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बांध बनने पर लोग भविष्य के प्रति आशंकित
Updated Tue, 26 Dec 2017 10:53 PM IST
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पिथौरागढ़। पंचेश्वर घाटी के गांवों में अब हर जगह बांध को लेकर ही चर्चाएं हैं। लोगों की सुबह और शाम को चौपाल लगती है। वह बांध बनने पर पुनर्वास, विस्थापन, मुआवजा जैसी बातों पर मंथन करते हैं।
सरकार की ओर से अब तक बांध विस्थापितों के लिए कोई रुख स्पष्ट नहीं किया गया है। इस कारण भी लोगों की आशंका बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि बांध बनता है तो लोगों को जमीन के बदले उतनी ही जमीन दी जाए और हर भूमिहीन को पांच एकड़ जमीन का आवंटन हो। ताकि वह उस जमीन पर मकान बना सके और खेती कर सकें।
पंचेश्वर घाटी के सेल, सल्ला, पंथ्यूड़ा, सिमनौदा, खेतपुडौली गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। यह सभी गांव महाकाली के एकदम किनारे बसे हैं। बांध बनता है तो इन गांव के लोगों को जरूर अपने गांवों को छोड़कर जाना पड़ेगा। बुजुर्गों की पीड़ा इस रूप में सामने आ रही है कि अब बुढ़ापे में उनको अपना गांव छोड़ना पड़ जाएगा। वर्षों के संजोकर रखी गई संपत्ति जलमग्न हो जाएगी।
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लोगों की हर लड़ाई में साथ देंगे
पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत का कहना है कि बांध से विस्थापित होने वाले लोगों की हर लड़ाई में साथ दिया जाएगा और यदि वास्तव में बांध बनता है तो लोगों को उनका हक दिलाने की कोशिश की जाएगी। वह कहते हैं कि सरकार को एक बार फिर से लोगों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान करना चाहिए। अन्यथा स्थिति विस्फोटक भी हो सकती है।
प्रधानमंत्री पंचेश्वर घाटी का दौरा करें
पंचेश्वर घाटी के सल्ला गांव निवासी पूर्वसैनिक सोबी चंद का कहना है कि बांध का निर्माण शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री को इस घाटी का दौरा करना चाहिए। उनको यहां के लोगों की कठिनाई का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह कई बार प्रधानमंत्री को पत्र भेज चुके हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बांध प्रभावितों के साथ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को जनता से संवाद करना चाहिए।
पंचेश्वर बांध नहीं बनना चाहिए
पिथौरागढ़। डूब क्षेत्र के सल्ला गांव निवासी कालू चंद का कहना है कि पंचेश्वर बांध नहीं बनना चाहिए। सरकार के पास अब भी विचार करने का मौका है, क्योंकि बांध निर्माण शुरू नहीं हुआ है। उनको यह पीड़ा सता रही है कि बांध के साथ आस्था का केंद्र भी डूबने वाला है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों को दुख में डालने वाले इस बांध की कोई जरूरत नहीं है। सरकार प्रस्ताव वापस ले।
बांध निर्माण की सूचना चिंता में डालने वाली
पंचेश्वर घाटी के लक्ष्मण सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार के मंत्रियों को इलाके का दौरा करना चाहिए। लोगों की बात सुनकर अगला कदम उठाना चाहिए। किसी जिद में बांध का निर्माण करना गलत है। बांध से फायदे जो भी हों, लेकिन नुकसान बहुत ज्यादा होने वाला है। बेहद अभावों में जीवनयापन कर रहे लोगों के लिए बांध निर्माण की सूचना चिंता में डालने वाली है।
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सरकार की ओर से अब तक बांध विस्थापितों के लिए कोई रुख स्पष्ट नहीं किया गया है। इस कारण भी लोगों की आशंका बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि बांध बनता है तो लोगों को जमीन के बदले उतनी ही जमीन दी जाए और हर भूमिहीन को पांच एकड़ जमीन का आवंटन हो। ताकि वह उस जमीन पर मकान बना सके और खेती कर सकें।
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पंचेश्वर घाटी के सेल, सल्ला, पंथ्यूड़ा, सिमनौदा, खेतपुडौली गांव पूरी तरह डूब क्षेत्र में आ रहे हैं। यह सभी गांव महाकाली के एकदम किनारे बसे हैं। बांध बनता है तो इन गांव के लोगों को जरूर अपने गांवों को छोड़कर जाना पड़ेगा। बुजुर्गों की पीड़ा इस रूप में सामने आ रही है कि अब बुढ़ापे में उनको अपना गांव छोड़ना पड़ जाएगा। वर्षों के संजोकर रखी गई संपत्ति जलमग्न हो जाएगी।
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लोगों की हर लड़ाई में साथ देंगे
पंचेश्वर घाटी संघर्ष समिति के संयोजक मनोज सिंह सामंत का कहना है कि बांध से विस्थापित होने वाले लोगों की हर लड़ाई में साथ दिया जाएगा और यदि वास्तव में बांध बनता है तो लोगों को उनका हक दिलाने की कोशिश की जाएगी। वह कहते हैं कि सरकार को एक बार फिर से लोगों के मन में उठ रहे सवालों का समाधान करना चाहिए। अन्यथा स्थिति विस्फोटक भी हो सकती है।
प्रधानमंत्री पंचेश्वर घाटी का दौरा करें
पंचेश्वर घाटी के सल्ला गांव निवासी पूर्वसैनिक सोबी चंद का कहना है कि बांध का निर्माण शुरू करने से पहले प्रधानमंत्री को इस घाटी का दौरा करना चाहिए। उनको यहां के लोगों की कठिनाई का पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि वह कई बार प्रधानमंत्री को पत्र भेज चुके हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। बांध प्रभावितों के साथ प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री को जनता से संवाद करना चाहिए।
पंचेश्वर बांध नहीं बनना चाहिए
पिथौरागढ़। डूब क्षेत्र के सल्ला गांव निवासी कालू चंद का कहना है कि पंचेश्वर बांध नहीं बनना चाहिए। सरकार के पास अब भी विचार करने का मौका है, क्योंकि बांध निर्माण शुरू नहीं हुआ है। उनको यह पीड़ा सता रही है कि बांध के साथ आस्था का केंद्र भी डूबने वाला है। उन्होंने कहा कि हजारों लोगों को दुख में डालने वाले इस बांध की कोई जरूरत नहीं है। सरकार प्रस्ताव वापस ले।
बांध निर्माण की सूचना चिंता में डालने वाली
पंचेश्वर घाटी के लक्ष्मण सिंह का कहना है कि केंद्र सरकार के मंत्रियों को इलाके का दौरा करना चाहिए। लोगों की बात सुनकर अगला कदम उठाना चाहिए। किसी जिद में बांध का निर्माण करना गलत है। बांध से फायदे जो भी हों, लेकिन नुकसान बहुत ज्यादा होने वाला है। बेहद अभावों में जीवनयापन कर रहे लोगों के लिए बांध निर्माण की सूचना चिंता में डालने वाली है।