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जंग खा रहा है सचल चिकित्सा वाहन
Updated Tue, 28 Aug 2018 10:29 PM IST
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पिथौरागढ़। सीमांत से लगे गांवों में स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में भेजा गया सचल चिकित्सा वाहन दो साल से जंग खा रहा है। अनुबंध समाप्त होने के बाद सरकार ने नवीनीकरण तक के प्रयास नहीं किए हैं। इससे दूरस्थ में रहने वाले ग्रामीणों को चिकित्सा सुविधा से वंचित रहना पड़ रहा है, वहीं वाहन में रखे लाखों के उपकरण भी खराब हो रहे हैं।
उत्तराखंड सरकार ने अगस्त 2009 में 40 लाख की लागत से राज्य के प्रत्येक जिले में सचल चिकित्सा वाहन भेजा था। सरकार ने वाहन को दिल्ली के जैन वीडीओ के साथ करार करते हुए पीपीडी मोड पर दिया था। इस वाहन में चिकित्सा विशेषज्ञ के साथ ही अल्ट्रासाउंड मशीन और पैथोलॉजी की सुविधा थी। इस वाहन से दूरदराज गांवों के मरीजों को घर पर ही जांच और इलाज की सुविधा मिल रही थी।
सितंबर 2016 में सरकार का कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के बाद शासन ने इसे बंद करने के आदेश दे दिए। जैन वीडीओ ने बाद में इस वाहन को चिकित्सा विभाग के पास जमा कर दिया। दो वर्ष के बाद सरकार ने अब तक अनुबंध के नवीनीकरण के प्रयास नहीं किए गए हैं। इस कारण यह वाहन नगर के टीबी अस्पताल में खड़ा जंग खा रहा है।
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प्रत्येक माह लगाए जाते थे 15 कैंप
सचल चिकित्सा वाहन से जिले में प्रत्येक माह 15 कैंप लगाए जाते थे। जिसमें सरकार द्वारा निर्धारित यूजर चार्जेज ही लिया गया। सात सालों तक चली सुविधा से प्रत्येक माह 700 से अधिक रोगियों को फायदा मिला। सुविधा का लाभ चीन सीमा से लगे गांवों के लोगों ने भी उठाया।
वाहन की खरीद और संचालन शासन स्तर पर हुआ था। अनुबंध समाप्त होने के बाद स्वास्थ्य निदेशालय को कई बार अवगत कराया गया। सचल चिकित्सा वाहन के फिर से संचालन को लेकर शासन को पत्र भेजा जाएगा। -डॉ. ऊषा गुंज्याल, मुख्य चिकित्साधिकारी, पिथौरागढ़।
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उत्तराखंड सरकार ने अगस्त 2009 में 40 लाख की लागत से राज्य के प्रत्येक जिले में सचल चिकित्सा वाहन भेजा था। सरकार ने वाहन को दिल्ली के जैन वीडीओ के साथ करार करते हुए पीपीडी मोड पर दिया था। इस वाहन में चिकित्सा विशेषज्ञ के साथ ही अल्ट्रासाउंड मशीन और पैथोलॉजी की सुविधा थी। इस वाहन से दूरदराज गांवों के मरीजों को घर पर ही जांच और इलाज की सुविधा मिल रही थी।
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सितंबर 2016 में सरकार का कंपनी से अनुबंध समाप्त होने के बाद शासन ने इसे बंद करने के आदेश दे दिए। जैन वीडीओ ने बाद में इस वाहन को चिकित्सा विभाग के पास जमा कर दिया। दो वर्ष के बाद सरकार ने अब तक अनुबंध के नवीनीकरण के प्रयास नहीं किए गए हैं। इस कारण यह वाहन नगर के टीबी अस्पताल में खड़ा जंग खा रहा है।
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प्रत्येक माह लगाए जाते थे 15 कैंप
सचल चिकित्सा वाहन से जिले में प्रत्येक माह 15 कैंप लगाए जाते थे। जिसमें सरकार द्वारा निर्धारित यूजर चार्जेज ही लिया गया। सात सालों तक चली सुविधा से प्रत्येक माह 700 से अधिक रोगियों को फायदा मिला। सुविधा का लाभ चीन सीमा से लगे गांवों के लोगों ने भी उठाया।
वाहन की खरीद और संचालन शासन स्तर पर हुआ था। अनुबंध समाप्त होने के बाद स्वास्थ्य निदेशालय को कई बार अवगत कराया गया। सचल चिकित्सा वाहन के फिर से संचालन को लेकर शासन को पत्र भेजा जाएगा। -डॉ. ऊषा गुंज्याल, मुख्य चिकित्साधिकारी, पिथौरागढ़।