फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Pithoragarh News ›   Acid acid attack victim not received free treatment

तेजाब हमला पीड़िता को न मुआवजा मिला न मुफ्त इलाज

Sat, 10 Mar 2018 10:23 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़ Updated Sat, 10 Mar 2018 10:23 PM IST
विज्ञापन
Acid acid attack victim not received free treatment
पिथौरागढ़ में कबाड़ एकत्र करता एसिड अटेक पीड़िता का पति सगीर - फोटो : अमर उजाला

जिले की एसिड अटैक पीड़िता को ढाई माह बाद भी अहेतुक सहायता नहीं मिल सकी है। पीड़िता का पति मुुआवजे के लिए सरकारी अफसरों के चक्कर काट रहा है। हल्द्वानी एसटीएच में पिछले दस दिन से भर्ती पीड़िता को मुफ्त इलाज भी नहीं दिया जा रहा। दवाएं बाहर से मंगाई जा रही हैं। पीड़िता का परिवार इलाज के लिए पाई-पाई को मोहताज है।

विज्ञापन


पिथौरागढ़ में पिछले वर्ष 19 दिसंबर को एसिड अटैक की पहली घटना हुई थी। एकतरफा प्रेम-प्रसंग में आरोपी हाशिम ने विवाहिता परवीन पर तेजाब डाल दिया था। इस मामले में सत्र न्यायालय 27 फरवरी को आरोपी को सजा भी सुना चुका है। नियमानुसार पीड़िता को उत्तराखंड अपराध पीड़ित सहायता योजना के तहत 30 हजार रुपये की तात्कालिक सहायता दी जानी थी, जो ढाई महीने बाद भी नहीं मिली है। पति कबाड़ बीनकर परिवार का गुजर-बसर करता है। मुआवजे के लिए पति पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के लगातार चक्कर लगा रहा है। जिला पुलिस प्रशासन को मुआवजा देना है, लेकिन अदालत से सजा के बाद भी पुलिस मुख्यालय से पीड़िता को मुआवजा राशि स्वीकृत नहीं हुई है।
विज्ञापन


इस मामले में सुशीला तिवारी राजकीय अस्पताल प्रशासन का भी संवेदनहीन रवैया सामने आया है। पीड़िता के पति सगीर का कहना है कि सारी दवाएं बाहर से मंगाई जा रही हैं। पिथौरागढ़ से हल्द्वानी ले जाते वक्त एंबुलेंस की सुविधा तक नहीं दी गई। इस मामले में काबीना मंत्री प्रकाश पंत के निर्देश भी बेअसर रहे। पिथौरागढ़ से हल्द्वानी रेफर करने के बाद मंत्री ने एसटीएच अस्पताल प्रशासन को बाकायदा पत्र लिखकर निशुल्क इलाज के निर्देश दिए थे।
विज्ञापन
विज्ञापन


इलाज में खर्च हो चुकी जमापूंजी, जेवर तक बिका
पीड़िता के अब तक के इलाज के दौरान परिवार की जमा पूंजी खर्च हो चुकी है। मंत्री प्रकाश पंत समेत कुछ लोगों ने 15 हजार की मदद की थी, वह भी दवा खरीदने में खर्च हो गई। पीड़िता का 25 हजार का जेवर तक बिक चुका है। दवाओं का खर्च जुटाते-जुटाते पति पर 15 हजार का कर्जा हो गया है।

पीड़िता की देखभाल छोड़ मजदूरी में जुटा पति
इलाज की रकम जुटाने के लिए पति पीड़िता की देखभाल छोड़कर पिथौरागढ़ में मजदूरी में जुटा है। हल्द्वानी में भर्ती महिला महज 12 साल के बेटे के सहारे है। सगीर का कहना है कि इलाज का खर्च जुटाने की मजबूरी में पत्नी को मासूम बेटे के भरोसे छोड़कर काम करना पड़ रहा है। अब तक के इलाज में जमापूंजी, जेवर के साथ ही मिली मदद भी खर्च हो चुकी है।

उत्तराखंड अपराध पीड़ित सहायता योजना के तहत पुलिस मुख्यालय को सहायता का प्रस्ताव भेजा है। अब तक बजट नहीं मिला है। बजट मिलने के बाद सहायता मुहैया कराई जाएगी। -अजय जोशी, एसपी, पिथौरागढ़


एसिड अटैक पीड़िता परवीन के परिजनों से पूर्व में कुछ दवाएं, काटन और पट्टी बाहर से मंगाई गई हैं। बर्न वार्ड के स्टाफ को सख्त हिदायत दी गई है कि एसिड अटैक पीड़िता के परिजनों से कोई भी दवा या ड्रेसिंग का सामान बाहर से न मंगाया जाए। कहा कि परिजनों ने अगर शिकायत की तो बाहर से दवा या ड्रेसिंग का सामान मंगाने वाले स्टाफ के खिलाफ सख्त कार्रवाई की होगी।
-डॉ. अरुण जोशी, एमएस, सुशीला तिवारी अस्पताल

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed