{"_id":"5a4bba764f1c1bcf6d8b77a6","slug":"51514912374-pithoragarh-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"प्रेमा दी के जुनून का जवाब नहीं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
प्रेमा दी के जुनून का जवाब नहीं
Updated Tue, 02 Jan 2018 10:29 PM IST
विज्ञापन
पिथौरागढ़। देवलथल की प्रेमा दीदी के जुनून का कोई जवाब नहीं है। प्रेमा दी के नाम से प्रसिद्ध समाजसेवी प्रेमा बसेड़ा स्वच्छता के क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य कर लोगों के लिए प्रेरणा बनी हुई हैं। वह जहां गंदगी देखती हैं, उसे साफ करने में जुट जाती हैं। उनके अभियान का असर भी हो रहा है। विद्यार्थी, युवा वर्ग के साथ ही स्थानीय महिलाएं भी उनके साथ जुड़ने लगी हैं।
समाजसेवी प्रेमा बसेड़ा (55) पिछले एक साल से देवलथल और उसके आसपास के क्षेत्र को साफ बनाने की मुहिम में जुटी हैं। देवलथल बाजार के साथ ही राजकीय इंटर कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्र में प्रेमा दी को सफाई करने में जुटा देखा जा सकता है। वह कभी नालियों की सफाई करती हैं तो कभी झाड़ियों का कटान, कभी सार्वजनिक शौचालय की सफाई।
उनके सफाई अभियान में अब विद्यार्थियों के साथ ही समाज के जागरूक लोग जुड़ने लगे हैं। प्रेमा दी स्वच्छता के साथ ही विद्यार्थियों को योगाभ्यास भी कराती हैं। इतना ही नहीं वह महिलाओं के उत्थान के लिए महिला जागृति मंच नाम से संगठन भी चलाती हैं।
विज्ञापन
प्रेमा दी कहती हैं कि अपने आसपास सफाई रखने से वातावरण भी शुद्ध होता है। कहती हैं कि शरीर कोे स्वस्थ रखने में योग कारगर है, इसलिए वह विद्यार्थियों को योग की शिक्षा देती हैं।
विज्ञापन
समाजसेवी प्रेमा बसेड़ा (55) पिछले एक साल से देवलथल और उसके आसपास के क्षेत्र को साफ बनाने की मुहिम में जुटी हैं। देवलथल बाजार के साथ ही राजकीय इंटर कॉलेज परिसर और आसपास के क्षेत्र में प्रेमा दी को सफाई करने में जुटा देखा जा सकता है। वह कभी नालियों की सफाई करती हैं तो कभी झाड़ियों का कटान, कभी सार्वजनिक शौचालय की सफाई।
विज्ञापन
उनके सफाई अभियान में अब विद्यार्थियों के साथ ही समाज के जागरूक लोग जुड़ने लगे हैं। प्रेमा दी स्वच्छता के साथ ही विद्यार्थियों को योगाभ्यास भी कराती हैं। इतना ही नहीं वह महिलाओं के उत्थान के लिए महिला जागृति मंच नाम से संगठन भी चलाती हैं।
विज्ञापन
प्रेमा दी कहती हैं कि अपने आसपास सफाई रखने से वातावरण भी शुद्ध होता है। कहती हैं कि शरीर कोे स्वस्थ रखने में योग कारगर है, इसलिए वह विद्यार्थियों को योग की शिक्षा देती हैं।