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अस्कोट को सीमांत जिला घोषित करो
ब्यूरो/अमर उजाला, अस्कोट
Updated Tue, 31 May 2016 10:41 PM IST
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जुलूस निकाला
- फोटो : अमर उजाला
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अस्कोट को सीमांत जिला घोषित करने की 25 वर्ष पुरानी मांग को लेकर क्षेत्र के तमाम संगठनों ने मंगलवार को बाजार में जुलूस निकाला। अस्कोट को जिले के लिए उपयुक्त बताते हुए संगठन के लोगों ने मुख्यमंत्री हरीश रावत को ज्ञापन भी भेजा। जुलूस के बाद व्यापार संघ अध्यक्ष टिकेंद्र पाल के नेतृत्व में रामलीला मैदान में सभा हुई।
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वक्ताओं ने कहा कि अस्कोट जिले की सभी जरूरतों को पूरा करता है। यह मुनस्यारी, धारचूला का केंद्र बिंदु है। अस्कोट को सीमांत जिला बनाने के लिए एक संगठन बनाने का निर्णय लिया गया। वरिष्ठ कांग्रेसी नेता आनंद बल्लभ ओझा के नेतृत्व में मंगलवार को धारचूला, मुनस्यारी क्षेत्र में जनसंपर्क के लिए एक टीम रवाना हुई। निर्णय लिया गया कि अगर अस्कोट को सीमांत जिला घोषित नहीं किया गया तो आंदोलन किया जाएगा।
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धारचूला के ब्लॉक प्रमुख नेत्र सिंह कुंवर, कांग्रेस प्रदेश उपाध्यक्ष शकुंतला दताल, कांग्रेसी नेता नारायण सिंह दरियाल ने भी अस्कोट को सीमांत जिला बनाने में सहमति दी है। जुलूस मेें भीम सिंह भंडारी, वीरजंग पाल, महेंद्र जेठी, जगत मनौला, मनोज लुंठी, तनुज पाल, महेश पाल, ललित पाल, खड़क सिंह भंडारी, मनमोहन पंत, हरीश पाल, गोविंद पाल, सुंदर सिंह बिष्ट, तेज सिंह बिष्ट, लोकमणि पांडे आदि शामिल थे।
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जिला मुख्यालय के लिए भवन देने को तैयार
रजवार कुंवर भानुराज पाल कहते हैं कि अस्कोट जिला गठन के सभी मानकों को पूरा करता है। सीमांत जिले के गठन के लिए कई बार लोग आंदोलन कर चुके हैं। अस्कोट को सीमांत जिला घोषित किया जाना चाहिए। जिला मुख्यालय के भवन की व्यवस्था होने तक वह अपना भवन देने के लिए तैयार हैं।