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स्पोर्ट्स हॉस्टल में पढ़ाई भी खेल भी
Pithoragarh
Updated Mon, 30 Dec 2013 05:49 AM IST
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पिथौरागढ़। स्पोर्ट्स हॉस्टल में प्रदेश के सभी जिलों के 20 बच्चे एक तरफ खेल के गुर सीख रहे हैं तो दूसरी तरफ उनको इंटर की शिक्षा देने के लिए मिशन इंटर कॉलेज में प्रवेश मिला है। जिले में स्पोर्ट्स हॉस्टल एथलेटिक्स में चयनित बच्चों के लिए स्वीकृत है।
स्पोर्ट्स हॉस्टल में चयन की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। पहले इसके लिए जिला स्तर पर ट्रायल होते हैं। उसके बाद राज्य स्तर पर फाइनल ट्रायल होता है। मेरिट के आधार पर इनकी चयन सूची तैयार होती है। राज्य स्तर पर चयन के बाद जिस खिलाड़ी का जिस खेल के लिए चयन हुआ हो उसे वह हास्टल आवंटित हो जाता है। पिथौरागढ़ में एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए हास्टल पिछले पांच वर्ष से संचालित हो रहा है। इसमें सिर्फ बालकों को प्रवेश मिलता है।
जिला क्रीड़ा अधिकारी विनोद सिंह वल्दिया ने बताया कि सभी प्रवेशार्थियों को मिशन इंटर कालेज में एडमिशन दिया गया है। दिन के समय यह पढ़ाई करते हैं और सुबह तथा शाम अपने कोच से खेल के गुर सीखते हैं। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के आवास तथा भोजन की व्यवस्था खेल निदेशालय की ओर से की जाती है। उन्होंने बताया कि हास्टल में वार्डन की देखरेख में बच्चे रहते हैं। उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। हास्टल में रहने वाले बच्चों ने व्यवस्था पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि बड़ी मेहनत से उनका चयन हुआ है। ऐसे में पढ़ाई और खेल दोनों का ध्यान देते हैं।
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स्पोर्ट्स हॉस्टल में चयन की प्रक्रिया बेहद जटिल होती है। पहले इसके लिए जिला स्तर पर ट्रायल होते हैं। उसके बाद राज्य स्तर पर फाइनल ट्रायल होता है। मेरिट के आधार पर इनकी चयन सूची तैयार होती है। राज्य स्तर पर चयन के बाद जिस खिलाड़ी का जिस खेल के लिए चयन हुआ हो उसे वह हास्टल आवंटित हो जाता है। पिथौरागढ़ में एथलेटिक्स के खिलाड़ियों के लिए हास्टल पिछले पांच वर्ष से संचालित हो रहा है। इसमें सिर्फ बालकों को प्रवेश मिलता है।
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जिला क्रीड़ा अधिकारी विनोद सिंह वल्दिया ने बताया कि सभी प्रवेशार्थियों को मिशन इंटर कालेज में एडमिशन दिया गया है। दिन के समय यह पढ़ाई करते हैं और सुबह तथा शाम अपने कोच से खेल के गुर सीखते हैं। उन्होंने कहा कि हर बच्चे के आवास तथा भोजन की व्यवस्था खेल निदेशालय की ओर से की जाती है। उन्होंने बताया कि हास्टल में वार्डन की देखरेख में बच्चे रहते हैं। उनके स्वास्थ्य का पूरा ध्यान रखा जाता है। हास्टल में रहने वाले बच्चों ने व्यवस्था पर संतोष जताया। उन्होंने कहा कि बड़ी मेहनत से उनका चयन हुआ है। ऐसे में पढ़ाई और खेल दोनों का ध्यान देते हैं।
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