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पंचेश्वर नहीं चमगाड़ परियोजना बनाओ
Updated Sat, 24 Jun 2017 10:52 PM IST
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पंचेश्वर नहीं चमगाड़ परियोजना बनाओ
पिथौरागढ़। राज्यसभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने पंचेश्वर बांध के स्थान पर चमगाड़ बांध का काम आगे बढ़ाने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि भूकंप की दृष्टि से जोन 5 में शामिल क्षेत्र में 6000 मेगावाट का महाबांध बनाने पर केंद्र सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। माहरा ने कहा वर्ष 1978-79 में स्वीकृत 400 मेगावाट की चमगाड़ परियोजना में 50 लाख रुपये की रकम खर्च भी हो चुकी है।
पत्रकार वार्ता में माहरा ने कहा कि पंचेश्वर बांध भूगर्भीय दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है। केंद्र सरकार को चमगाड़ बांध निर्माण में रुचि दिखानी चाहिए। माहरा ने कहा केंद्र सरकार ने वर्ष 1984 में चमगाड़ बांध निर्माण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत किए। परियोजना निर्माण के लिए पिथौरागढ़ में अलग से सिंचाई विभाग का डिवीजन स्थापित था। चमगाड़ में कई टनलों का निर्माण हुआ है। 230 मीटर की ऊंचाई वाले चमगाड़ परियोजना से 4 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की योजना थी। 3586.65 वर्गमीटर में चमगाड़ परियोजना का जलाशय बनना था। 3750 हेक्टेयर डूब क्षेत्र था। चमगाड़ परियोजना से केवल 800 से 1000 परिवार प्रभावित होंगे, जबकि पंचेश्वर बांध 31000 परिवारों को प्रभावित करेगा।
माहरा ने कहा पंचेश्वर बांध भारत और नेपाल की जमीन पर बनना है। नेपाल के राजनीतिक हालातों के चलते पंचेश्वर बांध का मामला 50 साल बाद भी नहीं सुलझा है। कहा कि चमगाड़ परियोजना का मामला यूपीए काल में उठाया जा चुका है, एक बार फिर राज्यसभा में इस मामले को कांग्रेस पुरजोर तरीके से उठाएगी। वार्ता में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता खीमराज जोशी, प्रेम सिंह बिष्ट, मोहन लाल चौधरी, हाजी भूरे मियां मौजूद थे।
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राज्यसभा में उठेगा किसान आत्महत्या प्रकरण
राज्यसभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने डोलडुंगरी के किसान आत्महत्या प्रकरण में केंद्र सरकार को निशाने पर रखते हुए कहा कि वह यह मामला राज्यसभा में उठाएंगे। कहा कि एनडीए सरकार किसानों के हित में कोई भी नीति बनाने में नाकाम रही है। देशभर में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उत्तराखंड में किसान को आत्महत्या करनी पड़ रही है, जो दुखद है।
केंद्र ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को अनुपयुक्त बताया
राज्यसभा सदस्य माहरा ने केंद्र सरकार पर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने रेल लाइन को अनुपयुक्त बताया है। केंद्र सरकार पहाड़ पर रेल सुविधा देने की पक्षधर नहीं है।
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पिथौरागढ़। राज्यसभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने पंचेश्वर बांध के स्थान पर चमगाड़ बांध का काम आगे बढ़ाने की पैरवी की है। उन्होंने कहा कि भूकंप की दृष्टि से जोन 5 में शामिल क्षेत्र में 6000 मेगावाट का महाबांध बनाने पर केंद्र सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए। माहरा ने कहा वर्ष 1978-79 में स्वीकृत 400 मेगावाट की चमगाड़ परियोजना में 50 लाख रुपये की रकम खर्च भी हो चुकी है।
पत्रकार वार्ता में माहरा ने कहा कि पंचेश्वर बांध भूगर्भीय दृष्टिकोण से भी उचित नहीं है। केंद्र सरकार को चमगाड़ बांध निर्माण में रुचि दिखानी चाहिए। माहरा ने कहा केंद्र सरकार ने वर्ष 1984 में चमगाड़ बांध निर्माण के लिए 50 लाख रुपये स्वीकृत किए। परियोजना निर्माण के लिए पिथौरागढ़ में अलग से सिंचाई विभाग का डिवीजन स्थापित था। चमगाड़ में कई टनलों का निर्माण हुआ है। 230 मीटर की ऊंचाई वाले चमगाड़ परियोजना से 4 लाख हेक्टेयर भूमि सिंचित करने की योजना थी। 3586.65 वर्गमीटर में चमगाड़ परियोजना का जलाशय बनना था। 3750 हेक्टेयर डूब क्षेत्र था। चमगाड़ परियोजना से केवल 800 से 1000 परिवार प्रभावित होंगे, जबकि पंचेश्वर बांध 31000 परिवारों को प्रभावित करेगा।
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माहरा ने कहा पंचेश्वर बांध भारत और नेपाल की जमीन पर बनना है। नेपाल के राजनीतिक हालातों के चलते पंचेश्वर बांध का मामला 50 साल बाद भी नहीं सुलझा है। कहा कि चमगाड़ परियोजना का मामला यूपीए काल में उठाया जा चुका है, एक बार फिर राज्यसभा में इस मामले को कांग्रेस पुरजोर तरीके से उठाएगी। वार्ता में कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता खीमराज जोशी, प्रेम सिंह बिष्ट, मोहन लाल चौधरी, हाजी भूरे मियां मौजूद थे।
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राज्यसभा में उठेगा किसान आत्महत्या प्रकरण
राज्यसभा सदस्य महेंद्र सिंह माहरा ने डोलडुंगरी के किसान आत्महत्या प्रकरण में केंद्र सरकार को निशाने पर रखते हुए कहा कि वह यह मामला राज्यसभा में उठाएंगे। कहा कि एनडीए सरकार किसानों के हित में कोई भी नीति बनाने में नाकाम रही है। देशभर में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। उत्तराखंड में किसान को आत्महत्या करनी पड़ रही है, जो दुखद है।
केंद्र ने टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को अनुपयुक्त बताया
राज्यसभा सदस्य माहरा ने केंद्र सरकार पर टनकपुर-बागेश्वर रेल लाइन को ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि राज्यसभा में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में सरकार ने रेल लाइन को अनुपयुक्त बताया है। केंद्र सरकार पहाड़ पर रेल सुविधा देने की पक्षधर नहीं है।