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यारसागंबू खोदने में रुचि दिखाना अच्छा संकेत नहीं
Pithoragarh
Updated Tue, 27 May 2014 05:37 AM IST
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धारचूला (पिथौरागढ़)। अस्कोट-आराकोट अभियान दल के सदस्यों का कहना है कि सीमांत के लोग अब जिस तरह यारसागंबू खोदने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं वह अच्छा संकेत नहीं है। इससे एक ओर पर्यावरण को नुकसान पहुंचेगा और दूसरी ओर तात्कालिक रूप से पर्याप्त धन मिलने से उसे लोग मौज मस्ती में खर्च कर देते हैं। इसके बजाए यदि सीमांत के परंपरागत बुनकर व्यवसाय को बढ़ावा दिया जाता तो लोगों के पास स्थायी रोजगार हो जाता। अभियान दल के सदस्यों ने धारचूला के आपदा प्रभावित क्षेत्रों का जायजा लेने के बाद कहा कि आपदा से लोगों की कृषि, जीवनशैली, परंपरा पर गहरा आघात पहुंचा है। सरकार की भूमिका थोड़ा बहुत मुआवजा देकर समाप्त हो जाती है।
अभियान दल के सदस्यों ने आज नारायणआश्रम, खेला, स्यांकुरी, तवाघाट, जुम्मा, रांथी, तपोवन में अध्ययन किया। दोपहर बाद टीम के सदस्य धारचूला पहुंचे। यहां से एक टीम कालिका से बलुवाकोट को रवाना हो गई, जबकि दूसरी टीम पय्यांपौड़ी, पातल, कनार तक जाएगी। मंगलवार को दोनों टीमें बरम में मिल जाएंगी। अभियान दल के मुख्य संयोजक पद्मश्री डा. शेखर पाठक ने कहा कि पिछले 40 वर्ष में गांवों तक सड़कें तो पहुंची हैं लेकिन उसी गति से पलायन भी बढ़ा है। गांव के लोग शहरों में बसने को प्राथमिकता दे रहे हैं। गांव तेजी से खाली हो रहे हैं। सीमांत में जनशून्य की यह स्थितियां सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं है। डा. पाठक ने कहा कि इस अभियान के दौरान पर्यावरण, स्वरोजगार, शिक्षा की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है। पूरे दस साल में पहाड़ के गांवों में आए बदलाव का गहरा अध्ययन किया जाएगा और इसका एक दस्तावेज तैयार किया जाएगा। डा. पाठक ने कहा कि लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति खुद भी सजग रहना होगा, क्योंकि सरकार कभी भी सही तरीके की मदद नहीं करती और पुनर्वास की योजना नहीं बनाती। आपदाओं से लोग बुरी तरह टूट जाते हैं लेकिन उनको उसी हाल में रहने के लिए विवश किया जाता है।
अभियान दल में कमल जोशी, डा. गिरजा पांडे, चंदन डांगी, ललित परिहार, भूपेन सिंह, कमल कर्नाटक, अखिल जयरामन, डा. पुष्पा नैथानी, स्टीवडर्न, हिमानी, अंजलि जोशी समेत कुल 20 लोग शामिल हैं।
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अभियान दल के सदस्यों ने आज नारायणआश्रम, खेला, स्यांकुरी, तवाघाट, जुम्मा, रांथी, तपोवन में अध्ययन किया। दोपहर बाद टीम के सदस्य धारचूला पहुंचे। यहां से एक टीम कालिका से बलुवाकोट को रवाना हो गई, जबकि दूसरी टीम पय्यांपौड़ी, पातल, कनार तक जाएगी। मंगलवार को दोनों टीमें बरम में मिल जाएंगी। अभियान दल के मुख्य संयोजक पद्मश्री डा. शेखर पाठक ने कहा कि पिछले 40 वर्ष में गांवों तक सड़कें तो पहुंची हैं लेकिन उसी गति से पलायन भी बढ़ा है। गांव के लोग शहरों में बसने को प्राथमिकता दे रहे हैं। गांव तेजी से खाली हो रहे हैं। सीमांत में जनशून्य की यह स्थितियां सुरक्षा की दृष्टि से भी ठीक नहीं है। डा. पाठक ने कहा कि इस अभियान के दौरान पर्यावरण, स्वरोजगार, शिक्षा की स्थिति का अध्ययन किया जा रहा है। पूरे दस साल में पहाड़ के गांवों में आए बदलाव का गहरा अध्ययन किया जाएगा और इसका एक दस्तावेज तैयार किया जाएगा। डा. पाठक ने कहा कि लोगों को प्राकृतिक आपदाओं के प्रति खुद भी सजग रहना होगा, क्योंकि सरकार कभी भी सही तरीके की मदद नहीं करती और पुनर्वास की योजना नहीं बनाती। आपदाओं से लोग बुरी तरह टूट जाते हैं लेकिन उनको उसी हाल में रहने के लिए विवश किया जाता है।
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अभियान दल में कमल जोशी, डा. गिरजा पांडे, चंदन डांगी, ललित परिहार, भूपेन सिंह, कमल कर्नाटक, अखिल जयरामन, डा. पुष्पा नैथानी, स्टीवडर्न, हिमानी, अंजलि जोशी समेत कुल 20 लोग शामिल हैं।
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