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जहां मरीज होने चाहिए थे, वहां नेपाली मजदूरों का डेरा?
Pithoragarh
Updated Tue, 02 Sep 2014 05:31 AM IST
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मदकोट (पिथौरागढ़)। क्या हो गया है इस प्रदेश की व्यवस्थाओं को जहां मरीजों को भर्ती रहना चाहिए था, वहां नेपाली मजदूरों ने डेरा जमा रखा है। मदकोट के उप स्वास्थ्य केंद्र के बिस्तरों में नेपाली मजदूरों ने कब्जा जमा रखा है। नेपाली मजदूर अस्पताल के कमरों में खुलेआम ताश खेलते दिखाई दे रहे हैं।
चार बिस्तर वाले मदकोट के उप स्वास्थ्य केंद्र का हाल में ही 10 बिस्तर वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण हुआ है। हालांकि अभी प्राथमिक स्वास्थ्य की शुरुआत नहीं हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन के पास ही नया भवन और स्टाफ क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। निर्माणाधीन भवनों में काम करने वाले नेपाली मजदूरों को चार बिस्तर वाले उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन जहां रोगियों का इलाज होना चाहिए, वहां ठहरा दिया गया है। इतना ही नहीं नेपाली मजदूरों को अस्पताल के बिस्तर, कुर्सी, टेबल तक दे दिए हैं?
नेपाली मजदूरों को अस्पताल के कमरों में सीमेंट के कट्टों से रस्सी बनाते, ताश खेलते देखा जा सकता है। उप स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मरीज भर्ती नहीं होते, इसी का लाभ उठाते हुए अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत से अस्पताल के कमरों को नेपाली मजदूरों के हवाले कर दिया गया है। यह मजदूर अस्पताल के निर्माणाधीन भवनों में काम करते हैं। बताया जा रहा है मजदूर एक माह से वहां रह रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र सिंह मर्तोलिया से फोन पर बात करनी चाही, उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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चार बिस्तर वाले मदकोट के उप स्वास्थ्य केंद्र का हाल में ही 10 बिस्तर वाले प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में उच्चीकरण हुआ है। हालांकि अभी प्राथमिक स्वास्थ्य की शुरुआत नहीं हुई है। उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन के पास ही नया भवन और स्टाफ क्वार्टर बनाए जा रहे हैं। निर्माणाधीन भवनों में काम करने वाले नेपाली मजदूरों को चार बिस्तर वाले उप स्वास्थ्य केंद्र के भवन जहां रोगियों का इलाज होना चाहिए, वहां ठहरा दिया गया है। इतना ही नहीं नेपाली मजदूरों को अस्पताल के बिस्तर, कुर्सी, टेबल तक दे दिए हैं?
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नेपाली मजदूरों को अस्पताल के कमरों में सीमेंट के कट्टों से रस्सी बनाते, ताश खेलते देखा जा सकता है। उप स्वास्थ्य केंद्र में इलाज की समुचित व्यवस्था न होने के कारण मरीज भर्ती नहीं होते, इसी का लाभ उठाते हुए अस्पताल प्रशासन की मिलीभगत से अस्पताल के कमरों को नेपाली मजदूरों के हवाले कर दिया गया है। यह मजदूर अस्पताल के निर्माणाधीन भवनों में काम करते हैं। बताया जा रहा है मजदूर एक माह से वहां रह रहे हैं। इस संबंध में अस्पताल के प्रभारी चिकित्साधिकारी डा. राजेंद्र सिंह मर्तोलिया से फोन पर बात करनी चाही, उन्होंने फोन नहीं उठाया।
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