फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Anguish spills over in Mumbai... Migrants ask: "If development hasn't reached our villages, why shouldn't we migrate?"

Pithoragarh News: मुंबई में छलका दर्द... प्रवासी बोले, गांव में नहीं पहुंचा विकास तो हम क्यों नहीं करते पलायन

Wed, 05 Aug 2026 11:21 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़ Updated Wed, 05 Aug 2026 11:21 PM IST
विज्ञापन
Anguish spills over in Mumbai... Migrants ask: "If development hasn't reached our villages, why shouldn't we migrate?"
मुंबई में केंद्रीय सड़क एवं परिवहन राज्यमंत्री अजय टम्टा को ज्ञापन देते सीमा चकलेटी गांव के प्र
गणाई गंगोली(पिथौरागढ़)। ''हम गांव तक विकास पहुंचने की उम्मीद करते रहे लेकिन हमें हर बार मायूस होना पड़ा। हमारे गांव में सड़क नहीं पहुंची। पीने के लिए पानी तक नसीब नहीं हुआ। इन बदहाल व्यवस्थाओं से कैसे जूझते। ऐसे में हमें पलायन करना पड़ा।'' यह कहा गणाई गंगोली तहसील के बागेश्वर जिले की सीमा से लगे दूरस्थ गांव सीमा चकलेटी गांव के प्रवासियों ने मुंबई में। इस गांव की बदहाली की गूंज मुंबई तक भी जा पहुंची है। गांव से पलायन करने वाले प्रवासियों ने बीते दिनों मुंबई में आयोजित उत्तराखंड प्रवासी सम्मेलन में पहुंचे केंद्रीय सड़क व परिवहन राज्य मंत्री अजय टम्टा को ज्ञापन दिया। उन्होंने कहा कि हमारे गांव से पलायन होने का मुख्य कारण सड़क का न होना है। आज भी गांव तक सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। बीमारों और गर्भवतियों को डोली के सहारे अस्पताल पहुंचाना मजबूरी है। समय पर अस्पताल न पहुंचने से हमारे अपने रास्तों में दम तोड़ रहे हैं। स्थानीय स्तर पर बेहतर इलाज की सुविधा नहीं है। ऐसे में हमारे लिए पलायन करना ही मजबूरी बना है। सभी प्रवासियों ने राज्यमंत्री से सड़क की मांग करते हुए कहा कि यदि आवाजाही सुगम होगी तो हम रिवर्स पलायन कर वीरान हो रहे अपने गांव को फिर से आबाद कर सकते हैं। ज्ञापन देने वालों में मनोज भट्ट, हेम चंद्र पांडे, सुशील कुमार जोशी, महेंद्र गोसाईं, पूरन पांडे आदि मौजूद रहे।
विज्ञापन

बोले प्रवासी
मनोज भट्ट ने कहा कि गांव में सड़क की सुविधा नहीं है। ऐसे में हमने काफी दुश्वारियां झेलीं। इन्हीं से बचने के लिए पलायन करना पड़ा। यदि सड़क के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर मिलते तो हमें पलायन नहीं करना पड़ता।
विज्ञापन

पूरन पांडे ने कहा कि हमारे गांव और इसके आसपास सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा, पानी की कोई भी सुविधा नहीं है। हमारे पलायन करने के पीछे यही बदहाल व्यवस्थाएं कारण बनी हैं। पलायन रोकना है तो गांवों में मूलभूत सुविधाओं का विकास करना जरूरी है।
विज्ञापन
विज्ञापन

चंद्र बल्लभ पांडे ने कहा कि हमारे गांव सीमा चकलेटी और इसके तोक काकड़ पानी में 140 से अधिक परिवार निवास करते थे। सड़क, पानी की सुविधा न होने से 80 परिवार पलायन कर गए हैं। पलायन का दर्द तो है लेकिन क्या कर सकते हैं। सड़क पहुंचती तो रिवर्स पलायन भी होता।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed