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आपदा ने इस साल 11 लोगों की जान ली
Updated Sat, 06 Oct 2018 10:49 PM IST
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पिथौरागढ़। इस साल आपदा के कारण 11 लोग असमय मौत के मुंह में चले गए। लापता हुए पांच लोगों में से चार का अब तक पता नहीं चल पाया है। जिले में आपदा से कुल 2387 लोग प्रभावित हुए, जिन्हें 2 करोड़ 48 लाख 99 हजार 132 लाख का मुआवजा बांटा गया।
इस वर्ष आपदा में मारे गए 11 में से 10 लोगों के परिजनों को 40 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। बंगापानी के एक मृतक के परिजनों को राशि देने की कार्रवाई चल रही है। आपदा में पांच लोग लापता हुए। इनमें से मुनस्यारी के एक लापता के परिजनों को चार लाख की सहायता राशि दी जा चुकी है। धारचूला के चार लापता लोगों की मजिस्ट्रीयल जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद परिजनों को मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा इस साल आपदा से 15 लोग घायल हुए, जिनमें से 14 प्रभावितों को 1.19 लाख की राहत राशि वितरित हुई। थल के एक व्यक्ति को राहत राशि देने की कार्रवाई चल रही है। आपदा में 109 पशु मारे गए। 41 पशुपालकों को 9 लाख 3 हजार 275 रुपये का मुआवजा दिया गया।
आपदा में 37 मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए। 30 लोगों को 30.57 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। बंगापानी में एक एवं मुनस्यारी के छह आपदा प्रभावितों को मुआवजे का इंतजार है। आपदा में एक कच्चा भवन भी क्षतिग्रस्त हुआ था। प्रभावित परिवार को 1 लाख 746 रुपये, जबकि पक्के मकानों के आंशिक क्षतिग्रस्त होने पर 149 लोगों को 7 लाख 746 रुपये की धनराशि दी गई। 207 भवन तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए, इनमें से 176 को 1 करोड़ 24 लाख 0742 रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। शेष को मुआवजा देने की कार्रवाई चल रही है।
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आपदा से 33 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई। प्रभावितों को 69 हजार 3 रुपये की राहत राशि दी गई। इसके अलावा 1799 किसानों को 25 लाख 42 हजार 562 रुपये फसलों की क्षति के मुआवजे के तौर पर दिए गए। आपदा से प्रभावित जिले के 133 परिवारों को 4 लाख 946 हजार की अहेतुक धनराशि दी गई। जिला प्रशासन के अनुसार आपदा में मृत, लापता, घायल सहित अन्य प्रभावितों को मुआवजा देने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। सभी को शीघ्र मुआवजा दिया जाएगा।
लंबे समय तक ताजा रहेंगे आपदा के जख्म
पिथौरागढ़। आपदाकाल समाप्त हो गया, लेकिन आपदा के जख्म लंबे समय तक ताजा रहेंगे। आपदा से प्रभावित मुनस्यारी और धारचूला के इलाकों में जनजीवन अभी अस्तव्यस्त बना हुआ है। सड़कें, पैदल मार्ग बंद हैं। पेयजल योजनाओं का सुधार नहीं हो सका है। बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। टेंट में रह रहे लोगों ने घर वापसी तो कर दी है, लेकिन मौत का मुहाना बन चुके मकानों से खतरा बरकरार है।
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इस वर्ष आपदा में मारे गए 11 में से 10 लोगों के परिजनों को 40 लाख रुपये की सहायता राशि दी गई। बंगापानी के एक मृतक के परिजनों को राशि देने की कार्रवाई चल रही है। आपदा में पांच लोग लापता हुए। इनमें से मुनस्यारी के एक लापता के परिजनों को चार लाख की सहायता राशि दी जा चुकी है। धारचूला के चार लापता लोगों की मजिस्ट्रीयल जांच चल रही है। जांच पूरी होने के बाद परिजनों को मुआवजा मिलेगा। इसके अलावा इस साल आपदा से 15 लोग घायल हुए, जिनमें से 14 प्रभावितों को 1.19 लाख की राहत राशि वितरित हुई। थल के एक व्यक्ति को राहत राशि देने की कार्रवाई चल रही है। आपदा में 109 पशु मारे गए। 41 पशुपालकों को 9 लाख 3 हजार 275 रुपये का मुआवजा दिया गया।
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आपदा में 37 मकान पूर्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए। 30 लोगों को 30.57 लाख रुपये दिए जा चुके हैं। बंगापानी में एक एवं मुनस्यारी के छह आपदा प्रभावितों को मुआवजे का इंतजार है। आपदा में एक कच्चा भवन भी क्षतिग्रस्त हुआ था। प्रभावित परिवार को 1 लाख 746 रुपये, जबकि पक्के मकानों के आंशिक क्षतिग्रस्त होने पर 149 लोगों को 7 लाख 746 रुपये की धनराशि दी गई। 207 भवन तीक्ष्ण रूप से क्षतिग्रस्त हुए, इनमें से 176 को 1 करोड़ 24 लाख 0742 रुपये की राहत राशि दी जा चुकी है। शेष को मुआवजा देने की कार्रवाई चल रही है।
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आपदा से 33 गोशालाएं भी क्षतिग्रस्त हुई। प्रभावितों को 69 हजार 3 रुपये की राहत राशि दी गई। इसके अलावा 1799 किसानों को 25 लाख 42 हजार 562 रुपये फसलों की क्षति के मुआवजे के तौर पर दिए गए। आपदा से प्रभावित जिले के 133 परिवारों को 4 लाख 946 हजार की अहेतुक धनराशि दी गई। जिला प्रशासन के अनुसार आपदा में मृत, लापता, घायल सहित अन्य प्रभावितों को मुआवजा देने की कार्रवाई तेजी से चल रही है। सभी को शीघ्र मुआवजा दिया जाएगा।
लंबे समय तक ताजा रहेंगे आपदा के जख्म
पिथौरागढ़। आपदाकाल समाप्त हो गया, लेकिन आपदा के जख्म लंबे समय तक ताजा रहेंगे। आपदा से प्रभावित मुनस्यारी और धारचूला के इलाकों में जनजीवन अभी अस्तव्यस्त बना हुआ है। सड़कें, पैदल मार्ग बंद हैं। पेयजल योजनाओं का सुधार नहीं हो सका है। बिजली की लाइनें क्षतिग्रस्त पड़ी हैं। टेंट में रह रहे लोगों ने घर वापसी तो कर दी है, लेकिन मौत का मुहाना बन चुके मकानों से खतरा बरकरार है।