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संविदा कर्मियों के भरोसे चल रहा अस्पताल
Updated Thu, 19 Apr 2018 11:04 PM IST
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। अस्कोट के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की भी दशा खराब है। अस्पताल में तीन के स्थान पर सिर्फ दो डॉक्टर तैनात हैं, वह भी संविदा पर। सुविधा की बात करें तो खून की जांच तक इस अस्पताल में नहीं होती है।
अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को अस्पताल की व्यवस्थाओं की पड़ताल की। सुबह 8.5 बजे अमर उजाला की टीम अस्पताल पहुंची। यहां डॉक्टर और स्टाफ मौजूद था, लेकिन मरीज कोई नहीं था। 8.15 बजे लोनिवि कर्मचारी केदार सिंह बीपी और शुगर चेक कराने पहुंचा। आयुर्वेदिक डॉक्टर डमर सिंह बोनाल ने उसकी जांच की। सुबह 8.30 बजे बुखार, खांसी से पीड़ित अस्कोट निवासी पार्वती देवी अस्पताल पहुंचीं।
डॉक्टर ने जांच के बाद दवा लिखी। फार्मेसिस्ट मनोज भट्ट ने पार्वती देवी को दवा दी। सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर देवल निवासी ललित कुमार आंख, नाक, गले की जांच के लिए अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने के कारण डॉक्टर ने उसे चिकित्सा परामर्श देकर जिला अस्पताल जाने की सलाह दी। अमर उजाला की टीम 11 बजे तक अस्पताल में रही, इस दौरान इक्का-दुक्का मरीज और आए।
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अस्पताल में एक्सरे, पैथोलॉजी लैब तक की सुविधा नहीं है। लोगों को खून की जांच के लिए 20 किमी दूर डीडीहाट, 55 किमी दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। वर्ष 1979 बना अस्पताल भवन और स्टाफ क्वाटर जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। फार्मेसिस्ट मनोज भट्ट बताते हैं कि हल्की सी बारिश में भवन टपकने लगता है। भवन की छत पर लगे टिन हिलते हैं। डॉक्टर डमर सिंह बोनाल बताते हैं कि भवन का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
अस्पताल में पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं है। 25000 की आबादी की स्वास्थ्य देखभाल अव्यवस्थाओं के बीच संचालित अस्पताल पर छोड़ दी गई है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल कहती हैं कि डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए लगातार शासन को लिखा जा रहा है। भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
स्टाफ की स्थिति
अस्पताल में तीन डॉक्टरों के स्थान पर दो संविदा डॉक्टर (एक एलोपैथिक और एक आयुर्वेदिक) तैनात हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी का पद रिक्त है। फार्मेसिस्ट के दो पदों में से एक रिक्त है। एक स्टाफ नर्स संविदा पर तैनात है। एएनएम के दोनों पदों पर तैनाती हैं।
दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं उच्चीकरण की घोषणा
अस्कोट के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा दो-दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने और वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा की, जो अब तक धरातल पर नहीं उतरी।
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अमर उजाला ने बृहस्पतिवार को अस्पताल की व्यवस्थाओं की पड़ताल की। सुबह 8.5 बजे अमर उजाला की टीम अस्पताल पहुंची। यहां डॉक्टर और स्टाफ मौजूद था, लेकिन मरीज कोई नहीं था। 8.15 बजे लोनिवि कर्मचारी केदार सिंह बीपी और शुगर चेक कराने पहुंचा। आयुर्वेदिक डॉक्टर डमर सिंह बोनाल ने उसकी जांच की। सुबह 8.30 बजे बुखार, खांसी से पीड़ित अस्कोट निवासी पार्वती देवी अस्पताल पहुंचीं।
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डॉक्टर ने जांच के बाद दवा लिखी। फार्मेसिस्ट मनोज भट्ट ने पार्वती देवी को दवा दी। सुबह 9 बजकर 3 मिनट पर देवल निवासी ललित कुमार आंख, नाक, गले की जांच के लिए अस्पताल पहुंचे। अस्पताल में जांच की सुविधा न होने के कारण डॉक्टर ने उसे चिकित्सा परामर्श देकर जिला अस्पताल जाने की सलाह दी। अमर उजाला की टीम 11 बजे तक अस्पताल में रही, इस दौरान इक्का-दुक्का मरीज और आए।
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अस्पताल में एक्सरे, पैथोलॉजी लैब तक की सुविधा नहीं है। लोगों को खून की जांच के लिए 20 किमी दूर डीडीहाट, 55 किमी दूर पिथौरागढ़ जाना पड़ता है। वर्ष 1979 बना अस्पताल भवन और स्टाफ क्वाटर जीर्णशीर्ण अवस्था में पहुंच चुके हैं। फार्मेसिस्ट मनोज भट्ट बताते हैं कि हल्की सी बारिश में भवन टपकने लगता है। भवन की छत पर लगे टिन हिलते हैं। डॉक्टर डमर सिंह बोनाल बताते हैं कि भवन का प्रस्ताव उच्चाधिकारियों को भेजा गया है।
अस्पताल में पेयजल की भी कोई व्यवस्था नहीं है। 25000 की आबादी की स्वास्थ्य देखभाल अव्यवस्थाओं के बीच संचालित अस्पताल पर छोड़ दी गई है। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ. ऊषा गुंज्याल कहती हैं कि डॉक्टरों की नियुक्ति के लिए लगातार शासन को लिखा जा रहा है। भवन का प्रस्ताव शासन को भेजा जा रहा है।
स्टाफ की स्थिति
अस्पताल में तीन डॉक्टरों के स्थान पर दो संविदा डॉक्टर (एक एलोपैथिक और एक आयुर्वेदिक) तैनात हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी का पद रिक्त है। फार्मेसिस्ट के दो पदों में से एक रिक्त है। एक स्टाफ नर्स संविदा पर तैनात है। एएनएम के दोनों पदों पर तैनाती हैं।
दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं उच्चीकरण की घोषणा
अस्कोट के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा दो-दो मुख्यमंत्री कर चुके हैं। वर्ष 2010 में तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने और वर्ष 2014 में तत्कालीन मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अस्पताल को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र का दर्जा देने की घोषणा की, जो अब तक धरातल पर नहीं उतरी।