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आपदा राहत शिविरों में भोजन व्यवस्था बंद होने से आपदा प्रभावित नाराज
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आपदा राहत शिविरों में खाने की व्यवस्था बंद करने से आक्रोशित आपदा प्रभावितों ने प्रदर्शन किया।
- फोटो : PITHORAGARH
बंगापानी (पिथौरागढ़)। बंगापानी और बरम के सरकारी भवनों में रह रहे आपदा प्रभावितों के लिए प्रशासन की ओर से की जा रही भोजन व्यवस्था बंद कर दी गई है। इससे आपदा प्रभावितों में नाराजगी है। आपदा के बाद से प्रभावित राहत शिविरों में बेरोजगार बैठे हैं। कृषि योग्य भूमि के आपदा में बह जाने से वो खेती भी नहीं कर पा रहे हैं। ऐसे में भोजन की व्यवस्था बंद होने से भूखे रहने की नौबत आ गई है।
बरसात में धारचूला, बंगापानी, मुनस्यारी तहसील में आपदा ने जमकर कहर बरपाया था। टांगा गांव में सर्वाधिक नुकसान हुआ था। टांगा और सेरा सिरतोला गांव के खतरे की जद में आने के बाद आपदा प्रभावितों को सेरा गांव में बने मंडी भवन में रखा गया है। इसमें टांगा के 62 और सेरा सिरतोला के 10 आपदा प्रभावित परिवार रह रहे हैं। इधर बरम इंटर कॉलेज में 26 आपदा प्रभावित परिवार रह रहे हैं। प्रशासन ने इन राहत शिविरों भोजन की व्यवस्था बंद कर दी है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है। इससे उनके सामने परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करने में दिक्कत होगी। उनका कहना है कि उनके पास जो भी था सब आपदा की भेंट चढ़ चुका है। अब आगे कैसे परिवार का भरण पोषण करेंगे इसकी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुश्किल घड़ी में उनकी मदद करनी चाहिए।
जीआईसी बरम में रह रहे मोरी के प्रभावितों को प्रशासन ने थमाया नोटिस
एक नवंबर से पहले आपदा राहत शिविर खाली करने को कहा, परेशान हुए प्रभावित
बंगापानी (पिथौरागढ़)। राजकीय इंटर कॉलेज बरम में मोरी गांव के 26 आपदा प्रभावित रह रहे हैं। इन प्रभावितों को प्रशासन ने एक नवंबर से पहले आपदा राहत शिविर खाली करने का नोटिस दिया है। इससे आपदा प्रभावितों में नाराजगी हैं। उनका कहना है कि आपदा में वे अपना सब कुछ खो चुके हैं, राहत केंद्र से जाने के बाद वह कहां रहेंगे? इस बात को लेकर वह काफी चिंतित हैं।
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बंगापानी के मोरी तोक में आफत की बारिश ने जमकर कहर बरपाया था। भारी बारिश के कारण मोरी तोक में कई मकान ध्वस्त हो चुके हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कई मकान खतरे की जद में आ गए। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने यहां के 26 आपदा प्रभावितों को जीआईसी बरम में रखा गया था। दो नवंबर से 10वीं और 12 कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुल जाना है। इस कारण यहां रह रहे आपदा प्रभावितों को मजबूरन यह भवन खाली करना पड़ रहा है। आपदा प्रभावितों को प्रशासन ने भवन खाली करने के लिए एक नवंबर तक का समय दिया है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि राहत शिविर खाली करने के बाद वो कहां रहेंगे इसका पता नहीं है। आपदा प्रभावितों ने सरकार से विस्थापन होने तक रहने की उचित व्यवस्था करने की मांग की है।
पूर्व सैनिक और ग्राम प्रधान की खाने की व्यवस्था
