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12 साल बाद घर लौटेगा लापता प्रेम
अमर उजाला ब्यूूूूराे चंपावत
Updated Tue, 06 Feb 2018 10:25 PM IST
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2005 से लापता पाटी विकासखंड के चौड़ापित्ता (गागरी गांव) निवासी प्रेम सिंह बोहरा को 12 साल से अधिक वक्त बाद खोज निकाला गया है। बुधवार को वे अपने घर पहुंच जाएंगे। उनकी सुरक्षित वापसी में घर के पते पर पहुंचे आधार कार्ड और हल्द्वानी के एक निजी स्कूल के रीठा साहिब निवासी शिक्षक का योगदान रहा। शेष काम पुलिस ने पूरा किया।
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गागरी गांव के प्रेम सिंह बोहरा पुत्र उमेद सिंह बोहरा जुलाई 2005 में इंटर पास करने के बाद हल्द्वानी गए। तबसे परिजनों से उनका कोई संपर्क नहीं रहा। परिवार ने कई जगह खोजबीन की, लेकिन कोई कामयाबी नहीं मिली। समय बीतने के साथ ही परिवार के लोगों की प्रेम के वापस आने की उम्मीद भी धूमिल होती रही। 2014 में पिता उमेद सिंह बोहरा की भी मौत हो गई। इस बीच एक दिन प्रेम का आधार कार्ड गांव पहुंचा। नवंबर 2017 में बनाए आधार कार्ड के दिसंबर में गांव पहुंचने से पूरे परिवार को उम्मीद की किरण जगी। पुलिस को पत्र भेजने के साथ ही हल्द्वानी में एक रिश्तेदार शिक्षक सुरेंद्र बोहरा ने सोशल मीडिया एवं अन्य माध्यम से प्रेम की खोज शुरू कर दी।
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पुलिस अधीक्षक धीरेंद्र गुंज्याल ने आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर और सिम में लगे दस्तावेजों से लोकेशन का पता लगाया। प्रेम की लोकेशन राजस्थान के सवाई माधोपुरा और सांगामेर में मिली, जबकि सिम राजस्थान के ही किसी अशोक कुमार नामक व्यक्ति की थी। इस जानकारी के बाद प्रेम के चाचा सेवानिवृत्त सूबेदार प्रताप सिंह बोहरा और भाई पुष्कर सिंह बेहरा ने इस माह के शुरू में राजस्थान का रुख किया। तीन दिन डेरा डालने के बाद चंपावत से गई पुलिस टीम के सहारे प्रेम को खोज निकाला। सांगामेर में वह मार्केटिंग के काम मेें लगा हुआ था। पुलिस टीम में स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप के भूपाल चंद और सिपाही मनविंदर शामिल थे।
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हल्द्वानी से बहला-फुसला कर ले गई थी निजी कंपनी
प्रेम सिंह ने बताया कि इंटर करने के बाद वह हल्द्वानी तो गया था, मगर गरीबी के चलते पढ़ाई आसान नहीं थी। इस बीच वह एक निजी कंपनी के संपर्क में आया, कंपनी ने उसे नौकरी का झांसा दिया और उसके शैक्षिक प्रमाणपत्र भी अपने कब्जे में ले लिए। इस वजह से वह करीब सात साल तक देहरादून में कंपनी में काम करने को मजबूर रहा। यहां से किसी तरह प्रमाणपत्र मिले, तो इसके बाद उसने राजस्थान का रुख किया और यहां भी एक निजी कंपनी के सामान की बिक्री का काम मिला। चाचा और भाई को देख प्रेम सिंह उनके गले लग गया। मंगलवार को प्रेम सिंह को परिजन वापस घर को ला रहे हैं। प्रेम के बुधवार शाम तक अपने गांव पहुंचने की उम्मीद है।
गदगद है पूरा परिवार
प्रेम का एक भाई पुष्कर पढ़ाई कर रहा है, जबकि बहन मानसिक रूप से बीमार है। परिवार के गुजर-बसर का जरिया खेती-बाड़ी होने से घर की माली हालत भी ठीक नहीं है और 2014 में पिता का साया भी उठ गया। इसके बावजूद विधवा मां हिम्मत के साथ परिवार को सहारा देती रही। प्रेम के सकुशल होने की जानकारी और जल्द घर वापसी से पूरा परिवार गदगद है।
रंग लाई शिक्षक सुरेंद्र बोहरा की मेहनत
लापता प्रेम की 12 साल बाद हुई खोजबीन में हल्द्वानी के निजी स्कूल में पढ़ा रहे गांव के निवासी सुरेंद्र सिंह बोहरा की बड़ी भूमिका है। आधार कार्ड मिलने के बाद उन्होंने पुलिस को जानकारी देने के अलावा सोशल मीडिया में लगातार मुहिम चलाई। आधार कार्ड में दर्ज मोबाइल नंबर बंद होने से संपर्क नहीं होने पर उन्होंने पुलिस के साइबर प्रकोष्ठ में संपर्क किया। परिजनों को उम्मीद जगाते रहने वाले सुरेेंद्र का कहना है कि आधार कार्ड मिलने के बाद उन्होंने विधवा मां को लापता बेेटे से मिलाने के लिए हर स्तर पर प्रयास करने की ठानी थी।