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प्रभु राम ने पंचवटी में बनाई कुटिया
Pithoragarh
Updated Mon, 20 Oct 2014 05:33 AM IST
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डीडीहाट (पिथौरागढ़)। डीडीहाट के जौरासी कस्बे में रामलीला मंचन जारी है। रामलीला देखने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ रही है।
बुधवार रात की रामलीला में प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता के साथ वन को निकल गए हैं। गंगा तट पर केवट प्रभु राम के पांव धोकर उन्हें नदी पार कराता है। उतराई देने के लिए प्रभु राम अपने हाथ से अंगूठी निकालकर केवट की ओर बढ़ते हैं, लेकिन केवट लेने से इनकार कर देता है। पूछने पर केवट कहता है प्रभु आप मेरे द्वार आए तो मैंने आपको नदी पार कराई और जब मैं आपके द्वार आऊंगा तो आप मुझे भवसागर रूपी संसार से पार करा देना। राम, लक्ष्मण, सीता आगे बढ़ते हैं और पंचवटी में कुटिया बनाकर रहते लगते हैं। इधर, अयोध्या में राम के वन जाने की दुख में राजा दशरथ तड़पते हुए प्राण त्याग देते हैं। जब भरत, शत्रुघ्न को भैया राम, लक्ष्मण के वन जाने और पिता दशरथ के मौत का पता चलता है तो भरत राम को मनाने के लिए वन जाने की तैयारी करने लगते हैं।
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बुधवार रात की रामलीला में प्रभु राम, लक्ष्मण और सीता के साथ वन को निकल गए हैं। गंगा तट पर केवट प्रभु राम के पांव धोकर उन्हें नदी पार कराता है। उतराई देने के लिए प्रभु राम अपने हाथ से अंगूठी निकालकर केवट की ओर बढ़ते हैं, लेकिन केवट लेने से इनकार कर देता है। पूछने पर केवट कहता है प्रभु आप मेरे द्वार आए तो मैंने आपको नदी पार कराई और जब मैं आपके द्वार आऊंगा तो आप मुझे भवसागर रूपी संसार से पार करा देना। राम, लक्ष्मण, सीता आगे बढ़ते हैं और पंचवटी में कुटिया बनाकर रहते लगते हैं। इधर, अयोध्या में राम के वन जाने की दुख में राजा दशरथ तड़पते हुए प्राण त्याग देते हैं। जब भरत, शत्रुघ्न को भैया राम, लक्ष्मण के वन जाने और पिता दशरथ के मौत का पता चलता है तो भरत राम को मनाने के लिए वन जाने की तैयारी करने लगते हैं।