बंगापानी। आपदा प्रभावितों के लिए प्रशासन की ओर से खाने की व्यवस्था बंद करने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी आगे आने लगे हैं। प्रधानपति प्रकाश रावत और पूर्व सैनिक चंचल महर ने खाने की व्यवस्था की। आपदा प्रभावितों ने इसके लिए लोगों का आभार जताया है।
आक्रोशित आपदा प्रभावितों ने किया प्रदर्शन
बंगापानी। आपदा राहत शिविरों में भोजन व्यवस्था बंद होने से गुस्साए आपदा प्रभावितों ने सरकार और शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर पान सिंह, केदार सिंह, डिगर सिंह, पार्वती देवी, दुर्गा सिंह, मदन सिंह, खीला देवी, दीवान सिंह, मोहनी देवी, जयंती देवी आदि रहे।
दो नवंबर से 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यालय खुलने हैं। इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आपदा प्रभावितों से विद्यालय भवन खाली करने को कहा है। आपदा प्रभावितों के लिए भोजन की व्यवस्था भी कर दी है।
- अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।
बोले आपदा प्रभावित-
आपदा राहत शिविर में भोजन की व्यवस्था को बंद कर दी है। रोजगार न होने के कारण परिवार के लिए खाना जुटाने में दिक्कत हो रही है। रहने का भी स्थायी ठौर ठिकाना नहीं है। सरकार को आपदा प्रभावितों का शीघ्र विस्थापन कराना चाहिए।
- पान सिंह, आपदा प्रभावित
आपदा में घर-जमीन सब खो चुके हैं। अब परिवार के साथ कहां जाए कुछ समझ में नहीं आ रहा है। समय से विस्थापन हो गया होता तो दिक्कत नहीं होती।
-केदार सिंह, आपदा सिंह
आपदा प्रभावितों के पास रोजगार नहीं है। ऐसे में परिवार के लिए खाने का प्रबंध करना चुनौती है। किसी तरह परिवार के लिए खाने का प्रबंध कर रहे हैं। रोजगार होता तो दिक्कत नहीं होती।
-डिगर सिंह, आपदा प्रभावित
आपदा प्रभावितों के विस्थापन को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। राहत शिविर खाली करने के बाद आपदा प्रभावित कहां रहेंगे इसका कोई पता नहीं है। शिविरों में भोजन व्यवस्था को भी बंद कर दिया है। इससे दिक्कत हो रही है।
- पार्वती देवी, आपदा प्रभावित
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बरसात में धारचूला, बंगापानी, मुनस्यारी तहसील में आपदा ने जमकर कहर बरपाया था। टांगा गांव में सर्वाधिक नुकसान हुआ था। टांगा और सेरा सिरतोला गांव के खतरे की जद में आने के बाद आपदा प्रभावितों को सेरा गांव में बने मंडी भवन में रखा गया है। इसमें टांगा के 62 और सेरा सिरतोला के 10 आपदा प्रभावित परिवार रह रहे हैं। इधर बरम इंटर कॉलेज में 26 आपदा प्रभावित परिवार रह रहे हैं। प्रशासन ने इन राहत शिविरों भोजन की व्यवस्था बंद कर दी है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि उनके पास रोजगार का कोई साधन नहीं है। इससे उनके सामने परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था करने में दिक्कत होगी। उनका कहना है कि उनके पास जो भी था सब आपदा की भेंट चढ़ चुका है। अब आगे कैसे परिवार का भरण पोषण करेंगे इसकी दिक्कत होगी। उन्होंने कहा कि सरकार को इस मुश्किल घड़ी में उनकी मदद करनी चाहिए।
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जीआईसी बरम में रह रहे मोरी के प्रभावितों को प्रशासन ने थमाया नोटिस
एक नवंबर से पहले आपदा राहत शिविर खाली करने को कहा, परेशान हुए प्रभावित
