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आदि कैलाश यात्रा के संचालन को लेकर असमंजस की स्थिति
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आदि कैलाश(फाइल)
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। कोरोना संक्रमण बढ़ने से इस साल भी पवित्र आदि कैलाश यात्रा स्थगित हो सकती है। कुमाऊं मंडल विकास निगम (केएमवीएन) में यात्रा के संचालन के प्रति असमंजस है जबकि पर्यटकों को उम्मीद थी कि आदि कैलाश यात्रा इस बार शुरू होगी, लेकिन इस बार भी यात्रा का संचालन कठिन लग रहा है।
कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ ही आदि कैलाश यात्रा भी प्रतिवर्ष जून से सितंबर तक संचालित की जाती है। इसमें देश-विदेश से कई श्रद्धालु आते हैं। वर्ष 2020 में कोरोना के कारण यात्रा का संचालन नहीं हो पाया था।
कोरोना की दूसरी लहर के कारण लगता है कि इस बार भी आदि कैलास यात्रा का संचालन नहीं होगा। केएमवीएन भी यात्रा के प्रति असमंजस की स्थिति में है।
समुद्रतल से 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश तिब्बत की सीमा के पास है। क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियां इसे कैलाश के समकक्ष ही बनाती हैं।
आदि कैलाश के दर्शन कर यहां की पवित्र पार्वती झील में स्नान का महत्व भी कैलाश मानसरोवर के दर्शन कर मानसरोवर झील में स्नान के बराबर ही है। इस क्षेत्र में पूर्ण रूप से प्राकृतिक सुंदरता फैली है। इसलिए बड़ी संख्या में लोग प्रतिवर्ष पवित्र आदि कैलाश यात्रा पर आते हैं।
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प्रति वर्ष 17 से 18 दल जाते हैं आदि कैलाश की यात्रा में
पिथौरागढ़। पवित्र आदि कैलाश यात्रा का बड़ा महत्व है। इस यात्रा में प्रतिवर्ष 17 से 18 दल हिस्सा लेते हैं। इनमें स्वदेशी और विदेशी नागरिक भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं।
आदि कैलाश यात्रा के संचालन से रूट पर स्थित होम स्टे संचालक, खच्चर स्वामियों को रोजगार मिलता है। होम स्टे संचालकों को भी इसका लाभ मिलता है। यात्रा शुरू न होने से लोगों में मायूसी है।
कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में आदि कैलाश यात्रा का संचालन मुश्किल लग रहा है। सरकारी गाइडलाइन लाइन के अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- अशोक जोशी, जीएम, कुमाऊं मंडल विकास निगम नैनीताल।
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कैलाश मानसरोवर यात्रा के साथ ही आदि कैलाश यात्रा भी प्रतिवर्ष जून से सितंबर तक संचालित की जाती है। इसमें देश-विदेश से कई श्रद्धालु आते हैं। वर्ष 2020 में कोरोना के कारण यात्रा का संचालन नहीं हो पाया था।
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कोरोना की दूसरी लहर के कारण लगता है कि इस बार भी आदि कैलास यात्रा का संचालन नहीं होगा। केएमवीएन भी यात्रा के प्रति असमंजस की स्थिति में है।
समुद्रतल से 6191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित आदि कैलाश तिब्बत की सीमा के पास है। क्षेत्र की विषम भौगोलिक परिस्थितियां इसे कैलाश के समकक्ष ही बनाती हैं।
आदि कैलाश के दर्शन कर यहां की पवित्र पार्वती झील में स्नान का महत्व भी कैलाश मानसरोवर के दर्शन कर मानसरोवर झील में स्नान के बराबर ही है। इस क्षेत्र में पूर्ण रूप से प्राकृतिक सुंदरता फैली है। इसलिए बड़ी संख्या में लोग प्रतिवर्ष पवित्र आदि कैलाश यात्रा पर आते हैं।
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प्रति वर्ष 17 से 18 दल जाते हैं आदि कैलाश की यात्रा में
पिथौरागढ़। पवित्र आदि कैलाश यात्रा का बड़ा महत्व है। इस यात्रा में प्रतिवर्ष 17 से 18 दल हिस्सा लेते हैं। इनमें स्वदेशी और विदेशी नागरिक भी बड़ी संख्या में हिस्सा लेते हैं।
आदि कैलाश यात्रा के संचालन से रूट पर स्थित होम स्टे संचालक, खच्चर स्वामियों को रोजगार मिलता है। होम स्टे संचालकों को भी इसका लाभ मिलता है। यात्रा शुरू न होने से लोगों में मायूसी है।
कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। ऐसी स्थिति में आदि कैलाश यात्रा का संचालन मुश्किल लग रहा है। सरकारी गाइडलाइन लाइन के अनुसार ही आगे की कार्यवाही की जाएगी।
- अशोक जोशी, जीएम, कुमाऊं मंडल विकास निगम नैनीताल।