ गया है। उन्होंने गाय की मौत टाइगर के हमले से होने की आशंका है। सामाजिक कार्यकर्ता दिनेश बोहरा ने बताया कि मंगलवार सुबह को शीश नगर निवासी सूरज सिंह की गाय को टाइगर ने मौत के घाट उतार दिया। घटना की सूचना वन विभाग को दे दी गई है। ग्रामीणों ने पीड़ित को आर्थिक मुआवजा देने की मांग की है। एसडीओ सुनील कुमार ने बताया कि सूचना के बाद वन विभाग की टीम को मौके पर भेजा गया। हालांकि गाय पर टाइगर या तेंदुए ने हमला किया है, इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है। बताया कि कैमरे ट्रैप से पता लगाया जा रहा कि बंगाल टाइगर का जोड़ा है कि तेंदुए का।
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फॉरेस्ट गार्ड बलवंत भंडारी ने बताया कि शीश नगर और नैकयाना में भी सोमवार को गाय की मौत की जानकारी मिली थी। गहनता से जांच की गई है लेकिन हमला टाइगर ने हमला किया इसकी पुष्टि नहीं हो पाई है। उन्होंने बताया कि बाघ एक बार में शिकार पूरा खा लेता है। बड़ा शिकार होने पर वह उसे खाने के बाद छुपा भी देता है। अनुमान लगाया कि तेंदुए ने गाय को मारा होगा। फिलहाल क्षेत्र में लगाए गए ट्रैप कैमरों में बंगाल टाइगर की मूवमेंट नहीं दिखी है। इस दौरान टीम ने क्षेत्र के लोगों को जागरूक किया।
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नरभक्षी बाघिन ने किया था 436 लोगों का शिकार
चंपावत। उत्तराखंड के इतिहास में चंपावत की नरभक्षी बाघिन का नाम सबसे खौफनाक घटनाओं में दर्ज है। ऐतिहासिक दस्तावेजों और जिम कॉर्बेट के विवरणों के अनुसार, इस बाघिन ने नेपाल और भारत के कुमाऊं क्षेत्र में करीब 436 लोगों का शिकार किया था। जिसे इतिहास की सबसे अधिक इंसानों का शिकार करने वाली नरभक्षी बाघिनों में माना जाता है। जानकारी के अनुसार बाघिन ने नेपाल में करीब 200 लोगों को अपना शिकार बनाया। इसके बाद वह नेपाल से निकलकर चंपावत क्षेत्र में पहुंची और यहां भी लंबे समय तक आतंक बना रहा। वर्ष 1907 में प्रसिद्ध शिकारी जिम कॉर्बेट ने चंपावत में 16 वर्षीय लड़की को शिकार बनाने के बाद इस नरभक्षी बाघिन को मार गिराया। यह कॉर्बेट का पहला सफल नरभक्षी शिकार माना जाता है। बाघिन के मारे जाने के बाद उसके शरीर की जांच में उसके दांत टूटे हुए पाए गए। बताया जाता है कि पुरानी बंदूक की गोली लगने से उसके ऊपरी और निचले कैनाइन दांत क्षतिग्रस्त हो गए थे। इस कारण वह अपने प्राकृतिक शिकार को पकड़ने में असमर्थ हो गई और इंसानों का शिकार करने लगी।