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नाई से ना नाई लेत, धोबी से ना धोबी लेत...
Pithoragarh
Updated Mon, 22 Oct 2012 12:00 PM IST
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पिथौरागढ़/गंगोलीहाट/अस्कोट/डीडीहाट/बेरीनाग। पिथौरागढ़, डीडीहाट और दशाईथल की रामलीला में वनवास पर गए राम को मनाने में भरत विफल रहते हैं। गंगोलीहाट और बेरीनाग में राम को वनवास हो गया है। अस्कोट में रामलीला शुरू हो गई है।
जिला मुख्यालय में चल रही दोनों राम लीलाओं के साथ ही डीडीहाट और दशाईथल की रामलीला में शनिवार को राम वनवास के बाद दशरथ मरण के वृतांत का मंचन किया गया। नंदीग्राम से लौटे भरत और शत्रुघ्न राम, लक्ष्मण, सीता के वन जाने और पिता की मृत्यु का समाचार सुनकर व्यथित हो जाते हैं। युवराज भरत क्रोध में माता कैकई को कुमाता तक कह डालते हैं तो उग्र स्वभाव के शत्रुघ्न रानी कैकई की दासी मंथरा पर अपना गुस्सा निकालते हैं। राज गुरु महर्षि वशिष्ठ से मंत्रणा के बाद भरत, शत्रुघ्न भगवान राम को मनाने के लिए चित्रकूट पहुंचते हैं लेकिन भगवान राम पिता की आज्ञा से पीछे हटने को तैयार नहीं होते, कह उठते हैं.. बैठि अयोध्या राज करो भैया निर्मल सरयू तीर। युवराज भरत भगवान राम के खड़ाऊं लेेकर अयोध्या लौट आते हैं।
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गंगोलीहाट और बेरीनाग में वनवास का मंचन हुआ। पिता के आदेश पर वन रवाना हुए भगवान राम सरयू के किनारे स्नान कर केवटराज गुह से नाव मंगाकर सरयू पार पहुंच जाते हैं। जहां भगवान राम उपहार में केवटराज को अंगूठी देना चाहते हैं लेकिन केवटराज कहते हैं..नाई से ना नाई लेत, धोबी से ना धोबी लेत, दे के मजूरिया ये जाति को न बिगाड़िए। कलाकारों ने इस भावपूर्ण दृष्य को बेहतरीन ढंग से मंचित किया। उधर, अस्कोट में रामलीला का उद्घाटन बीआरओ के द्वितीय कमान अधिकारी राजन लाल ने किया। पहले दिन नटी सूत्रधार ने मंचन की आधारशिला रखी। इसके बाद राजा दशरथ पुत्र प्राप्ति के उपाय बताने का आग्रह महर्षि वशिष्ठ से करते हैं। महर्षि वशिष्ठ के कहने पर राजा पुत्रेष्टि यज्ञ करने की सलाह देते हैं। उधर, देवगण पृथ्वी पर बढ़ रहे अत्याचार को समाप्त करने के लिए देव वंदना करते हैं। उसी समय जल्द धरती पर भगवान विष्णु के अवतार लेने की आकाशवाणी होती है।
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