{"_id":"66f44568097d6d76fb0429f1","slug":"50-meter-part-of-thal-satsiling-highway-again-submerged-in-river-speed-stopped-pithoragarh-news-c-230-1-alm1001-118355-2024-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Pithoragarh News: थल-सातसिलिंग हाईवे का 50 मीटर हिस्सा फिर नदी में समाया, थमी रफ्तार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Pithoragarh News: थल-सातसिलिंग हाईवे का 50 मीटर हिस्सा फिर नदी में समाया, थमी रफ्तार
Wed, 25 Sep 2024 10:46 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
Updated Wed, 25 Sep 2024 10:46 PM IST
विज्ञापन
थल-सातसिलिंग सड़क पर पड़ी दरारें और गायब हिस्सा। संवाद
थल (पिथौरागढ़)। थल-सातसिलिंग हाईवे पर नागीमल की पहाड़ी लोनिवि के साथ ही यात्रियों और वाहन चालकों के लिए सिरदर्द बन गई है। पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरने से हाईवे का 50 मीटर हिस्सा ध्वस्त होकर रामगंगा नदी में समा गया। फिर से इस पर आवाजाही पूरी तरह ठप होने से क्षेत्र के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है।
बीते दिनों नागीमल की पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर गिर गए और थल-सातसिलिंग हाईवे का 150 मीटर हिस्सा ध्वस्त होकर रामगंगा नदी में समा गया था। ऐसे में 13 दिन तक आवाजाही पूरी तरह ठप रही। किसी तरह नई सड़क काटकर आवाजाही शुरू कराई गई।
बीते मंगलवार रात हुई बारिश के बाद पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरे तो सड़क का 50 मीटर हिस्सा फिर से नदी में समा गया। संयोग से घटना के समय कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। ऐसे में बड़ी घटना होने से बच गई। हालांकि सड़क पर आवाजाही ठप होने क्षेत्र के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है।
विज्ञापन
वाहन चालकों और यात्रियों को वाया डीडीहाट 20 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाकर आवाजाही करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके लिए यात्री अधिक किराया चुकाने के लिए मजबूर हैं।
तटबंध न होने से लगातार हो रहा है भूकटाव
थल। आपदाकाल में सुरक्षा के जो दावे हो रहे हैं वह थल-सातसिलिंग हाईवे पर बेअसर हैं। बारिश के बाद उफान पर आई रामगंगा नदी से नागीमल की पहाड़ी के नीचे लगातार भू-कटाव हो रहा है। तटबंध न होने से सड़क आए दिन नदी में समा रही है इससे हर कोई परेशान है। यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष सलीम अहमद ने कहा कि नदी के कटाव से सड़क खोखली हो चुकी है। कटाव को रोकने के लिए तटबंध बनाए जाने थे। ऐसा नहीं हुआ इसकी मार क्षेत्र के लोग सह रहे हैं।
विज्ञापन
बीते दिनों नागीमल की पहाड़ी दरकने से भारी मात्रा में मलबा, बोल्डर गिर गए और थल-सातसिलिंग हाईवे का 150 मीटर हिस्सा ध्वस्त होकर रामगंगा नदी में समा गया था। ऐसे में 13 दिन तक आवाजाही पूरी तरह ठप रही। किसी तरह नई सड़क काटकर आवाजाही शुरू कराई गई।
विज्ञापन
बीते मंगलवार रात हुई बारिश के बाद पहाड़ी से मलबा और बोल्डर गिरे तो सड़क का 50 मीटर हिस्सा फिर से नदी में समा गया। संयोग से घटना के समय कोई वाहन नहीं गुजर रहा था। ऐसे में बड़ी घटना होने से बच गई। हालांकि सड़क पर आवाजाही ठप होने क्षेत्र के लोगों की दिक्कत बढ़ गई है।
विज्ञापन
वाहन चालकों और यात्रियों को वाया डीडीहाट 20 किमी का अतिरिक्त फेरा लगाकर आवाजाही करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। इसके लिए यात्री अधिक किराया चुकाने के लिए मजबूर हैं।
तटबंध न होने से लगातार हो रहा है भूकटाव
थल। आपदाकाल में सुरक्षा के जो दावे हो रहे हैं वह थल-सातसिलिंग हाईवे पर बेअसर हैं। बारिश के बाद उफान पर आई रामगंगा नदी से नागीमल की पहाड़ी के नीचे लगातार भू-कटाव हो रहा है। तटबंध न होने से सड़क आए दिन नदी में समा रही है इससे हर कोई परेशान है। यूकेडी के केंद्रीय उपाध्यक्ष सलीम अहमद ने कहा कि नदी के कटाव से सड़क खोखली हो चुकी है। कटाव को रोकने के लिए तटबंध बनाए जाने थे। ऐसा नहीं हुआ इसकी मार क्षेत्र के लोग सह रहे हैं।