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व्यापक दृष्टिकोण से हल होगी वन्य जीवों की समस्या
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पिथौरागढ़। वन्य जीव संरक्षण और मानव के साथ उसके बढ़ते संघर्ष जैसे ज्वलंत मुद्दों पर कार्यशाला हुई। विशेषज्ञों का कहना था कि व्यापक दृष्टिकोण से वन्य जीवों की बढ़ती समस्या का समाधान किया जा सकता है।
वन विभाग के डाफिया सभागार में यूएनडीएम पोषित सिक्योर हिमालया परियोजना के तहत वन एवं पशुपालन विभाग के तत्वावधान में सुधि संस्था की ओर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन ‘वन्य जीव अपराध, कानून, उपचार एवं संरक्षण’ विषय पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून से आए वैज्ञानिकों ने वन्य जीवों के संरक्षण और नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में बताया।
वैज्ञानिक डॉ. काफिल हुसैन ने कहा कि वन्य जीव के रेस्क्यू मिशन में हमें उसकी फिजीबिलिटी के बारे में जानना जरूरी है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ. उपमा मनराल ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया कि केदारनाथ और मदमहेश्वर घाटी में पहले ग्रामीण सामूहिकता की भावना के साथ खेतीबाड़ी की रखवाली करते थे।
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अब जीवन शैली में बदलाव आने और लोगों के आत्मकेंद्रित होते जाने से सामूहिकता का अभाव हो गया है। उन्होंने कहा कि शहरों के साथ ही अब गांवों में भी कूड़ा घरों के आसपास फेंके जाने से जंगली जानवर आकर्षित हो रहे हैं। एसडीओ एके श्रीवास्तव ने कहा कि हमें कृषि उत्पादन का क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है। संचालन सुधि संस्था के सचिव किशोर पंत ने किया। कार्यक्रम में पशुचिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कुमार जोशी, रंजना पाल, डॉ. लाल सिंह सामंत, डॉ चेतना पंत, डॉ. सर्वेश कुमार, भुवन चंद्र जोशी, एसडीओ डीडीहाट मुरली मनोहर भट्ट, सुनील कुमार, चंद्रशेखर मुरारी सहित वन और पशुपालन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।
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वन विभाग के डाफिया सभागार में यूएनडीएम पोषित सिक्योर हिमालया परियोजना के तहत वन एवं पशुपालन विभाग के तत्वावधान में सुधि संस्था की ओर आयोजित दो दिवसीय कार्यशाला के पहले दिन ‘वन्य जीव अपराध, कानून, उपचार एवं संरक्षण’ विषय पर वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट देहरादून से आए वैज्ञानिकों ने वन्य जीवों के संरक्षण और नियंत्रण के वैज्ञानिक तरीकों के बारे में बताया।
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वैज्ञानिक डॉ. काफिल हुसैन ने कहा कि वन्य जीव के रेस्क्यू मिशन में हमें उसकी फिजीबिलिटी के बारे में जानना जरूरी है। वाइल्ड लाइफ इंस्टीट्यूट की वैज्ञानिक डॉ. उपमा मनराल ने अपने अध्ययन के आधार पर बताया कि केदारनाथ और मदमहेश्वर घाटी में पहले ग्रामीण सामूहिकता की भावना के साथ खेतीबाड़ी की रखवाली करते थे।
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अब जीवन शैली में बदलाव आने और लोगों के आत्मकेंद्रित होते जाने से सामूहिकता का अभाव हो गया है। उन्होंने कहा कि शहरों के साथ ही अब गांवों में भी कूड़ा घरों के आसपास फेंके जाने से जंगली जानवर आकर्षित हो रहे हैं। एसडीओ एके श्रीवास्तव ने कहा कि हमें कृषि उत्पादन का क्षेत्र बढ़ाने की जरूरत है। संचालन सुधि संस्था के सचिव किशोर पंत ने किया। कार्यक्रम में पशुचिकित्साधिकारी डॉ. मनोज कुमार जोशी, रंजना पाल, डॉ. लाल सिंह सामंत, डॉ चेतना पंत, डॉ. सर्वेश कुमार, भुवन चंद्र जोशी, एसडीओ डीडीहाट मुरली मनोहर भट्ट, सुनील कुमार, चंद्रशेखर मुरारी सहित वन और पशुपालन विभाग के कर्मचारी मौजूद रहे।