बंगापानी (पिथौरागढ़)। राजकीय इंटर कॉलेज बरम में मोरी गांव के 26 आपदा प्रभावित रह रहे हैं। इन प्रभावितों को प्रशासन ने एक नवंबर से पहले आपदा राहत शिविर खाली करने का नोटिस दिया है। इससे आपदा प्रभावितों में नाराजगी हैं। उनका कहना है कि आपदा में वे अपना सब कुछ खो चुके हैं, राहत केंद्र से जाने के बाद वह कहां रहेंगे? इस बात को लेकर वह काफी चिंतित हैं।
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बंगापानी के मोरी तोक में आफत की बारिश ने जमकर कहर बरपाया था। भारी बारिश के कारण मोरी तोक में कई मकान ध्वस्त हो चुके हैं। लगातार हो रहे भूस्खलन के कारण कई मकान खतरे की जद में आ गए। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने यहां के 26 आपदा प्रभावितों को जीआईसी बरम में रखा गया था। दो नवंबर से 10वीं और 12 कक्षा के विद्यार्थियों के लिए स्कूल खुल जाना है। इस कारण यहां रह रहे आपदा प्रभावितों को मजबूरन यह भवन खाली करना पड़ रहा है। आपदा प्रभावितों को प्रशासन ने भवन खाली करने के लिए एक नवंबर तक का समय दिया है। आपदा प्रभावितों का कहना है कि राहत शिविर खाली करने के बाद वो कहां रहेंगे इसका पता नहीं है। आपदा प्रभावितों ने सरकार से विस्थापन होने तक रहने की उचित व्यवस्था करने की मांग की है।
पूर्व सैनिक और ग्राम प्रधान की खाने की व्यवस्था
बंगापानी। आपदा प्रभावितों के लिए प्रशासन की ओर से खाने की व्यवस्था बंद करने के बाद स्थानीय जनप्रतिनिधि और समाजसेवी आगे आने लगे हैं। प्रधानपति प्रकाश रावत और पूर्व सैनिक चंचल महर ने खाने की व्यवस्था की। आपदा प्रभावितों ने इसके लिए लोगों का आभार जताया है।
आक्रोशित आपदा प्रभावितों ने किया प्रदर्शन
बंगापानी। आपदा राहत शिविरों में भोजन व्यवस्था बंद होने से गुस्साए आपदा प्रभावितों ने सरकार और शासन-प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन किया। उन्होंने कहा कि सरकार उनकी अनदेखी कर रही है। इसे कतई बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इस मौके पर पान सिंह, केदार सिंह, डिगर सिंह, पार्वती देवी, दुर्गा सिंह, मदन सिंह, खीला देवी, दीवान सिंह, मोहनी देवी, जयंती देवी आदि रहे।
दो नवंबर से 10वीं और 12वीं कक्षा के विद्यालय खुलने हैं। इसी को देखते हुए शिक्षा विभाग ने आपदा प्रभावितों से विद्यालय भवन खाली करने को कहा है। आपदा प्रभावितों के लिए भोजन की व्यवस्था भी कर दी है।
- अनिल कुमार शुक्ला, एसडीएम धारचूला।
बोले आपदा प्रभावित-
आपदा राहत शिविर में भोजन की व्यवस्था को बंद कर दी है। रोजगार न होने के कारण परिवार के लिए खाना जुटाने में दिक्कत हो रही है। रहने का भी स्थायी ठौर ठिकाना नहीं है। सरकार को आपदा प्रभावितों का शीघ्र विस्थापन कराना चाहिए।
- पान सिंह, आपदा प्रभावित
आपदा में घर-जमीन सब खो चुके हैं। अब परिवार के साथ कहां जाए कुछ समझ में नहीं आ रहा है। समय से विस्थापन हो गया होता तो दिक्कत नहीं होती।
-केदार सिंह, आपदा सिंह
आपदा प्रभावितों के पास रोजगार नहीं है। ऐसे में परिवार के लिए खाने का प्रबंध करना चुनौती है। किसी तरह परिवार के लिए खाने का प्रबंध कर रहे हैं। रोजगार होता तो दिक्कत नहीं होती।
-डिगर सिंह, आपदा प्रभावित
आपदा प्रभावितों के विस्थापन को लेकर सरकार गंभीर नहीं है। राहत शिविर खाली करने के बाद आपदा प्रभावित कहां रहेंगे इसका कोई पता नहीं है। शिविरों में भोजन व्यवस्था को भी बंद कर दिया है। इससे दिक्कत हो रही है।
- पार्वती देवी, आपदा प्रभावित