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वन भूमि के कारण सड़कों का निर्माण अधर में
Pithoragarh
Updated Wed, 21 Nov 2012 12:00 PM IST
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लोहाघाट। लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र में वन भूमि का निस्तारण न होने के कारण धूनाघाट-ब्रह्मतोड़ा, मरोड़खान-दयारतोली, छिनकाछीना-रौलमेल, अमोड़ी-छतकोट, चौमेल-मऊ-सील-बरियूड़ी, पटन गांव-कजीना-पुनौली, तिमलागूंठ-पीपलढींग, रीठाखाल-मनटांडे आदि सड़कों का निर्माण कार्य अधर में है। इन सड़कों को वन भूमि से निरापत्ति दिलाने का प्रस्ताव लोनिवि ने प्रभागीय वनाधिकारी कार्यालय के माध्यम से उत्तराखंड सरकार के पास भेजा है। जिसमें कुछ फाइलों के प्रस्ताव भारत सरकार को भी पहुंच चुके हैं। जिनमें अभी तक निरापत्ति न मिलने के कारण निर्माण कार्य लटके हुए हैं। इस संबंध में विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने राजस्व परिषद के अध्यक्ष को ज्ञापन देकर प्रस्तावित सड़कों के वन भूमि के मामलों को निस्तारित करने की मांग की।
इधर, क्षेत्रीय विधायक ने राज्य सरकार द्वारा पीपीपी मोड में चिकित्सालयों की व्यवस्था लिए जाने की प्रक्रिया में लोहाघाट के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी शामिल किए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस चिकित्सालय में रोगियों की संख्या बहुत अधिक रहती है। उन्होंने आशंका जताई है कि पीपीपी मोड में दिए जाने से यहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस संबंध में विधायक ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को पत्र भेजकर विरोध जताया है।
इधर, क्षेत्रीय विधायक ने राज्य सरकार द्वारा पीपीपी मोड में चिकित्सालयों की व्यवस्था लिए जाने की प्रक्रिया में लोहाघाट के राजकीय सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को भी शामिल किए जाने का विरोध किया है। उनका कहना है कि इस चिकित्सालय में रोगियों की संख्या बहुत अधिक रहती है। उन्होंने आशंका जताई है कि पीपीपी मोड में दिए जाने से यहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। इस संबंध में विधायक ने मुख्यमंत्री स्वास्थ्य मंत्री एवं प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य को पत्र भेजकर विरोध जताया है।
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